'प्यासा' ऑल टाईम 100 में शामिल

इन फिल्मों और अभिनेताओं को टाईम के फिल्मालोचक रिचर्ड कोलियार्स्ब और रिचर्ड शिकल ने चुना है। गुरुदत की ब्लैक एंड वहाइट कालजई फिल्म प्यासा 1957 में बनायीं गयी थी। और यह आज भी बॉलीवुड की सर्वश्रेष्ठ कृतियों में से एक है। भारतीय सिनेमा में 1950 का दशक स्वर्ण युग माना जाता है।
आजादी मिलने के बाद भारतीय सिनेमा भी बदलाव के दौर से गुजर रहा था। सत्यजित रे जहाँ भारत कला सिनेमा को नई पहचान दे रहे थे। वहीं राज कपूर की फिल्में आवारा, महबूब खान, और
मदर इंडिया, और निर्मल राय की दो बीघा जमीन ने भी भारतीय जनमानस को झकझोर दिया था।
ऐसे समय में गुरु दत्त की एक अनाम कवि के ऊपर फिल्म प्यासा ने भारतीय सिनेमा को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया था। उन्होंने इस फिल्म में कई ऐसे प्रयोग किये थे। जो पहले भारतीय सिनेमा में देखे नहीं गए थे। गुरुदत इस फिल्म के लेखक, निर्माता निर्देशक, अभिनेता थे। उनकी अदाकारी वहीदा रहमान की ख़ूबसूरती और एसडी बर्मन के यादगार संगीत ने इस फिल्म को हमेशा के लिए भारतीय सिनेमा में अमर कर दिया।


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