Exclusive:"बॉलीवुड भ्रष्ट इंडस्ट्री है और मुझे इससे परेशानी है"- बोले द वैक्सीन वॉर निर्देशक विवेक अग्निहोत्री

Vivek Agnihotri On Bollywood: 'द कश्मीर फाइल्स' की बेमिसाल कामयाबी के बाद, विवेक अग्निहोत्री अपनी अगली फिल्म, 'द वैक्सीन वॉर' के साथ पूरी तरह तैयार हैं। हाल ही में फिल्म का ट्रेलर रिलीज किया गया है, जबकि फिल्म 28 सितंबर को रिलीज हो रही है। फिल्म अपनी घोषणा के साथ ही काफी सुर्खियां बटोर रही है।
द वैक्सीन वॉर की रिलीज से पहले फिल्मीबीट ने निर्देशक विवेक अग्निहोत्री से खास बातचीत की है, जहां उन्होंने बॉलीवुड इंडस्ट्री को लेकर अपने विचार सामने रखे हैं और बताया कि फिल्मों से प्यार होने के बावजूद, उन्हें इंडस्ट्री की किन बातों से परेशानी है।
विवेक अग्निहोत्री को कई बार हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को लेकर खुलासे करते देखा गया है। उन्होंने कई बार अपनी नाराजगी जताई है। ऐसे में जब हमने निर्देशक से इसके पीछे की वजह पूछी, तो उन्होंने कहा, "मुझे इस पूरी बॉलीवुड मानसिकता से दिक्कत है। सबसे पहले, मैंने यहां काफी समय बिताया है इसीलिए मैं समझता हूं वे कैसा महसूस करते हैं और क्या सोचते हैं।"
बॉलीवुड मेकर्स दर्शकों को बेवकूफ समझते हैं
उन्होंने कहा, "जब भी आप कोई फिल्म बनाते हैं, तो वे आपको इसे औसत करने के लिए मजबूर करते हैं क्योंकि उनका मानना है कि दर्शक बेवकूफ हैं। उन्हें लगता है कि यह सिंगल स्क्रीन, यह मध्यवर्गीय भारतीय दर्शक बेवकूफ हैं, उन्हें कुछ भी समझ नहीं आता है, वे किसी भी बुद्धिमान चीज़ को समझने के लायक नहीं हैं और इसलिए आपको यथासंभव मूर्खतापूर्ण फिल्म बनानी चाहिए। यही मेरी एक बड़ी समस्या है।"
निर्देशकों और लेखकों को सम्मान नहीं मिलता
निर्देशक ने आगे कहा, "मेरी दूसरी बड़ी समस्या यह है कि इस इंडस्ट्री में लेखकों और निर्देशकों का कोई सम्मान नहीं है, जो असली रचनाकार हैं। अगर आप इंडस्ट्री की पिछली 3- 4 सुपर डुपर हिट फिल्में उठा लें तो कोई नहीं बता पाएगा कि उस फिल्म का लेखक और निर्देशक कौन है। क्या आपने कभी देखा है कि कोई लेखक बीच में खड़ा हो और मीडिया उनकी तस्वीरें कवर कर ले। और ऐसा नहीं है कि मीडिया हमेशा से ऐसा करता था। नहीं.. लेकिन ये स्टार्स हैं, जिन्होंने इस सिस्टम को बढ़ाने के लिए मजबूर किया। उन्होंने हमेशा खुद को केंद्र में रखना शुरू कर दिया है।"
बॉलीवुड एक भ्रष्ट इंडस्ट्री है
आखिर में विवेक अग्निहोत्री ने कहा, "और मेरी तीसरी सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह एक बहुत ही दमनकारी और भ्रष्ट उद्योग है। इसलिए, जो कोई भी कहता है कि हमें सिस्टम के खिलाफ नहीं बोलना चाहिए और इसे बदलना चाहिए, मेरा सवाल यह है कि यह वह इंडस्ट्री है जो मुझे सीधे प्रभावित करती है क्योंकि मेरी रोटी यहीं से आती है.. तो मुझे इस इंडस्ट्री पर सवाल क्यों नहीं उठाना चाहिए? मैं जाकर CAA के लिए एक्टिविज्म करूं और शाहीन बाग या जेएनयू में जाकर धरना हूं, लेकिन अपने ही उद्योग के उत्पीड़कों को स्वीकार करके, उनके सामने घुटने टेक दूं, तो इसका कोई मतलब नहीं है। इसलिए, मैं सबसे पहले उस व्यवस्था को चुनौती देता हूं। और मैं ऐसा इसलिए नहीं कर रहा हूं क्योंकि मेरे मन में बॉलीवुड के खिलाफ कुछ है या मैं इससे नफरत करता हूं। मैं गंभीरता से अपने दिल की गहराई से कहता हूं कि जो कोई भी मुझे जानता है, वह समझता है कि मैं कितनी शिद्दत से महसूस करता हूं कि भारतीय सिनेमा का पूरी दुनिया में सम्मान किया जाना चाहिए। और यही कारण है कि मैं इतनी मेहनत कर रहा हूं, दुनिया भर में अपनी फिल्में ले जा रहा हूं ताकि उन्हें दिखा सकूं कि भारत क्या है।"


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