जनता का जवाब - बॉलीवुड का B बोले तो बॉम्बे, मुंबई की धड़कन है 'Bombay'
[तृषा गौड़] ऐ दिल है मुश्किल जीना यहां, ज़रा हटके, ज़रा बचके ये बॉम्बे मेरी जान....इस गाने से कितने ही लोगों को अपने वो पल याद आ जाते हैं जो उन्होंने बम्बई में गुज़ारे हैं। भारत के सपनों की राजधानी है बंबई। वो सपने जो चमकीले हैं, जो रात होते ही आंखों में टिमटिमाते हैं और आपको जगाते हैं।
वक्त बदला और बॉम्बे मेरी जान हो गया आमची मुंबई। लेकिन आज भी बंबई और बॉम्बे हर मुंबईया के दिल में धड़कता है। मुंबई अगर दिल है तो बॉम्बे उस दिल की धड़कन है। मुंबई अगर एक सपना है तो बॉम्बे सपने देखती वो आंखे। ऐसे में आंखों के बिना सपनों का कैसा वजूद।
सेंसर बोर्ड की बॉम्बे शब्द पर आपत्ति करना थोड़ा बचकाना लगता है। वो भी तब जब सेंसर के पास इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में बहुत कुछ है रिव्यू करने को। ऐसे में किसी गाने में बॉम्बे शब्द के आने पर इतना विवाद करना निश्चित रूप से समय की बर्बादी है।
बॉम्बे का नाम बदलकर मुंबई रख दिया गया लेकिन क्या नाम बदल देने से बॉम्बे का या बंबई का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। सेंसर बोर्ड अगर ऐसा सोचता है तो उसे अपनी नीतियों पर ज़रा फिर से गौर करना चाहिए। मायानगरी मुंबई की छाया है बॉम्बे। फिल्मों में, किस्सों में, गानों में, तरानों में हर जगह बॉम्बे है और रहेगा। ये कहना है बॉलीवुड और बॉम्बे फैन्स का। क्योंकि बॉलीवुड का 'ब' है बॉम्बे। देखिए फैन्स ने कैसे दिया बॉम्बे का साथ -


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