Birthday Special: खूबसूरती के सिवा मैंने कुछ लिखा नहीं- गुलजार
गुलजार साहब की गज़लें और उनके लफ्जों की खूबसूरती को भला कौन भूल सकता है। एक बार कानों में पड़ते ही महसूस हो जाता है कि ये तो गुलजार साहब की ही रचना होगी। आज गुलजार साहब का 77वां जन्मदिन है। 18 अगस्त 1936 में गुलजार साहब का जन्म हुआ था और बचपन से ही वो शेरो शायरी और कविताओं के प्रति काफी शौक रखते थे। गुलजार साहब जब पहली बार 1947 में देश के विभाजन के बाद मुंबई आए तो उन्हें शुरुआत में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा लेकिन धीरे धीरे गुलजार साहब ने अपनी काबिलियत के बल पर बॉलीवुड में अपनी एक जगह बना ली। उनके लिखे गये गीत और गजल आज भी लोगों के दिलों में बसते हैं।
गुलजार साहब ने हाल ही में भूपेंदर सिंह के साथ एक एलबम सुरमयी रात रिलीज की है। इस एलबम में गुलजार और भूपेंदर सिंह ने मिलकर कुछ गजलें और कुछ नज्में गायी हैं। इस एलबम लॉंच के दौरान गुलजार साहब से जब पूछा गया कि शायर तो सुरमयी आंखों की तारीफ करते हैं आपने सुरमयी रात पर इसपर एलबम बनाई है। इसपर गुलजार साहब ने बड़े ही शायराना अंदाज में कहा कि मैंने तो आज तक आप लोगों की खूबसूरती के सिवा और कुछ लिखा ही नहीं। मेरी सारी गजलों और सारी नज्मों में सिर्फ और सिर्फ आप लोगों की खूबसूरती का ही बखान है।
खूबसूरती के बिना हर गज़ल और हर एक नज्म अधूरी है। गुलजार साहब ने ये भी कहा कि वो आगे भी इसी तरह से खूबसूरत गज़लें लिखते रहेंगे और उनकी गजलों में खूबसूरती ही खूबसूरती नज़र आएगी। गुलजार साहब ने अपने करियर की शुरआत की थी विमल राय के सहायक के रुप में। गुलजार ने ऋषीकेश मुखर्जी और हेमंत कुमार के सहायक के रुप में काम किया था। गीतकार के रुप में गुलजार ने पहला गाना मोरा गोरा अंग लेई ले लिखा था। और उस गाने ने धू्म मचा दी थी। उसके बाद गुलजार साहब का करियर काफी ऊंचाइयों तक गया और आज गुलजार साहब की पहचान बॉलीवुड के नंबर वन गीतकार और नज्म राइटर के रुप में होती है।


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