गोरखपुर में विदेशी फ़िल्मों की धूम

By Staff
गोरखपुर में विदेशी फ़िल्मों की धूम

वर्ष 2006 से हर साल होने वाले इस महोत्सव को इस बार विश्वविद्यालय से बाहर निकालकर आम शहरी के बीच आयोजित किया गया.

पिछले हफ़्ते चार दिन तक चले इस फ़िल्म महोत्सव का आयोजन जन संस्कृति मंच और एक्सप्रेशन गोरखपुर फ़िल्म सोसाईटी ने किया जिसमें छात्रों और स्थानीय लोगों ने ख़ासी दिलचस्पी दिखाई.

कन्नड फ़िल्मकार कसरावल्ली ने अपनी पुरस्कृत फ़िल्म गुलाबी टाकीज़ के हवाले से बात की

तुर्की के जाने माने फ़िल्मकार इल्माज़ गुने की फ़िल्म ‘उमत’, ईरानी निर्देशक मख़मलबाफ़ की ‘ब्लैकबोर्ड’, चीनी फ़िल्मकार यिंग यिंग की ‘रेड रोड ऑफ़ होप’, के.पी ससी की ‘सागर तट के सौदागर’, माईकल टी क्लेयर की ‘ब्लड ऐण्ड ऑयल’, बीजू टोप्पो की ‘लोहा गर्म है’ में दर्शकों ने काफ़ी दिलचस्पी दिखाई.

गुलाबी टाकीज़, एमएसटी की धूम

कन्नड सिनेमा के जाने माने फ़िल्म निर्माता गिरीश कसरावल्ली की पुरस्कृत फ़िल्म ‘गुलाबी टाकीज़’ ने ठेठ हिंदी भाषी दर्शकों के अंतरमन को छू लिया.

कसरावल्ली ने कहा - "हमारी समस्याएं भाषा की मोहताज नहीं हैं." उनके अनुसार नारीवादी लेखिका वैदेही की कहानी पर आधारित ‘गुलाबी टाकीज़’ आम जीवन से जुड़ी समस्याओं के सामाजिक और राजनीतिक निहितार्थों को स्पर्श करती है.

कसरावल्ली ने इसकी पटकथा लिखते हुए इसके मुख्य पात्र को मुसलमान बना दिया है और फ़िल्म के ज़रिए उपभोक्तावाद और आर्थिक सुधारों में निहित ख़तरों को दिखाया.

फ़िल्म उस ऐतिहासिक मार्च के साथ हमारा सफ़र है जिसमें 12 हज़ार लोगों ने ब्राज़ील की राजधानी में प्रदर्शन करने के लिए 238 किलोमीटर का सफ़र 17 दिनों में तय किया ब्रितानी फ़िल्मकार गिब्बी ज़ोवेल

फ़िल्म उस ऐतिहासिक मार्च के साथ हमारा सफ़र है जिसमें 12 हज़ार लोगों ने ब्राज़ील की राजधानी में प्रदर्शन करने के लिए 238 किलोमीटर का सफ़र 17 दिनों में तय किया

ब्रितानी फ़िल्मकार गिब्बी ज़ोवेल की ‘एमएसटी’ नाम की फ़िल्म ब्राज़ील के भूमिहीन किसानों के संगठन ‘मूविमेंटो सेम टेरा’ के ऐतिहासिक मार्च पर आधारित है. गिब्बी ने कहा, "फ़िल्म उस ऐतिहासिक मार्च के साथ हमारा सफ़र है जिसमें 12 हज़ार लोगों ने ब्राज़ील की राजधानी में प्रदर्शन करने के लिए 238 किलोमीटर का सफ़र 17 दिनों में तय किया."

ब्रितानिया से अपने ख़र्चे पर फ़िल्म दिखाने आए गिब्बी ने कहा कि भारत समेत दुनिया भर में भूमि की समस्या है और शायद यही वजह है कि भारत में लोगों ने इसमें दिलचस्पी दिखाई.

स्लमडॉग मिलयनेयर

फ़िल्म उत्सव का उदघाटन करते हुए लेखिका अरुंधती राय ने कहा कि जिस प्रकार हाल में अमरीकी पायलट ने हडसन नदी में इमरजेंसी लैण्डिंग कराई थी उसी प्रकार राष्ट्रपति बराक ओबामा अमरीकी साम्राज्यवाद की इमरजेंसी लैण्डिंग कराने के लिए निर्वाचित हुए हैं.

स्लमडॉग मिलियनेयर पर पूछे गए प्रश्न का जवाब देते रॉय ने कहा कि फ़िल्म की पैकेजिंग अच्छी है लेकिन इसके मुख्य पात्र की बड़े होने के बाद की भूमिका निभाने वाले लड़के का आत्मविश्वास का स्तर अनिल कपूर से भी ज़्यादा दिखता है, जिसका मुख्य कारण यही है कि वह विदेश से लाया गया है.

'ग़रीबी का व्यवसायीकरण तो हो रहा है पर स्थिति सुधारने के ख़ास कदम नहीं उठाए जा रहे'

उन्होंने कहा, "हमारे यहां की ग़रीबी का व्यवसायीकरण तो हो रहा है लेकिन ग़रीबों की हालत सुधारने की ओर कोई महत्वपूर्ण क़दम नहीं उठाए जा रहे हैं."

जन संस्कृति मंच के महासचिव प्रणय कृष्ण श्रीवास्तव ने कहा कि फ़िल्म उत्सव का आयोजन सांस्कृतिक स्तर पर हिंदुत्व और सांप्रदायिक ताकतों के रास्ते में खड़े होने की पहल है.

एक्सप्रेशन फ़िल्म सोसाइटी और फ़िल्म उत्सव के संयोजक संजय जोशी का मानना था कि इसके ज़रिए एक ख़ास क़िस्म के सिनेमा देखने वाला वर्ग पैदा होगा.

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