आज को सिनमा का बेहतरीन वक्त मानते हैं फारुख शेख

फारुक ने आईएएनएस से कहा, "यह भारतीय सिनेमा के लिए अद्भुत समय है और मल्टीप्लेक्स के चलते आज स्वतंत्र फिल्मों के प्रदर्शन के अवसर बढ़े हैं। इन दिनों जिस तरह की फिल्में बन रही हैं, उन्हें लेकर मैं बहुत खुश व संतुष्ट हूं।" फारुक की 1981 में आई सफल फिल्म 'चश्मे बद्दूर' नए संस्करण में शुक्रवार को दोबारा प्रदर्शित होने जा रही है। इसी दिन इसकी रीमेक भी प्रदर्शित हो रही है। 'चश्मे बद्दूर' के डिजिटल संस्करण और रीमेक के बीच फारुक रीमेक पहले देखने के इच्छुक हैं। फारुक के शब्दों में, "मैं वास्तव में देखना चाहता हूं कि डेविड ने इस फिल्म को किस तरह का बनाया है। मैं अपने परिवार के साथ डेविड की फिल्म देखने जाऊंगा, फिर 'चश्मे बद्दूर' के डिजिटल संस्करण को देखूंगा।" फारुक के अभिनय वाली 'चश्मे बद्दूर' में दीप्ति नवल, राकेश बेदी और रवि बासवानी ने काम किया है।
पैंसठ वर्षीय फारुक ने 'साथ साथ', 'उमराव जान' व 'नूरी' जैसी फिल्मों में अभिनय किया है। वह छोटे पर्दे पर भी सक्रिय रहे हैं। वह 'जी मंत्रिजी' हास्य-व्यंग्य शो में नजर आए तो उन्होंने 'जीना इसी का नाम है' टॉक शो की मेजबानी भी की। फारुक दोबारा इस शो का प्रस्तुतिकरण करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, "यह मेरे ऊपर नहीं है। यह चैनल को तय करना है कि क्या वह शो का मुझसे दोबारा प्रस्तुतिकरण कराना चाहता है। मैं दोबारा इसकी मेजबानी करना चाहूंगा लेकिन अभी इस पर टिप्पणी करना काल्पनिक होगा।"


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