माओवादियों के दिल के करीब 'हजार चौरासी की मां'

काठमांडू में नक्सली आंदोलन पर आधारित फिल्म 'हजार चौरासी की मां' की स्क्रीनिंग की विशेष व्यवस्था की गई थी। इसे देखने के लिए दर्शकों की अच्छी खासी भीड़ उमड़ पड़ी। सभागार में जिन लोगों को बैठने के लिए कुर्सियां नहीं मिली उन्होंने जमीन पर बैठकर इस फिल्म को देखा। भारतीय संस्कृति केंद्र द्वारा आयोजित भारतीय फिल्म महोत्सव में दिखाई गई यह फिल्म वर्ष 1998 में बनी थी। पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी आंदोलन पर आधारित इस फिल्म ने नेपाल में भी माओवादी आंदोलन का अनुभव कर चुके दर्शकों के मन को छुआ।
फिल्म की कहानी एक बहादुर मां की है, जिसे अपने बेटे की मौत के बाद पता चलता है कि उसका बेटा असल में नक्सली था। फिल्म देखने सभागार पहुंची नेपाल की माओवादी पार्टी के उप प्रमुख बाबूराम भट्टराई की पुत्री मानुषी भट्टराई ने कहा कि निहलानी की फिल्म से वह जुड़ाव महसूस करती हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म देखते हुए वह छात्र जीवन को याद करने लगी थीं, जब वह माओवादी आंदोलन में शामिल हुईं थीं। मानुषी ने कहा, "पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी आंदोलन पर आधारित फिल्म हजार चौरासी की मां की पृष्ठभूमि से भारत और नेपाल दोनों ही परिचित है।"
वरिष्ठ फिल्म पत्रकार विष्णु गौतम ने कहा कि निहलानी की फिल्म नेपाल के लिए प्रासंगिक है। उन्होंने कहा, "युवा पीढ़ी बिना अपने परिवार को बताए सशस्त्र आंदोलन में शामिल हुई। आंदोलन के बीच जब युवा मारे गए तो उनके परिजनों को दुख्रों का सामना करना पड़ा। निहलानी की यही पृष्ठभूमि नेपाल के जनांदोलन से मेल खाती है।" फिल्म के विशेष प्रदर्शन के दौरान फिल्म के निर्देशक निहलानी भी नेपाल में उपस्थित थे। इस फिल्म में मुख्य किरदार जया बच्चन ने निभाया है।


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