फ़ेसबुक ने मिलाया बिछड़े माँ-बेटे को

ये कहानी है कि इंग्लैंड के डोरसेट काउंटी में रहने वाली एवरिल ग्रुबे की. 62 वर्षीय ग्रुबे की शादी हंगरी के एक व्यक्ति से हुई थी लेकिन 1982 में दोनों में तलाक हो गया.
अदालत ने ग्रुबे को अपने बेटे गेविन पैरोस को साथ रखने का अधिकार दिया.
पैरोस के पिता को ब्रिटेन आने-आने का वीज़ा मिला हुआ था और एक दिन वो पैरोस को अपने साथ लेकर हंगरी चले गए.
ग्रुबे की लाख कोशिशों के बावजूद उन्हें अपने बेटे का कोई सुराग नहीं मिला.
उन्होंने अपनी बहन बेरिल विल्सन के साथ बिछड़े बेटे को ढूँढने के लिए हंगरी दूतावास से संपर्क किया और तत्कालीन प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर तक अपनी पीड़ा पहुँचाई.
चिड़ियाघर के बहाने..
विल्सन कहती हैं, "पैरोस के पिता एक दिन आए और चिड़ियाघर या कहीं और घुमाने के नाम पर उसे ले गए लेकिन वापस कभी नहीं लौटे. बाद में हमें पता चला कि वो पैरोस को लेकर हंगरी चले गए."
वो बताती हैं, "मेरी बहन टूट गई. उसका स्वास्थ्य ख़राब हो गया. मैंने हर संभव कोशिश की लेकिन कुछ नहीं हुआ."
मार्च में विल्सन ने अपने पैरोस का नाम इंटरनेट सर्च इंजन में डाला और सामने आया मिलता जुलता फ़ेसबुक प्रोफ़ाइल.
वो ये देख कर दंग रह गईं कि पैरोस ने अपनी माँ का नाम सही लिखा औत जन्म स्थान भी लीवरपुल बताया था.
फिर ई-मेल से संपर्क करने पर उसका जवाब आया और वो तुरंत अपनी माँ से मिलने आ पहुँचा.
अब वह 29 साल का हो गया है. ग्रुबे कहती हैं, "मुझे बहुत अच्छा लगेगा अगर वो ब्रिटेन में ही मेरे साथ रहे."


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