DDLJ के 25 साल पूरे होने पर डिजाइनर मनीष मल्होत्रा बोले, काजोल के लहंगे-सूट बन गए थे ट्रेंड

फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा ने आदित्य चोपड़ा के डायरेक्शन में बनी फ़िल्म, 'दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे' में अपने हुनर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। उन्होंने इस फ़िल्म में अपने कॉस्ट्यूम्स और स्टाइलिंग से भारत और भारतीयों का दिल जीत लिया, और उनकी कड़ी मेहनत ने DDLJ को अब तक की सबसे फैशनेबल फिल्मों में से एक बना दिया। कल, शाहरुख़ ख़ान और काजोल स्टारर फ़िल्म, 'दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे' (लोग प्यार से इसे DDLJ भी कहते हैं) को 25 साल पूरे हो जाएंगे। इस मौके पर, मनीष ने DDLJ के बारे में अपने दिल की बात बताई, जिसने आने वाले समय में कॉस्टयूम डिजाइन को हर फ़िल्म की क्रिएटिव रोड-मैप का हिस्सा बना दिया।

DDLJ

DDLJ में किरदारों के लुक्स को आईकॉनिक माना जाता है। वे भारत की पॉप कल्चर का हिस्सा बन चुके हैं। किस चीज ने आपको इसके लिए इंस्पायर किया?
किसी भी फ़िल्म के लिए, स्क्रिप्ट उसका सबसे अहम हिस्सा होता है। इससे डायरेक्टर के नैरेटिव और उसके विज़न का पता चलता है। यह फ़िल्म और इसके सभी किरदार बिल्कुल रिफ्रेशिंग थे, इसलिए मेरे पास कुछ नया और अनोखा करने का एक सुनहरा मौका था। फ़िल्म में काम शुरू करते समय, मैंने मन में यह ठान लिया था कि मैं कुछ ऐसा करूंगा जो दूसरों से अलग हो, और मैं कैरेक्टर्स को ऐसा लुक देना चाहता था, जिसकी छवि लोगों के दिलों में हमेशा बरक़रार रहे। जब आदि ने मुझे DDLJ स्क्रिप्ट सुनाया, तब हम खुशी से झूम उठे। यशराज और यश चोपड़ा जी का फैन होने के नाते, मेरे लिए तो यह सपने के सच होने जैसा ही था। आदि की सोच पूरी तरह स्पष्ट थी कि वह काजोल को बिल्कुल रियल और थोड़ा क्लेवर लुक देना चाहते थे, और मेरे ख्याल से DDLJ के कॉस्ट्यूम में यह तालमेल बड़ी अच्छी तरह दिखाई देता है, जो पूरी तरह रिलेटेबल होने के बावजूद बिल्कुल नए और खास थे। यही वजह है कि आज भी भारतीय सिनेमा में इस फ़िल्म के कैरेक्टर्स की छाप बरक़रार है। फ़िल्म के कॉस्ट्यूम रियल होने के बावजूद किसी सुंदर सपने की तरह और काफी एस्पिरेशनल थे, जिसमें स्टाइल की झलक दिखाई देती थी और हमारी यह कोशिश रंग लाई!

एक डायरेक्टर के तौर पर DDLJ आदित्य चोपड़ा की पहली फ़िल्म थी, इसलिए हमें आदित्य चोपड़ा के साथ अपने क्रिएटिव कोलैबोरेशन के बारे में बताइए?

हमने DDLJ से लेकर मोहब्बतें, दिल तो पागल है, वीर-ज़ारा, जब तक है जान जैसी कई फ़िल्मों में एक साथ काम किया है। आदित्य चोपड़ा एक बेहतरीन और सही मायने में विज़नरी डायरेक्टर हैं। उनकी सोच पूरी तरह स्पष्ट है और उन्हें भारतीय सिनेमा की गहरी समझ है, साथ ही वह अच्छी तरह जानते हैं कि पर्दे पर वह क्या प्रस्तुत करने वाले हैं। वह मेरे सबसे पसंदीदा डायरेक्टर्स में से एक हैं। आदि का कनविक्शन और उनकी कन्विंसिंग पावर बेजोड़ है, और यही उनकी सबसे बड़ी ख़ासियत है। मैं मानता हूं कि फ़िल्म के जॉनर, अलग-अलग तरह के किरदार, उनके लुक्स, एक्टिंग, हर कैरेक्टर के अपने स्वभाव, वे क्या बोल रहे हैं, किस तरह बोल रहे हैं, वे ज़िंदगी को किस तरह देखते हैं, उनका नजरिया क्या है, और इसी तरह की बहुत सी बातों के बारे में स्पष्ट सोच रखना बेहद

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