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    हार्ड कौर का देसी डांस जल्द

    By Staff
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    हार्ड कौर का देसी डांस जल्द

    रचना श्रीवास्तव

    बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

    29 जुलाई 1979 को कानपुर में जन्मी एक छोटी सी लड़की जब भारत से लंदन आई तो उसे पाश्चात्य संगीत का पता भी नहीं था. वो जानती थी बस एक नाम माइकल जैक्सन का. उस समय इस लड़की को ये मालूम भी नहीं था कि वो क्या करने वाली है.

    लेकिन जीवन में माँ के स्नेह और प्रोत्साहन ने उसे अपने जीवन की दिशा चुनने का हौसला और मौक़ा दिया. आज हम सब इन्हें हार्ड कौर से जानते हैं.

    अपने कार्यक्रम के सिलसिले में जब हार्ड कौर अमरीका आईं, तब मैंने उनके जीवन के कुछ पहलुओं को जानना चाहा.

    आप संगीत को क्यों अपनाना चाहती थीं और उसमें भी आप ने रैप को ही क्यों चुना?

    मैं रैप करना चाहती थी. एक तो ये पहले कभी किसी ने किया नहीं था और दूसरे मुझे पॉप संगीत बहुत पसंद है. जब मैं भारत में थी तो मुझे अंग्रेज़ी संगीत का कुछ पता नहीं था. केवल माइकल जैक्सन का पता था.

    जब मै 1991 में इंग्लैंड आई तो मैने एमटीवी देखना शुरू किया तब पता चला की रेगे है, रॉक है, पॉप है पर मुझे हिप हॉप सबसे ज़्यादा पसंद आया क्योंकि मैं कुछ अलग करना चाहती थी.

    ये भी एक कारण था कि मैंने इसको चुना. रैप को गाने के लिए वोकल तकनीक एकदम अलग होती है और मैं महसूस करती हूँ कि ये बहुत ही कठिन है. कुछ नया और ऑरिजनल करना हमारे ख़ून में है, तो मैंने रैप को चुन लिया बस इस तरह मेरा ये संगीत का सफ़र शुरू हो गया.

    आप का नाम तरन कौर ढिल्लन है तो ये तरन कौर हार्ड कौर कैसे बन गई?

    अंदर से तो मैं पहले से ही हार्ड थी. सभी मुझ को चिढ़ाते थे कि ये तो किसी से डरती नहीं, पंजाबी है. इसका नाम तरन कौर नहीं हार्ड कौर होना चाहिए तो मैंने यही नाम रख लिया क्योंकि ये मेरे व्यक्तित्व के अनुरूप था.

    आप ने अपना पहला परफ़ॉर्मेंस कब किया?

    मैंने अपना पहला शो जो डांस था, तीन साल की उम्र में किया था. हार्ड कौर के नाम से मेरा पहला रैप परफ़ॉर्मेंस वर्ष 1995 में हुआ.

    आप रैप गाने वाली पहली भारतीय हैं तो इस नए काम में आपको लोगों का कितना सहयोग मिला?

    पहले लोगों ने मुझे ज़्यादा पसंद नहीं किया. लेकिन अब अपना सहयोग दे रहे हैं, पसंद कर रहे हैं. मैंने हार नहीं मानी. मैं कुछ ग़लत काम करके आगे नहीं बढ़ी. बहुत मेहनत की. तब सभी का प्यार मिला है.

    आपने गिलासी गाना कैसे सोचा?

    मैं उस समय मेन फ़्रेम में थी तो अंग्रेज़ों के बीच मेरा कायर्क्रम होता था. लेकिन भारतीय उतना जानते नहीं थे. तो मेरी माँ ने कहा कि यहाँ तो अपनी इज़्ज़त कमानी चाहिए लेकिन साथ में अपने भारतीयों के लिए भी कोई गाना बना.

    मैंने सोचा कि पंजाबियों के लिए कोई गाना बनाए तो वो गाना या तो खाने के बारे में होना चाहिए या पीने के बारे में तो मैने लिखा गिलासी.

    जब आपने ये गाना लिखा था तो आप को क्या लगता था कि ये गाना हिट होगा?

    जब मैंने लिखा था तो सोचा था कि या तो ये गाना हिट हो जाएगा या तो बहुत बड़ी समस्या हो जाएगी कि एक भारतीय लड़की और गाना पीने-पिलाने वाला. मैं थोडा डरी भी थी पर उल्टा हुआ. ये गाना नंबर वन हुआ और काफ़ी हिट हो गया. मुझे लगा कि उल्टे काम करो तो सब पसंद करते हैं.

    गीत-संगीत के आलावा आपके क्या-क्या शौक हैं?

    डांस का मेरा शौक बचपन से था वो आपने झलक दिखला जा में देखा ही है. मुझे खाना बनाना बहुत अच्छा लगता है लेकिन इटेलियन कुकिंग. क्योंकि पंजाबी खाना तो मम्मी बहुत अच्छा बनाती है. इसके अलावा मुझे फ़िल्में देखना बहुत अच्छा लगता है.

    आपने भारतीय फिल्में देखी हैं?

    देखी हैं, पर कम देखी हैं. रॉक ऑन, जब वी मेट, सिंग इज़ किंग, ख़ुदा के लिए, अगली या पगली.

    संगीत आपका क्षेत्र है. आप बताइए किसके गाने आपके दिल को छूते हैं?

    आशाजी. जब भी उनका गाना सुनती हूँ, झूम उठती हूँ. आरडी बर्मन जी के बनाए गानों के तो हम दीवाने हैं. सुनिधि के गाने भी मुझे बहुत अच्छे लगते हैं.

    झलक दिखला जा में आपने बहुत अच्छा नृत्य किया. लोगों की क्या प्रतिक्रिया रही?

    मैंने सोचा कि चलो ये शौक भी पूरा किया जाये और मैं सोनी टीवी की बहुत शुक्रगुजार हूँ कि उसने मुझे ये मंच दिया, जिस पर मुझे कुछ कर दिखने का मौक़ा मिला. मैंने जो भी डांस किया दिल लगा के किया. सभी का मुझे बहुत-बहुत प्यार मिला, भारत में भी और भारत से बाहर भी. सभी ने मुझे बहुत स्नेह दिया.

    आप को अपनी पहली फ़िल्म का गाना कैसे मिला?

    मेरे भारत में बहुत शो हो रहे थे उस समय मुझे शंकर, अहसान, लॉय मिले. उन्होंने कहा कि उन्हें मेरा गाना बहुत पसंद है और अगली बार जब मैं भारत आऊँ तो उनसे ज़रूर मिलूँ. फिर जब मैं भारत गई तो मैंने उन्हें फ़ोन किया.

    मै स्टूडियो में ही थी तभी जॉनी गद्दार के निर्देशक श्रीरामजी वहाँ आए और कहा कि उन्होंने टीवी पर मेरा इंटरव्यू देखा और मैं उन्हें बहुत अच्छी लगती हूँ. उन्होंने मुझसे कहा कि मैं उनके लिए एक गाना करूँ. मुझे लगा क्या बात है पहला मौक़ा मिल रहा है वो भी शंकर अहसान लॉय के साथ. मेरी तो जैसे लौटरी लग गई थी.

    हार्ड कौर को हार्ड कौर किसने बनाया?

    हम तो बहुत चुपचाप से सॉफ्ट कौर थे. मैं उत्तर प्रदेश से आई एक छोटी सी लड़की थी. मै तो कहूँगी कि मुझे ब्रिटेन ने हार्ड कौर बनाया. जो संघर्ष मैंने देखा, लड़ाइयाँ हुईं और जिस तरह लोगों ने मुझे तंग किया, वो नहीं होता तो आज मुझे इतनी अक्ल नहीं होती.

    भारत, जहाँ मेरी जड़ें हैं, मेरी संस्कृति है, उसने मुझे बड़ों की इज्जत करना, सभी को प्यार करना सिखाया और ब्रिटेन ने सिखाया कि अपनी लड़ाई किस तरह से लड़नी चाहिए. तो आप कह सकती हैं कि हार्ड कौर भारत और ब्रिटेन का मिश्रण है.

    आप अपने गाने स्वयं लिखती हैं तो क्या उनका सगीत भी आप ही देती हैं?

    हाँ. मै गाने लिखती हूँ. उसका संगीत देती हूँ और गाती भी हूँ. रैप में आप को खुद ही सब करना होता है आप किसी से उम्मीद नहीं कर सकते कि कोई आप के लिए कुछ लिखेगा.

    आप जब गाने लिखती हैं तो क्या सोचती हैं कि कैसा गाना होना चाहिए? आप के मष्तिष्क में क्या भाव होते हैं?

    विषय तो मैं अपने आसपास से ही लेती हूँ. जीवन में ही बहुत सी बातें होती हैं जिन पर लिखा जा सकता है. प्यार, रोना, खुश होना, सफल होना, इन्हीं सब पर लिखती हूँ. मेरे विचार से उनके बारे में लिखना चाहिए जिन्हें आप जानते हैं.

    आपकी सफलता को देखकर आपकी माँ क्या अनुभव करती हैं?

    मेरी माँ को मुझ पर बहुत मान होता है. ये मेरी बेटी हैं कहकर वो ख़ुशी में रो भी जाती हैं. मेरी माँ बहुत खुश हैं कि उन्होंने मुझे हर तरह की स्वतंत्रता दी और मैंने उनका उपयोग सही दिशा में किया.

    यदि आप गायिका नहीं होती तो क्या होतीं?

    मैंने रैप कलाकार बनने से पहले अपनी माँ के सैलून में काम किया है. बहुत मेकअप किया है. सुबह-सुबह उठकर लड़कियों को तैयार किया है तो निश्चित तौर पर मैं यही काम कर रही होती और अभी तक लंदन में मेरे 10-15 सैलून होते.

    आपने इतने गाने गाए हैं, उनमें से आप के दिल के करीब कौन सा है?

    ‘सिंह इस किंग’ का गाना, ‘हाले दिल…’. ये गाना ज़्यादा चला नही, पर मुझे बहुत पसंद है.

    आप अपना गला अच्छा बनाए रखने के लिए क्या करती हैं?

    मै आचार, दही और बर्फ कम खाती हूँ. मेरी आवाज थोडी भारी है, डीप है जो रैप में बहुत अच्छी चलती है. इसीलिए रियाज की आवश्यकता नहीं पड़ती. साँस की एक्सरसाइज़ करती हूँ क्योंकि रैप में स्टेमिना बहुत जरूरी होता है.

    आप भविष्य में क्या कुछ करने की सोच रही हैं?

    अभी मेरी दूसरी अल्बम आ रही है ‘देसी डांस’. मैं कोशिश कर रही हूँ कि इस साल के अंत तक ये अल्बम आ जाए. अब देखना है कि आगे क्या होता है. मैं फ़िल्म भी बना सकती हूँ, एक्टिंग भी कर सकती हूँ. क्या होगा देखते हैं.

    आपको हम आने वाली किन-किन फ़िल्मों में सुन सकेंगे?

    अजब प्रेम की गजब कहानी, जिसमें कैटरिना और रणबीर कपूर है. रानी मुखर्जी की हडिप्पा, साजिद-वाजिद और संजय दत्त की फ़िल्में हैं. इन सभी में मेरे गाने आ रहे हैं.

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