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सौरभ गांगुली के साथ एक मुलाक़ात

Posted By: संजीव श्रीवास्तव
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सौरभ गांगुली ने टेस्ट और वनडे क्रिकेट में कई यादगार पारियां खेली हैं
बीबीसी एक मुलाक़ात में इस हफ़्ते के मेहमान हैं भारतीय क्रिकेट जगत के बेहद चर्चित नाम और 'प्रिंस ऑफ़ कोलकाता' के नाम से मशहूर सौरभ गांगुली.

भारतीय क्रिकेट में अपने यादगार क्षणों की बात करते हुए उन्होंने कहा था,"वर्ष 2004 में पाकिस्तान में 50 साल बाद टेस्ट और वनडे दोनों जीतने बहुत ख़ास था. वर्ष 2003 में ऑस्ट्रेलिया में जीत और तब ही विश्वकप का सफ़र... बहुत यादगार था. लगातार 15 मैच जीतने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम की जीत का सिलसिला तोड़ना और इंग्लैंड में नेटवेस्ट सिरीज़ जीतना मुझे जीवन भर याद रहेगा."

कोच के साथ विवाद के बाद टीम से बाहर होने और फिर टीम में वापसी करने पर उन्होंने कहा था, "मैं ख़राब क्रिकेट खेलने के कारण बाहर नहीं हुआ था इसलिए मन में कोई डर नहीं था, लेकिन दिल में ये तो आता ही था कि इस तरीके से मुझे टीम से बाहर नहीं होना चाहिए. मैं कभी हताश नहीं हुआ क्योकि घरवालों से लेकर प्रशंसकों और मीडिया ने बहुत समर्थन दिया."

सौरभ गांगुली के साथ कुछ ही महीने पहले एक मुलाक़ात के मुख्य अंश इस प्रकार हैं:

सौरभ शुरूआत करते हैं आपके बचपन से, क्या बहुत नटखट बच्चे थे आप. कितने शैतान थे?

नहीं ऐसी बात नहीं है. मैं दूसरे बच्चों की तरह ही था. लेकिन बचपन से ही खेल में बहुत मन लगता था. कोलकाता में फ़ुटबाल बहुत खेली जाती है, तो बचपन में दोस्तों के साथ खूब फ़ुटबाल खेलता था. मैं बहुत शैतान नहीं था और ज़्यादा परेशान करने वाला भी नहीं था. कह सकते हैं कि थोड़ा शैतान था और थोड़ा अच्छा.

सुना है कि आपको कुत्तों से बहुत डर लगता था?

हाँ बहुत. मेरे घर पर एक समय 16 पालतू कुत्ते थे. मेरे पिताजी को कुत्तों से बहुत प्यार था, लेकिन मुझे कुत्तों से बहुत डर लगता था.

लेकिन जिसके घर में कुत्ते होते हैं उन्हें तो कुत्तों से प्यार हो जाता है?

नहीं, मुझे डर लगता था. शुक्र है कि हमारा घर बहुत बड़ा था और हमारे घर के पिछवाड़े कुत्तों के रहने के लिए अलग जगह थी.

मैं ख़राब क्रिकेट खेलने के कारण बाहर नहीं हुआ था इसलिए मन में कोई डर नहीं था, लेकिन दिल में ये तो आता ही था कि इस तरीके से मुझे टीम से बाहर नहीं होना चाहिए. मैं कभी हताश नहीं हुआ क्योकि घरवालों से लेकर प्रशंसकों और मीडिया ने बहुत समर्थन दिया
आपको शुरू से ‘प्रिंस और ‘महाराजा कहा जाता था. तो क्या वास्तव में बचपन से ही आपका राजकुमारों वाला स्टाइल था?

नहीं, ऐसा नहीं है. बचपन में या अभी भी मेरा कोई ऐसा महाराजाओं वाला स्टाइल नहीं रहा. दरअसल, मुझे ये सभी संबोधन सर जेफ़्री बॉयकॉट की देन हैं.

एक चीज़ बताइए, आप नेचुरल राइट हैंडर हैं, लेकिन बल्लेबाज़ी बाएँ हाथ से करते हैं. तो ये सिलसिला कैसे शुरू हुआ?

हमारे परिवार में सभी नेचुरल राइट हैंडर हैं, लेकिन मेरे बड़े भाई, छोटे भाई, चचेरे भाई सभी बल्लेबाज़ी बाएँ हाथ से करते हैं. तो शायद देख-देख के ये हो गया होगा.

बाएँ हाथ के एक से एक बल्लेबाज़ हुए हैं, ख़ैर अब तो लोग आपकी मिसाल देते हैं लेकिन आपको बाएँ हाथ के बल्लेबाज़ों में कौन पसंद हैं?

गांगुली के नाम अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में 16 हज़ार से अधिक रन दर्ज हैं

मेरे ख़्याल से दुनिया के सर्वश्रेष्ठ बाएँ हाथ के बल्लेबाज़ों में सर गैरी सोबर्स एक रहे, हालाँकि उन्हें मैने बल्लेबाज़ी करते नहीं देखा. लेकिन वेस्टइंडीज़ के ब्रायन लारा बेमिसाल हैं. वो जादूगर हैं और क्रिकेट इतिहास में उनका एक नाम है. आप जब उनकी बल्लेबाज़ी देख रहे होते हैं तो लगता है कि काश मैं भी ऐसा खेल सकता.

उनकी सबसे ज़्यादा कौन सी चीज़ आपको प्रभावित करती है?

ब्रायन लारा की बल्लेबाज़ी की ख़ासियत है कि वो बहुत बड़े-बड़े स्कोर करते हैं. 300-400 का स्कोर करते हैं और सबसे अहम कि मैच जिताने वाली पारियां खेलते हैं. सबसे ख़ास बात है कि वो गेंदबाज़ को किसी भी तरीके से खेल सकते हैं.

आपने गैरी सोबर्स और विवियन रिचर्ड्स की बात की तो क्या आपको उनके अंदाज़ में एक रॉयल, मैजेस्टिक टच कह लीजिए, एक घमंड जैसा नहीं दिखता है?

दरअसल, ये घमंड नहीं है. उनकी बॉडी लैंग्वेज ही ऐसी होती है. वेस्टइंडियन लोगों की जीवनशैली ही ऐसी होती है. चाहें आप विव रिचर्डस को देखें, ब्रायन लारा, क्लाइव लॉयड या कर्टनी वॉल्स को देखें. उनकी जीवनशैली बिंदास और बेफ़िक्री वाली होती है. अभी आईपीएल में हमारे साथ क्रिस गेल खेल रहे हैं, वो भी बहुत मस्त और खुश रहते हैं. मतलब ये कि वेस्टइंडियन जीवन ही एकदम बेफ़िक्री वाला होता है. खिलाड़ियों में भी यही है जीतो या हारो, पर मस्त क्रिकेट खेलो.

वेस्टइंडियन क्रिकेटरों की बात चल रही है. तो ये बताएँ कि इतने लंबे-तगड़े गेंदबाज़ जब तूफानी गेंदबाज़ी करते हैं तो क्या डर लगता है?

देखिए इसीलिए हम लोग इतना अभ्यास करते हैं. कुछ दिन बाद इसकी आदत पड़ जाती है. शोएब अख्तर, ब्रेट ली या डेल स्टेन 90 मील प्रति घंटे की रफ़्तार से गेंदबाज़ी करते हैं. इन सभी को खेलने के लिए अभ्यास और तकनीक के साथ साहस की बहुत ज़रूरत होती है. आपको मैदान पर इस भावना के साथ जाना होता है कि किसी भी तरह की गेंद खेलनी है, भले ही उससे चोट लगने का डर हो.

ये बताइए आप फ़ुटबाल के शौकीन थे पर आपके भाई स्नेहाशीष ने आपको क्रिकेट से परिचित कराया. फिर आप उनकी जगह लेकर बंगाल क्रिकेट टीम में आ गए?

वर्ष 2004 में पाकिस्तान में 50 साल बाद टेस्ट और वनडे दोनों जीतने बहुत ख़ास था. वर्ष 2003 में ऑस्ट्रेलिया में जीत और तब ही विश्वकप का सफ़र... बहुत यादगार था. लगातार 15 मैच जीतने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम की जीत का सिलसिला तोड़ना और इंग्लैंड में नेटवेस्ट सिरीज़ जीतना मुझे जीवन भर याद रहेगा
हाँ पहले मैं फ़ुटबाल खेलता था. उनको देखकर ही मैंने क्रिकेट खेलना शुरू किया.

अभी भी आप फ़ुटबाल मुक़ाबलों की ख़बर रखते हैं?

फिलहाल क्रिकेट में बहुत व्यस्त हो गया हूँ. लेकिन पहले घरेलू फ़ुटबाल का एक-एक मैच देखता था. मैं किसी को छोटा नहीं कह रहा, पर फ़ुटबाल का स्तर अब काफ़ी नीचे आ गया है. लेकिन अब तो देखने का समय ही नहीं मिल पाता.

अभी आईपीएल मुक़ाबले शुरू हुए हैं जो काफ़ी हद तक फ़ुटबाल लीग की तरह है. लगता है कि आईपीएल ने क्रिकेट का तूफ़ान खड़ा कर दिया है?

ये तो सच है कि आईपीएल ने क्रिकेट में बड़ा बदलाव कर दिया है. सभी स्टेडियम बिल्कुल ठसाठस भरे रहते हैं. आशा करते हैं कि क्रिकेट का ये नया रूप सफल होगा.

आईपीएल का फ़ॉर्मेट कैसा लगता है?

ये इंटरटेनमेंट है और सफ़र बहुत करना पड़ता है. असली क्रिकेट तो टेस्ट क्रिकेट ही है.

और आपकी कोलकाता नाइट राइडर्स टीम के शाहरूख ख़ान के बारे में आपका क्या कहना है?

वो टीम के साथ बहुत ज़्यादा शामिल होते हैं. मैं उन्हें 2003 से ही अच्छी तरह जानता हूँ, जब उनकी पीठ का ऑपरेशन हुआ था तब से ही उनसे जुड़ा हुआ हूँ. हमारी पूरी टीम उन्हें बेहद पसंद करती है और वो हमें बहुत प्रोत्साहित करते हैं.

चीयरलीडर्स पर आपका क्या कहना है?

देखिए, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. ये तो कुछ इसी तरह है जैसे फ़िल्मों के बीच में गाने होते हैं. आईपीएल का माहौल वास्तव में काफ़ी खुशनुमा होता है.

आपने 1992 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर की शुरूआत की थी. वेस्टइंडीज़ के ख़िलाफ़ एक मैच खेले फिर लंबे समय तक टीम का हिस्सा नहीं रहे. फिर साढ़े तीन साल बाद नंबर आया, कैसा लगा था?

सौरभ ने डोना के साथ प्रेम विवाह किया है

देखिए तब 17 साल की उम्र थी. वापस बंगाल चला गया. वहीं के लिए खेलता था. सोचता ही नहीं था कि ड्रॉप हो गया हूँ. इसलिए फ़र्क नहीं पड़ा कि देश की टीम में जगह नहीं मिली. फिर जब भारतीय टीम में साढ़े तीन साल बाद वापसी की तो लार्ड्स में सीधे शतक से खाता खोला. फिर उसके बाद सफ़र अब तक चल रहा है, 12 साल हो गए.

क्रिकेट में बाद में आपको इतनी प्रसिद्धि मिली. लाखों की संख्या में आपके प्रशंसक बने. आपको प्रिंस ऑफ़ कोलकाता, महाराजा जैसी उपाधि लोगों ने दी. देश-दुनिया में इतना नाम हो गया, तो क्या कभी अंदाज़ा था कि इतना सबकुछ होगा आपके साथ?

नहीं, कभी नहीं सोचा था कि इतना सब कुछ होगा. मेरे क्रिकेट में आने से पहले कोलकाता का नाम क्रिकेट में शुमार नहीं होता था. लेकिन एक चीज़ तो तय है कि क्रिकेट के लिए कोलकाता से बेहतर माहौल कहीं नहीं है. कोलकाता का इडेन गार्डेन का मैदान सबसे बड़ा क्रिकेट ग्राउंड है.

सौरभ गांगुली को पहली बार ये ऐहसास कब हुआ कि वो बहुत बड़े स्टार बन गए हैं?

मैं वास्तव में स्टार जैसी चीज़ के बारे में नहीं सोचता हूँ. 1996 में मुझे लग गया था कि मुझमें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने की क्षमता है. अब 12-13 साल बाद 100 टेस्ट और 300 वनडे मैच खेलने के बाद भी रन बनाने के बारे में सोचता हूँ. मेरे साथ क्रिकेट कभी रोज़गार या पैसे के लिए नहीं रहा. मन में सिर्फ़ यही था कि देश के लिए खेलना है.

अच्छा आपने क्रिकेट खेलने के अलावा कई विज्ञापन भी किए हैं. कैसा लगता है?

हाँ. लगभग 30-40 विज्ञापन किए हैं. लेकिन इन्हें भी लुत्फ़ उठाने के रूप में लेता हूँ. सच्चाई तो ये है कि पहले इन्हें देखकर मेरी बीवी ही हंसती थी लेकिन अब तो बेटी भी हंसती है. कहती हैं कि कहाँ शाहरूख खान की ऐक्टिंग देखते हैं और कहाँ आपकी ऐक्टिंग है.

विज्ञापन का सबसे मज़ेदार या खराब अनुभव क्या रहा?

ऋतिक रोशन के साथ वो डांस करने वाला विज्ञापन देखकर मुझे शर्म जैसी आती है. मेरी टीम के सदस्य उसे देखकर मुझे साल भर चिढ़ाते थे, उस दौरान मैं कैप्टन था, पर मेरी बहुत खिंचाई हुई.

अच्छा वापस आपके क्रिकेट पर लौटते हैं. जब लार्ड्स में सेंचुरी मारी और टूर में आपका प्रदर्शन बेहतरीन रहा. उसी दौरान आपकी पर्सनल लाइफ़ में भी एक तूफ़ान चल रहा था. डोना से रोमांस और छुपकर शादी को लेकर काफी गहमागहमी थी?

गांगुली मैदान पर बेहद आक्रामक रहे हैं और उनकी अगुवाई में टीम ने विदेशों में अच्छा प्रदर्शन किया

सच्चाई ये है कि लोगों ने इसे इतना बढ़ा-चढ़ाकर बताया, जबकि इस बारे में सभी जानते थे. दरअसल डोना ने मुझे शादी करने का अल्टीमेटम दे दिया था, इसलिए शादी करनी ही पड़ी.

आपकी बिल्कुल रोमियो-जूलियट जैसी कहानी थी. क्या ऐसा ही है?

नहीं, कभी इतना तो नहीं लगा. दरअसल डोना बचपन से ही मेरे पड़ोस में रहती थी. हम साथ-साथ बड़े हुए. फिर 19-20 साल की उम्र में आकर कब प्यार हो गया पता ही नहीं चला. ये भी याद नहीं कि किसने पहले प्रपोज़ किया.

फिर किस तरह आपने अपने और डोना के माता-पिता को मनाया?

सच में ये हमारे या डोना के घरवालों के लिए कोई चौंकाने वाली बात नहीं थी. उन्हें पता था कि ये दोनों एक-दूसरे को अच्छी तरह जानते हैं. पर हमारा परिवार पुराने ख़्यालात वाला है. अपने घर में मैं पहला लड़का था जिसने लव मैरिज की. इसीलिए मेरे घरवाले कुछ दिन गुस्से में थे कि बिना बताए शादी कर ली लेकिन फिर कुछ दिनों बाद सब ठीक हो गया.

मैनें आपका घर देखा है, ट्रॉफ़ियों से एक कमरा भरा हुआ है, कभी लगता है कि बड़े होकर बेटी सना महसूस करेगी कि उनके पिता कितने बड़े खिलाड़ी हैं?

हाँ वो क्रिकेट थोड़ा समझती है, उम्मीद तो है कि वो अपने पिता पर गर्व कर सकेगी.

अपनी बेटी सना के बारे में कुछ बताइए?

सना छह साल की है. दिन में कम से कम छह बार अलग-अलग कपड़े बदलती है. गाने और संगीत का उसे बहुत शौक है. फ़ैशन का भी बहुत शौक है.

अच्छा आप कभी अपने जीवन के बारे में सोचते हैं. पीछे मुड़कर देखते हैं कि कितना लंबा सफर तय किया है, क्या कामयाबियां और नाकामियां रहीं?

सच बताऊँ मैं आगे देखने वाला व्यक्ति हूँ. लेकिन ये संतोष ज़रूर है कि मैंने भी देश के लिए कुछ किया है.

आप खुद को बिना ज़्यादा सोचने वाला और आराम से जीवन जीने वाला व्यक्ति कहते हैं?

देखिए ईज़ी गोइंग का मतलब ये नहीं कि तनाव नहीं होता. सच तो ये है कि इस खेल में तनाव बहुत होता है. जब कप्तान था तो छह साल तक ज़िम्मेदारी निभाई तब तनाव भी ज़्यादा होता था, अब जब खिलाड़ी के रूप में अपने खेल के बारे में ध्यान देना होता है तो भी तनाव तो होता ही है.

मैदान पर जाते समय क्या रहता है दिमाग़ में?

दिमाग़ में रहता है कि इतने साल से खेल रहा हूँ, उस साख को बरक़रार रखना है, रन बनाने हैं. ख़ासकर अपने देश के खेल प्रशंसकों के मामले में रन बनाने का दबाव रहता है.

आपको ‘कमबैक मैन के रूप में जाना जाता है. हालांकि उस दौर में लगने लगा था कि सौरभ की क्या टीम में वापसी हो पाएगी. कोच से विवाद के बाद आपका क्रिकेट करियर डांवाडोल नज़र आ रहा था. पर क्या सोचते थे अपने बारे में?

टीम से बाहर होने के बाद भी गांगुली ने हार नहीं मानी और ज़ोरदार वापसी की

उस समय तक मैंने काफ़ी कुछ हासिल कर लिया था. 100 टेस्ट मैच खेल लिए थे. ग्यारह साल का क्रिकेट करियर हो चुका था. देश के बाहर मेरी कप्तानी में हमने सिरीज़ जीती थी. लेकिन मन में कहीं विश्वास था कि अब तक सबकुछ अच्छा ही हुआ था इसलिए आगे भी ऐसा ही होगा. फिर भगवान की भी मेहरबानी रही.

आपने वापसी की और काफ़ी ज़ोरदार वापसी की. लेकिन उन दिनों कभी डर लगता था या विश्वास कमज़ोर होता था कि इस तरीके से टीम से बाहर जाना पड़ा?

मैं ख़राब क्रिकेट खेलने के कारण बाहर नहीं हुआ था इसलिए डर नहीं लगता था, लेकिन दिल में ये तो आता ही था कि इस तरीके से मुझे टीम से बाहर नहीं होना चाहिए. मैं कभी हताश नहीं हुआ क्योकि घरवालों से लेकर प्रशंसकों और मीडिया ने बहुत समर्थन दिया.

ये तो सच है कि जितना समर्थन आपको मीडिया या प्रशंसकों से मिला लगता नहीं कि उतना कभी किसी खिलाड़ी को मिला होगा?

एक और चीज़ जो महत्वपूर्ण है वो ये कि क्रिकेट खेलने से पहले, खेलने के दौरान और उससे बाहर होने के बाद मेरे जीवन में कोई बदलाव नहीं हुआ. शायद इसका कारण मेरा परिवार और पृष्ठभूमि रही. उन खिलाड़ियों के बारे में सोचता था जिनके पास नौकरी नहीं है, पैसा नहीं है या समर्थन नहीं है. इसलिए मुझे तो बस यही सोचना था कि क्रिकेट में कैसे वापसी करूँ.

काफ़ी दार्शनिक सोच है आपकी. ये बताएँ कि खेल में उत्तेजना या उत्तेजक व्यवहार के कारण खिलाड़ियों को सज़ा मिलती है, उन पर कुछ मैचों का बैन लग जाता है. आपके बारे में भी ये इमेज है कि सौरभ, देश के पहले आक्रामक कप्तान हुए, क्या कहना है इसके बारे में?

आपको बताऊँ, मैं मैदान के बाहर बहुत ही शांत क़िस्म का व्यक्ति हूँ. मेरी बीवी मुझ पर नाराज़ हो जाती है कि मैं लोगों की बातों पर प्रतिक्रिया क्यों नहीं देता. लेकिन मैदान में मेरा व्यवहार बिल्कुल बदल जाता है. मैं यही कोशिश करता हूँ कि कड़ी चुनौती पेश करें और जीतें. पहले अन्य टीमों में धारणा थी कि विदेशी दौरों पर हमारी टीम घूमने-फिरने आती है, लेकिन मैं इस धारणा को बदलना चाहता था. क्योंकि सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग, राहुल द्रविड़ और अनिल कुंबले जैसे खिलाड़ी जब हमारी टीम में हैं तो फिर भला हम क्यों नहीं जीत सकते.

फिर आप छह साल तक कप्तान रहे. और भारतीय टेस्ट कप्तान के सबसे सफल कप्तान रहे. आपकी कप्तानी में ही टीम ने सबसे ज़्यादा मैच जीते?

मेरा मानना है कि जीत में पूरी टीम की भूमिका होती है, कप्तान का योगदान तो कम ही होता है. फिर हमारी टीम में सचिन, द्रविड़, सहवाग, लक्ष्मण, ज़हीर, श्रीनाथ, हरभजन जैसे बड़े खिलाड़ी थे जिससे हमने अच्छा प्रदर्शन किया.

कभी इन बड़े स्टार खिलाड़ियों को मैनेज करने में दिक्क़त पेश आई?

हालांकि मीडिया में ये ज़्यादा हाइप होता है कि स्टार खिलाड़ियों को मैनेज करने में दिक्क़तें होती हैं, जबकि सच्चाई ये है कि आप जब ड्रेसिंग रूम में देखेंगे तो पाएँगे कि खिलाड़ी कितने अच्छे दिल के होते हैं. उनके दिल में हमेशा होता है कि टीम को जिताना है.

लेकिन टीम अगर जीतती है तो सारी कमियां छिप जाती हैं और हारती है तो कमियां निकाली जाती हैं. हमने सोचा था कि देश के बाहर जाकर हमें जीतना है और अपनी छवि जीतने वाली टीम की बनानी है. उसके बाद 2000-08 के बीच हमने ऑस्ट्रेलिया टीम के बाद देश के बाहर सबसे ज़्यादा मैच जीते हैं. आंकड़े इस बात के गवाह हैं.

आप ख़ुद बेहतरीन सलामी बल्लेबाज़ रहे हैं, लेकिन आपको किसके साथ ओपनिंग जोड़ी के रूप में खेलने में अच्छा लगता है?

सचिन तेंदुलकर के साथ मुझे सलामी बल्लेबाज़ी सबसे अच्छी लगती है. मैं उनके साथ बहुत साल खेला हूँ. सहवाग भी बेहतरीन बल्लेबाज़ हैं, लेकिन अगर आप मुझसे मेरी बेहतरीन पसंद पूछें तो वो सचिन हैं. उनमें मैच जिताने की क्षमता है.

टीम में आपका सबसे अच्छा दोस्त कौन है?

सभी. सचिन, द्रविड़, सहवाग, हरभजन, कुंबले. सभी मेरे अच्छे दोस्त हैं.

सौरभ गांगुली को सलामी जोड़ी के तौर पर सचिन का साथ पसंद है

ये बताएं कि हरभजन को क्या हो गया है, काफी विवादों में आ गए हैं वो?

हरभजन थोड़ा ग़ुस्सैल क़िस्म के व्यक्ति हैं, लेकिन दिल के बहुत अच्छे इंसान हैं. वो एक ऐसे दोस्त हैं जो ज़रूरत पड़ने पर किसी भी समय आपकी मदद को पहुँच जाएंगे.

आप सभी सीनियर खिलाड़ियों ने क्या हरभजन को समझाया है?

हाँ हम लोगों ने उनको समझाया है, और हरभजन को ये समझना भी पड़ेगा कि टीम के लिए वो कितने अहम हैं इसलिए उन्हें खुद पर नियंत्रण रखना चाहिए.

आपका आदर्श खिलाड़ी कौन है?

देखिए वो समय के साथ-साथ बदलते रहते हैं. जब करियर शुरू किया तो सुनील गावस्कर और कपिल देव को बेहद पसंद करता था. बाएँ हाथ के बल्लेबाज़ों में डेविड गावर आदर्श थे. फिर सचिन, अनिल और राहुल द्रविड़ जैसे बड़े खिलाड़ियों के साथ खेला.

आपने करियर में वैसे तो बहुत से मुक़ाम हासिल किए, लेकिन कोई ख़ास?

2004 में पाकिस्तान में जाकर 50 साल बाद टेस्ट और वनडे दोनों जीते तो वो बहुत ख़ास था. 2003 में ऑस्ट्रेलिया जाकर जीते. 2003 में विश्वकप का सफ़र. फिर जब लगातार 15 मैच जीतने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम भारत आई तो हमने उनका जीत का सिलसिला तोड़ा. इसके अलावा इंग्लैंड में हमारी नेटवेस्ट सिरीज़ की जीत जीवन भर याद रहेगी.

सवालों का रूख दूसरी ओर मोड़ते हैं. सुना है कि टूर के दौरान होटल के कमरे में जाते ही सबसे पहले आप वहां पत्नी और बेटी की फ़ोटो लगाते हैं?

हाँ ये तो सही है. पर अब सबकी तस्वीरें मोबाइल में ही होती है.

आपको सबसे ज़्यादा सुकून क्या देता है?

आराम करना, सोना.

हरभजन थोड़ा ग़ुस्सैल क़िस्म के व्यक्ति हैं, लेकिन दिल के बहुत अच्छे इंसान हैं. वो एक ऐसे दोस्त हैं जो ज़रूरत पड़ने पर किसी भी समय आपकी मदद को पहुँच जाएंगे
जीवन का ऐसा क्षण, जब आपको बहुत झिझक या असमंजस महसूस हुआ?

जब मेरे घर में पता चला कि मेरी शादी हो गई.

आप अपने बारे में क्या नापसंद करते हैं और क्या पसंद करते हैं?

मैं कभी हार नहीं मानता, ये मेरी खूबी है. और ज़्यादा सोचना मुझे नापसंद है.

फ़िल्में देखते हैं, फ़ेवरेट हीरो या हीरोइन?

मुझे शाहरूख ख़ान और अमिताभ बच्चन बहुत पसंद हैं. अभिनेत्रियों में मुझे करीना कपूर, श्रीदेवी और माधुरी दीक्षित पसंद हैं.

खाने में क्या पसंद है?

कोलकाता की बिरयानी और पानीपूरी.

आपकी ज़िंदगी में काफ़ी उतार चढ़ाव आए, लेकिन आप उनसे उबरने में क़ामयाब रहे. तो युवाओं के लिए आपका कोई संदेश और अपनी क़ामयाबी का गुरूमंत्र?

मैं इतना कहना चाहूँगा कि खुद पर यक़ीन करें. और लोग आपके बारे में क्या सोचते हैं इस पर ध्यान नहीं देना चाहिए बल्कि आप अपने बारे में क्या सोचते हैं, वो ज़्यादा अहम है.

क्या बात है, आपके दिमाग़ में सब कुछ बिल्क़ुल साफ़ है?

जी हाँ, बिल्क़ुल साफ़ है. पूरी ज़िन्दग़ी की योजना दिमाग़ में है.

आपका पसंदीदा गीत?

मुझे जब वी मेट, गुरू के गाने पसंद आए. इसके अलावा पार्श्वगायक श्रेया घोषाल की आवाज़ मुझे बेहद पसंद है.

एक आख़िरी सवाल ये कि आप देखने में इतने हैंडसम लगते हैं, तो क्या कभी किसी फ़िल्म का ऑफ़र नहीं मिला?

नहीं, क्योंकि लोगों ने मेरे विज्ञापन देखे हैं और उन्हें अंदाज़ा लग गया होगा कि मैं कितनी अच्छी एक्टिंग कर सकता हूँ.

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