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#Badhai: लाइन से दनादन बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट फिल्मों की हैट्रिक!

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अगर अनुष्का शर्मा स्टारर फिल्लौरी बॉक्स ऑफिस सुपरहिट हो गई तो ये साल भी पिछले साल की तरह फॉक्स स्टार हिंदी के लिए सुपरहिट जाएगा। वैसे भी 2017 की शुरूआत बहुत ही अच्छी हुई है, तीन महीने में चार फिल्में 100 करोड़ कमा चुकी हैं।

लेकिन फॉक्स स्टार हिंदी के लिए ये शुरूआत ज़्यादा शानदार है क्योंकि इन चार में से दो फिल्में फॉक्स स्टार हिंदी की हैं अक्षय कुमार स्टारर जॉली एलएलबी 2 और वरूण धवन - आलिया भट्ट स्टारर बदरीनाथ की दुल्हनिया।

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फॉक्स स्टार हिंदी, फिल्मों से ज़्यादा उसके स्टार पावर को देखता है। अनुष्का शर्मा की NH10 को भी फॉक्स स्टार ने ही प्रोड्यूस किया था वहीं सोनम कपूर की नीरजा के साथ तो इस स्टू़डियो ने बजट फिल्मों का इतिहास भी बनाया।

वहीं माना जा रहा है कि फॉक्स स्टार हिंदी जॉली एलएलबी के लिए अक्षय कुमार को पहले ही एक सीरिज़ करने के एग्रीमेंट के तहत साइन कर चुका है। अब इस बात में कितनी सच्चाई है, ये तो वक्त ही बताएगा।

दरअसल, पिछले साल एक के बाद कई बड़ी फिल्में फ्लॉप होने के बाद दो बड़े फिल्म स्टूडियो ने फिल्म बिज़नेस से अपना हाथ खींच लिया। वजह थी बड़े बजट की बड़ी फ्लॉप। जिसके बाद, कुछ लोग तो दिवालिया होने की कगार पर थे।

अब प्रोड्यसर परेशान हैं क्योंकि फिल्मों के बजट को लेकर बड़ी मुसीबत आ गई है। क्योंकि फिल्में तब ही बनेंगी जब उन पर पैसा लगाने वाला होगा। तो मुकेश भट्ट ने सीधा और स्पष्ट तौर पर कुछ बातें कहीं जिनमें इतनी सच्चाई थी कि हमें ये सारी बातें आप तक पहुंचाना ज़रूरी लगा -

एक नहीं एक दर्जन स्टार

एक नहीं एक दर्जन स्टार

स्टार्स के नाम पर हमारे पास तीन खान हैं, कुछ दो चार अच्छी हीरोइनें और डायरेक्टर जिनके नाम पर फिल्म चलती है। लेकिन उन्हें ये समझना होगा कि हमें एक नहीं, 12 सलमान खान चाहिए, 1 नहीं, 12 दीपिका पादुकोण चाहिए और 1 नहीं 12 राजकुमार हिरानी चाहिए। इसके बिना, बॉलीवुड हमेशा घाटे में रहेगा।

बड़े स्टार हैं तो बड़प्पन दिखाइए

बड़े स्टार हैं तो बड़प्पन दिखाइए

स्टार्स की फेस्टिवल डेट बुक करने पर मुकेश भट्ट ने साफ कहा कि जो भी बड़ा स्टार है उसे बड़प्पन तो दिखाना पड़ेगा। जब आपको पता है कि आपकी फिल्म कभी भी पैसे कमा सकती है, तो आप उस डेट को क्यों बर्बाद करेंगे जिस पर कोई और स्टार और छोटे बजट की अच्छी फिल्म कमा सकती है।

क्यों नहीं चुनते अपना फ्राइडे

क्यों नहीं चुनते अपना फ्राइडे

क्या शाहरूख - सलमान - आमिर को अपने ऊपर इतना भरोसा नहीं है कि वो अपने लिए एक नॉर्मल फ्राइडे चुन सके? उनके ऐसा करने से बॉलीवुड को भी काफी फायदा होगा पर वो ऐसा नहीं करेंगे।

 कैसे आएंगे नए स्टार

कैसे आएंगे नए स्टार

मुकेश भट्ट ने सवाल किया कि अगर ये सुपरस्टार्स ही अपना स्टारडम लेकर बैठे रहेंगे तो फिर नए टैलेंट को पनपने का मौका कैसे मिलेगा ? एक सीनियर के तौर पर हम सबकी ज़िम्मेदारी है कि नए टैलेंट को पूरा मौका दें कि वो खुद को साबित कर सके।

खान के आगे किसकी मजाल है

खान के आगे किसकी मजाल है

मुकेश भट्ट ने आगे कहा कि अगर ये खान किसी को मना कर दें कि मेरी फिल्म किसी भी त्योहार पर रिलीज़ नहीं होगी तो किस प्रोड्यूसर की मजाल है कि उनकी बात ना सुने। उनकी हालत तो इंडस्ट्री में वैसे ही है जैसा बैठ जा, बैठ गई और खड़ी हो जा तो खड़ी हो गई।

करप्ट हो गया है बॉलीवुड

करप्ट हो गया है बॉलीवुड

मुकेश भट्ट ने ये भी कहा कि स्टूडियो कल्चर आने के बाद बॉलीवुड करप्ट हो गया। एक प्रोड्यूर जिसे 10 करोड़ मिलते थे उसे तीन गुना पैसा मिलने लगा, बाकी सबका दाम भी बढ़ गया। इससे जिसकी जितनी कीमत है वो उससे ज़्यादा बड़ा बन गया और हर किसी को लगने लगा कि वो वाकई उतना बड़ा और काबिल आदमी है।

एक चार्टर्ड अकाउंटेंट से ज़्यादा कमाई

एक चार्टर्ड अकाउंटेंट से ज़्यादा कमाई

एक्टर्स की फीस पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि हीरो ने ज़्यादा पैसे लिए तो उसके स्टाफ ने भी ज़्यादा पैसे लेने शुरू कर दिए। एक मामूली सा ऑफिस बॉय भी एक सीए से ज़्यादा कमाता है और ये गलत है। एक मेकअप मैन भी एक शिफ्ट का 25 हज़ार लेता है। जबकि हीरो कोई ऐसा मेकअप भी नहीं करता है। जो कैमरामैन 15 - 20 लाख लेता था वो अब एक करोड़ लेता है।

इतना तो कर सकते हैं स्टार

इतना तो कर सकते हैं स्टार

स्टार्स को करोड़ो रूपये दिए जाते हैं मेहनताने के तौर पर। कम से कम वो इतना तो कर ही सकते हैं कि अपने स्टाफ का बिल खुद भर दें। या फिर अपने स्टाफ को खुद फीस दें। एक प्रोड्यूसर पर ज़बर्दस्ती का बोझ डालकर, फिल्म का बजट बढ़ाना कितना सही है।

कहानी नहीं स्टार चला रहे हैं फिल्में

कहानी नहीं स्टार चला रहे हैं फिल्में

मुकेश भट्ट ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि पहले कहानी दिल जीतती थी। अब कहानी से कोई मतलब नहीं है, एक स्टार ले लो और फिल्म चल जाती है। इसका कारण है कि हर स्टूडियो में एक एमबीए वाला बैठा है जिसको पैसे से मतलब है कला से नहीं। और उसके बाद वो इतनी हवा में बातें करेगा कि हम तो ताजमहल बना रहे हैं फिल्म नहीं।

बदलाव हो तो बेहतर है

बदलाव हो तो बेहतर है

मुकेश भट्ट की बातें वाकई कुछ बहुत ही अहम चीज़ों की ओर ध्यान खींचती है। उनकी मानें तो आने वाले 2 साल बॉलीवड के लिए बहुत ही अहम हैं क्योंकि चीज़ें बदल रही हैं। चीज़ें मुश्किल होंगी पर अच्छी होंगी। और भले ही इस वक्त लग रहा हो कि ये बहुत मुश्किल वक्त है, पर ये बेहतर है कि जो चीज़ें बिगड़ी हैं वो कम से कम सुधर तो सकती हैं।

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