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बोली 'रज्जो' आज का बॉलीवुड बहुत टिप-टॉप..

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बॉलीवुड में ऐसा देखने को बहुत कम मिलता है जब दो समकालीन अभिनेत्रियां एक साथ काम करें, एक-दूसरे की बातों का समर्थन करें या फिर एक-दूसरे की तारीफ करें। लेकिन ऐसा हो रहा है पूछिये कहा.. तो हम बताते हैं। ऐसा हो रहा है गुलाब गैंग के मंच पर जहां दो दिग्गज अभिनेत्रियां माधुरी दीक्षित और जूही चावला ना केवल एक साथ काम कर रहीं हैं बल्कि दोनों एक-दूसरे की बातों का समर्थन भी कर रही हैं।

जूही चावला की तरह माधुरी ने भी मान लिया है कि आज के बॉलीवुड में बहुत प्रतिस्पर्धा है। इसलिए आज कल लोगों को बहुत ज्यादा स्ट्रेस भी रहता है। माधुरी ने कहा कि फिल्मोद्योग अब ज्यादा व्यवस्थित और संगठित हो गया है, लेकिन यकीनन बहुत दबाव है और लोगों मे संयम कम हैं। नई पीढ़ी इसके लिए पूरी तरह तैयार है और वे आज ज्यादा टिप-टॉप है..पहले ऐसा नहीं था।"

'गुलाब गैंग' जूही के लिए एक चैलेंज हैं..जानिए कैसे?

इससे पहले फिल्म के प्रमोशन के दौरान जूही ने भी इस तरह की बातें कही थी। उन्होंने भी कहा था कि पहले इतना स्ट्रेस नहीं था, जितना आज है।

गौरतलब है कि सौमिक सेन निर्देशित 'गुलाब गैंग' महिलाओं के हक की बात करती है। फिल्म में जूही राजनेता के रूप में है। पर्दे पर पहली बार जूही आपको निगेटिव रोल में दिखायी पड़ेंगी। फिल्म में माधुरी दीक्षित भी अलग सा किरदार को प्ले कर रही हैं। उनके किरदार का नाम रज्जो है। फिल्म में वह एक्शन करते भी दिखायी पड़ेगी। फिल्म का प्रमोशन जोरों पर है।

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स्ट्रेस ज्यादा है

स्ट्रेस ज्यादा है

माधुरी ने कहा कि वह महसूस करती हैं कि फिल्मोद्योग में अब कलाकारों की युवा पौध बढ़ते तनाव से निपटने के लिए पहले से तैयार होती है।

आज की पीढ़ी बहुत आत्मविश्वासी है

आज की पीढ़ी बहुत आत्मविश्वासी है

माधुरी ने कहा, "हमने जैसे काम किया, वैसे-वैसे शुरुआत की और सीखा। लेकिन आज के नए अभिनेता-अभिनेत्री आत्मविश्वासी हैं। यह अच्छा है। यकीनन, अच्छा करने का बहुत दबाव है।"

यह एक रचनात्मक संसार है

यह एक रचनात्मक संसार है

माधुरी ने कहा, "यह एक रचनात्मक संसार है। हर कोई वही कर रहा है जिसमें वह सर्वश्रेष्ठ है। वे अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि कोई एक आदमी फिल्मोद्योग पर हुकूमत करने जा रहा है, क्योंकि अगर ऐसा होता तो हमारे पास मधुबाला, मीना कुमारीजी, नरगिस दत्तजी सरीखे नाम नहीं होते..और वे सभी एक ही समय में जगमगा रहे थे।"

बेमिसाल सफल अभिनेत्री

बेमिसाल सफल अभिनेत्री

माधुरी ने वर्ष 1984 में 'अबोध' फिल्म से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने 'तेजाब', 'राम लखन', 'त्रिदेव', 'परिदा', 'दिल', 'सैलाब', 'खलनायक', 'हम आपके हैं कौन' और 'दिल तो पागल है' सरीखी हिंदी फिल्मों से अपने पैर जमाए।

मैंने कभी अभिनेत्री बनने का सपना नहीं देखा

मैंने कभी अभिनेत्री बनने का सपना नहीं देखा

माधुरी ने कहा, "मैंने कभी अभिनेत्री बनने का सपना नहीं देखा, लेकिन जब बनी तो सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री बनना चाहती थी..लेकिन व्यक्तिगत मोर्चे पर अपना परिवार, बच्चे..मेरे सपना का बड़ा हिस्सा थे, क्योंकि मैं खुद एक बड़े परिवार से हूं।"

English summary
In the three decades that Madhuri Dixit has dedicated to entertaining Hindi film buffs, the hugely talented and enduringly beautiful actress saw herself evolve as a performer and as a person. She feels that the new crop of artistes in filmdom comes prepared to handle the increasing "pressures" in a more organized industry.
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