मेरी नानी वेश्या नहीं थीं: भंसाली पर फूटा गंगूबाई की नातिन का गुस्सा, कोर्ट की सलाह पर बदलेगा फिल्म का नाम?
संजय लीला भंसाली की फिल्म गंगूबाई काठियावाड़ी को लेकर रोज़ नए विवाद खड़े हो रहे हैं और अब गंगूबाई की नातिन ने फिल्म की रिलीज़ पर रोक की मांग की है। उन्होंने अदालत से अपनी अपील में साफ कहा है कि उनकी नानी वेश्या नहीं थी वो बस कमाठीपुरा में रहती थीं। कमाठीपुरा मे रहने वाली हर औरत वेश्या नहीं थी।
वहीं फिल्म को लेकर बढ़ते विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने संजय लीला भंसाली को हिदायत दी है कि वो फिल्म का नाम बदल दें। भंसाली के वकील ने कोर्ट से गुज़ारिश की है कि अगली सुनवाई से पहले वो इस बारे में भंसाली के विचार जानना चाहेंगे। सुनवाई गुरूवार को भी जारी रहेगी।

इससे पहले, बॉम्बे हाईकोर्ट ऐसी तीन पिटीशन खारिज कर चुकी हैं जो फिल्म में काठियावाड़ी, कमाठीपुरा और चाईना जैसे शब्दों के उपयोग के खिलाफ थीं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक फिल्म पर कोई फैसला नहीं दिया है। वहीं गंगूबाई का परिवार चाहता है कि जब तक फिल्म से गैर ज़िम्मेदाराना तरीके से इस्तेमाल की गई जानकारी ठीक नहीं की जाती है, फिल्म को रिलीज़ ना होने दिया जाए।

भारती सोनावने का बयान
टाईम्स ऑफ इंडिया से एक खास बातचीत में गंगूबाई की नातिन भारती सोनावने का कहना है कि उनकी नानी को बदनाम किया जा रहा है। इस फिल्म को बनाने से पहले उनसे किसी भी तरह की कोई मंज़ूरी नहीं ली गई थी। भारती का कहना है कि वो 2020 से इस बात के लिए न्याय मांग रही हैं लेकिन उनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। भारती के वकील, फिल्म की रिलीज़ को रोकने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।

भंसाली से पूछे कड़े सवाल
भारती ने इस बातचीत में संजय लीला भंसाली से कड़ा सवाल पूछा है। भारती का कहना है कि मेरी नानी छोड़िए, भंसाली क्या किसी की भी मां के बारे में इस तरह की बात सोच सकते हैं? जिस तरह उन्होंने मेरी नानी को परदे पर पेश करने की कोशिश की है क्या किसी और की मां को भी इसी नज़रिए से देखकर परदे पर उतार पाएंगे? वो मेरी नानी थीं। अब ये उनकी गलती नहीं है कि वो कमाठीपुरा में रहती थीं। क्या कमाठीपुरा मे रहने वाली हर औरत वेश्या हो जाएगी? मेरे रिश्तेदार मुझसे सवाल करते हैं - क्या आपकी नानी ऐसी थीं?

बेहद मज़बूत है केस
भारती के वकील का कहना है कि उनका पक्ष बहुत मज़बूत है। लेकिन उनका केस अभी सुप्रीम कोर्ट में pending है। ये एक अलग तरीके का कानून बनाने का केस है। इस कानून में उन लोगों को न्याय दिलाने की बात की गई है जो अब अपनी सफाई देने के लिए इस दुनिया में नहीं है। ऐसे में कोई भी उनके बारे में कुछ भी लिख दे या बना दे, ये गलत है। भारती इसी के खिलाफ कोर्ट में अपनी लड़ाई लड़ रही हैं।

भंसाली का पक्ष
हालांकि, संजय लीला भंसाली की ओर से पहले ही ये साफ कर दिया गया है कि ये फिल्म हुसैन ज़ैदी की किताब पर आधारित है और जैसा कि उस किताब में लिखा गया है, वैसा ही फिल्म में दिखाया गया है। लेकिन भारती का कहना है कि अगर आप किसी किताब से किसी इंसान की कहानी उठाने की कोशिश करते हैं तो क्या उस इंसान के परिवार से मिलना और सच जानना आपकी ज़िम्मेदारी नहीं है?

रिश्तेदारों की नहीं है कोई पहचान
गौरतलब है कि हुसैन ज़ैदी पहले ही बता चुके हैं कि उन्होंने अपनी किताब उन लोगों से बातचीत पर आधारित करके लिखी जो गंगूबाई और उन लोगों के करीब थे। जहां तक रही रिश्तेदारों की बात तो गंगूबाई ने कई बच्चे गोद लिए थे। लेकिन ये घटना 1947 की है जब देश में गोद लेने को लेकर कोई मज़बूत कानून नहीं था। ऐसे में ये पुष्टि नहीं की जा सकती कि गंगूबाई को अपना रिश्तेदार बताने वाले लोग सच में उनके रिश्तेदार हैं या नहीं।

कमाठीपुरा की भी शिकायत
गौरतलब है कि कुछ समय पहले कमाठीपुरा के लोगों ने भी शिकायत दर्ज करते हुए कहा था कि उनकी जगह को भंसाली बेहद गलत तरीके से परदे पर दिखा रहे हैं जिसके कारण उनके निजी जीवन पर असर पड़ रहा है। अब देखना है कि सुप्रीम कोर्ट की सलाह पर क्या भंसाली, अपनी फिल्म का नाम बदलते हैं?

25 फरवरी को रिलीज़ होनी है फिल्म
गंगूबाई काठियावाड़ी, 25 फरवरी को रिलीज़ हो रही है। फिल्म में आलिया भट्ट, कमाठीपुरा में रहने वाली एक वेश्या गंगूबाई का किरदार निभा रही हैं जो अपने मज़बूत इरादों के चलते अपने क्षेत्र के लोगों के विकास और हक के लिए लड़ती हैं और एक लोकप्रिय नेता बन जाती हैं। फिल्म को डायरेक्ट किया है संजय लीला भंसाली ने और फिल्म में विजय राज़, अजय देवगन, सीमा पाहवा और जिम सार्भ सहयोगी भूमिकाओं में हैं।


Click it and Unblock the Notifications