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एक मुलाक़ात अर्जुन रामपाल के साथ

By संजीव श्रीवास्तव
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अर्जुन रामपाल ने फ़िल्म मोक्ष से बॉलीवुड में अपने करियर की शुरुआत की
बीबीसी एक मुलाक़ात में अभिनेता अर्जुन रामपाल ने कहा कि मॉडलिंग से अभिनय का अब तक उनका सफ़र संतोषजनक रहा है. वो बताते हैं कि उनकी कई फ़िल्में आने वाली हैं जिनसे उन्हें काफी उम्मीदे हैं.

बीबीसी एक मुलाक़ात में इस बार के मेहमान हैं मॉडल से अभिनेता बने अर्जुन रामपाल.

जाने-माने मॉडल से फ़िल्म स्टार, पहले फ्लॉप फिर हिट और अब स्थापित कलाकार. कैसा रहा ये सफर?

सफर बहुत अच्छा रहा. मैं यहाँ शायद मनोरंजन के लिए ही आया हूँ. फिर आप अनुभव से सीखते हैं और आगे बढ़ते हैं. तो कुल मिलाकर अभी तक का सफर अच्छा रहा है. तमन्ना है कि आगे चलकर अच्छी-अच्छी फ़िल्में करूँ और लोगों का और मनोरंजन कर सकूँ.

आपकी इतनी अच्छी आवाज़ है. अमिताभ बच्चन, अमरीश पुरी जैसी. क्या लोगों ने आपसे ऐसा कहा है?

देखिए मेरी आवाज़ ईश्वर की देन है. अगर वो लोगों को अच्छी लगती है तो मैं उनका शुक्रगुजार हूँ. मेरे डायरेक्टर कहते हैं कि मैं अपनी आवाज़ का बेस कम कर दूँ.

अच्छा चलिए आपके बचपन पर लौटते हैं. कैसे थे आप बचपन में?

मैं जबलपुर में पैदा हुआ. उसके बाद मेरे माता-पिता नासिक के पास देवलाली चले आए. वहाँ मेरे पिता का बिज़नेस था. मेरा बचपन वहीं बीता. मेरी माँ टीचर थी.

फिर मैं कोडाईकनाल इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ा. फिर दिल्ली के हिंदू कॉलेज से इको ऑनर्स किया. उसी दौरान मुझे मॉडलिंग का मौका मिला. लेकिन ज़ल्द ही मैं इससे ऊब गया. मैं चाहता था कि कैमरे के पीछे जाऊँ और फ़िल्म मेकिंग में ध्यान दूँ. मैं चाहता था कि न्यूयॉर्क फ़िल्म स्कूल में पढूँ.

तो आपका पढ़ाई के प्रति काफ़ी लगाव था?

देखिए, दसवीं तक मेरा ध्यान पढ़ाई पर ज़्यादा नहीं था. उस वक़्त टेनिस, एथलेटिक्स पर मेरा ज़्यादा ध्यान था. या कह सकते हैं कि पढ़ाई से बचने के लिए खेल एक बहाना बन गया था. इस बात का अहसास मुझे मेरे दोस्त ने दिलाया. ऐसा नहीं कि मैं और मेरे दोस्त बोरिंग थे, हम लोग खूब शरारत भी करते थे. तो मेरा कहना है कि एक चीज़ मैं आप महारत हासिल करें, लेकिन ऐसा नहीं कि दूसरे क्षेत्रों में आप अच्छा नहीं कर सकते.

ये सही है कि मॉडलिंग के लिए रोहित बल ने आपको ढूँढा था?

कोडाईकनाल से स्कूल पास कर जब हम मुंबई आए तो मैं पहली बार एक डिस्कोथेक में गया था. तब शायद मैं 16 साल का था. तब रोहित बल मेरे पास आए और उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या मैं मॉडलिंग करता हूँ.

मेरा मानना था कि मॉडलिंग लड़कियों के लिए ࢠीक है. मैं जब हिंदू कॉलेज में था तो डिस्कोथेक में मेरी मुलाक़ात रोहित बल से हुई और बात चल निकली
मैंने कहा नहीं. फिर उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या मैं मॉडलिंग करना चाहूँगा तो मैने इनकार कर दिया और बात वहीं खत्म हो गई.

और आपने मना क्यों किया?

मेरा मानना था कि मॉडलिंग लड़कियों के लिए ठीक है. मैं जब हिंदू कॉलेज में था तो एक बार फिर डिस्कोथेक में मेरी मुलाक़ात रोहित बल से हुई. ख़ास बात ये है कि उन्होंने नाम से मुझे पहचाना और उन्होंने कहा कि हम कल ही शूटिंग कर रहे हैं.

हमें एक पुरुष मॉडल की ज़रूरत है. मैंने उनसे पूछा कि मैं वहाँ आऊँगा तो मुझे क्या मिलेगा, उन्होंने हंसकर कहा कि तुम्हें कुछ अच्छे कपड़ों की ज़रूरत है, मैं तुम्हें कपड़े दिला दूँगा.

तो इस तरह हमारी दोस्ती हुई. बाद में हमें पता चला कि मेरी माँ और उनकी भाभी एक ही स्कूल में पढ़े थे. इस तरह ये दोस्ती और पक्की हो गई. जो हमने शूट किया था वो मैग़जीन के कवर पर छपा था. जब मैं वो मैगजीन लेकर कॉलेज गया तो हरेक हैरान था.

मॉडलिंग में पैसे कमाए?

हाँ, बिल्कुल 17 साल की उम्र के लिहाज से तो अच्छे पैसे कमाए. तब मुझे टैक्स नहीं देना पड़ता था. मैंने मॉडलिंग में मिला पहला चेक अपनी मां को दिया. लेकिन मॉडलिंग से मेरे घरवालों में घबराहट सी थी. उनका मानना था कि मैं क्या कर रहा हूँ. मेरी माँ ने मुझसे कहा कि जो चाहो वो करो, लेकिन अपने काम से धोखा मत करो और अपने परिवार की इज्ज़त रखना.

आपने इतने साल में बहुत सम्मान हासिल किया है?

ये बहुत ज़रूरी है. आपको लोगों से सम्मान मिलता है तो हमारी भी कुछ ज़िम्मेदारी बनती है. दूसरी बात आप परिवार के इतने क़रीब होते हैं तो अगर मेरी वजह से मेरे परिवार का नाम ख़राब होता है तो मुझे ख़राब लगेगा.

मॉडल से फ़िल्मों में कैसे आए?

दरअसल, मैं शेखर कपूर के साथ एक विज्ञापन शूट कर रहा था. हम ऊटी में 10 दिनों के लिए शूटिंग कर रहे थे. तब कैमरामैन अशोक मेहता और शेखरजी ने मुझसे कहा कि मुझे फ़िल्मों में आना चाहिए. लेकिन उसी दौरान मुझे लंदन, न्यूयॉर्क में एड का कॉन्ट्रेक्ट मिला था. अशोक ने मुझसे कहा कि मैं फ़िल्म मोक्ष बना रहा हूँ. मुझे इस प्रस्ताव पर सोचते-सोचते एक साल लग गया.

अर्जुन रामपाल की फ़िल्मी पारी बहुत लंबी नहीं है, लेकिन उनकी कुछ भूमिकाओं की सराहना हुई है

फिर मैंने मोक्ष का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया. मैंने सोचा कि क्यों न एक्टिंग के ज़रिए ही फ़िल्मों के बारे में सीखा जाए. अशोक मेहता ने मुझे प्रोत्साहित किया और फिर मैंने मॉडलिंग पूरी तरह से रोक दी.

मोक्ष चली नहीं तो कैसा लगा?

कोई फ़िल्म ये सोचकर तो नहीं बनाता कि ये फ़िल्म नहीं चलेगी. मेरे ख़्याल से हर फ़िल्म की किस्मत होती है. मेरी नज़र में मोक्ष ने मुझे काफ़ी इज्ज़त और पहचान दी. बेशक, फ़िल्म नहीं चलने का अफ़सोस तो बहुत हुआ था.

सफल मॉडल से फ्लॉप फ़िल्में. असफलता का पहला स्वाद, कैसा रहा अनुभव?

जब आप असफल होते हैं तो दुख तो होता ही है. आप इतनी मेहनत करते हैं और सब बेकार. तो समय अच्छा नहीं था. बहुत सारी उम्मीदें भी थी. उस वक्त मेरी शादी भी हो गई थी, बच्चे भी थे. ज़िम्मेदारी भी बढ़ गई थी. लेकिन मेरी पत्नी, माँ और दोस्तों का मुझे बहुत सहयोग मिला.

कभी आपको खुद लगा कि आपने ग़लत पेशा चुन लिया है?

नहीं, जब फ़िल्म पिटती है तो उसकी ज़िम्मेदारी अभिनेता के ऊपर आ जाती है. लेकिन जो इंडस्ट्री से जुड़े हैं वो जानते हैं कि ये टीमवर्क है और फ़िल्म पिटने के लिए खुद को ज़िम्मेदार मानना ज़्यादती होता. लेकिन फ़िल्म फ्लॉप होने के बाद काफ़ी ताने सुनने को मिले.

सबसे ख़राब क्या लगता था?

ख़राब तो नहीं लगता था. मैं सोचता था कि ये लोग कितने बेवकूफ हैं. इनकी सोच कितनी छोटी है. ज़िदगी में कामयाब हो या न हो, मेहनत तो करती रहनी चाहिए. मेरी प्राथमिकता पहले इंडस्ट्री और इस माध्यम को समझना था. मैंने इन चीजों के बारे में सोचना छोड़ दिया.

फिर कौन सी फ़िल्म आई, जिसके बाद लगा कि चलो ये अनलकी का धब्बा हटा?

वैसे तो जितनी भी फ़िल्में भी मैंने की थी वो चाहे चली हो या न हों, लेकिन मेरी भूमिका को लोगों ने सराहा था. टर्निंग प्वाइंट डॉन रही. फ़रहान जैसे डायरेक्टर और शाहरुख़ जैसे कलाकार के साथ काम किया.

जितनी भी फ़िल्में भी मैंने की थी वो चाहे चली हो या न हों, लेकिन मेरी भूमिका को लोगों ने सराहा था. टर्निंग प्वाइंट डॉन रही
हमारी दोस्ती बढ़ती गई. मैंने शाहरुख़ के साथ वर्ल्ड टूर किया. फिर ओम शांति ओम की निगेटिव भूमिका. इस किरदार के लिए मैंने कड़ी मेहनत की. मैं सुबह 3 बजे घर से निकलता था. चार बजे सेट पर पहुंचता था. मुझे बूढ़े व्यक्ति के किरदार के मेकअप के लिए चार घंटे लगते थे.

फ़िल्म में ही सही, लेकिन दीपिका पादुकोण के साथ इतना बुरा व्यवहार. हमें तो देखकर ही बुरा लगता था?

मुझे भी बहुत बुरा लगता था कि मैं इतनी खूबसूरत लड़की के साथ इतना बुरा व्यवहार कर रहा हूँ. मैंने शाहरुख़ से कहा कि मैं ये फ़िल्म अपने बच्चों को नहीं दिखा पाऊँगा, तब शाहरुख़ ने मुझे समझाया कि ये एक फ़िल्म अपने लिए कर लो, इसके बाद तुम बहुत सारी फ़िल्में अपने बच्चों के लिए कर पाओगे.

आपने बच्चों की बात की, जिस तरह आप ओम शांति ओम में अपने बेटे एंड्र्यू को प्यार करते थे. आप बच्चों से बहुत प्यार करते हैं?

मेरा मानना है कि बच्चे जीवन का आनंद हैं. मुझे उन लोगों के लिए बहुत अहसास होता है जिनके बच्चे नहीं होते. हम लोग तो जीवन में काफ़ी कुछ देख चुके होते हैं, लेकिन जब बच्चे आते हैं तो आप उनकी आँखों से नया जीवन देखने लगते हैं.

आपके कितने बच्चे हैं?

मेरी दो बेटियां हैं. महिका छह साल की, महिरा तीन साल की है.

बुरे समय के बाद अच्छा समय. कैसा लगता है?

मेरा मानना है कि कोई भी समय बुरा नहीं होता. हर वक्त आपको कुछ न कुछ सिखाता है. अगर मेरी पहली ही फ़िल्म हिट हो जाती तो शायद मैं उसके लिए तैयार नहीं था. मेरी नज़र में सफलता और असफलता एक सिक्के के दो पहलू हैं.

अर्जुन रामपाल हिंदी फ़िल्मों में अलग-अलग तरह की भूमिकाएं करने का इरादा रखते हैं

फिर आप जितने सफल होते हैं, आप पर ज़िम्मेदारी भी उतनी ही बढ़ जाती है. अब शाहरुख़ को ही लें तो उन पर उतनी ही बड़ी ज़िम्मेदारी है.

शाहरुख़ की बात चली है तो जानना चाहेंगे कि आप उनके बारे में क्या सोचते हैं?

मैं जितने भी लोगों को जानता हूँ, उनमें वो बेहतरीन हैं. फिर चाहे फ़िल्म इंडस्ट्री की बात हो, लोगों की बात हो या बतौर पिता. वो बहुत पढ़ते हैं. सबसे अच्छी बात है कि उनके हर तरफ़ अच्छी और सकारात्मक चीज़ें होती हैं. मैं तो ये चाहता हूँ कि कामयाबी के लिहाज से नहीं, बल्कि व्यक्ति के लिहाज से वो शानदार हैं.

बतौर स्टार आप शाहरुख़ से क्या सीखते हैं?

शाहरुख़ जानते हैं कि वो क्यों पैदा हुए हैं. वो जानते हैं कि उनका जीवन लोगों का मनोरंजन के लिए है. अपने पेशे और अपने प्रशंसकों के लिए उन्होंने बहुत कुछ कुर्बान किया है. बतौर सुपर स्टार मैं उन्हें किंग की तरह देखता हूँ.

और रॉक-ऑन कैसे हुए आप. क्या आप गिटार बजाते थे?

मैं पहले गिटार नहीं बजाता था. जब मैंने रॉक-ऑन की स्क्रिप्ट पढ़ी तो मुझे लग गया था कि इस फ़िल्म के लिए गिटार तो ज़रूर सीखना पड़ेगा. फ़रहान अख़्तर इस फ़िल्म को प्रोड्यूस कर रहे थे तो जानता था कि इस फ़िल्म में किरदारों को वास्तविकता के बहुत नजदीक दिखना होगा.

बतौर अभिनेता क्या ये आपके करियर की सबसे अच्छी भूमिका रही है?

फ़िल्म चले न चले ये अलग बात है. जहाँ तक संतोष की बात है तो डॉन, द लास्ट लीयर ने मुझे बहुत संतोष दिया
मेरा मानना है कि इस सवाल का जवाब बहुत मुश्किल है. किसी माँ-बाप के लिए ये बताना मुश्किल है कि उनका पसंदीदा बच्चा कौन सा है. फ़िल्म चले न चले ये अलग बात है.

जहाँ तक संतोष की बात है कि कई फ़िल्मों के क़िरदारों ने मुझे बतौर अभिनेता संतुष्ट किया है. डॉन, द लास्ट लीयर ने मुझे बहुत संतोष दिया.

बहुत लोगों का मानना है कि अर्जुन रामपाल बहुत हैंडसम हैं. आप पर इतनी लड़कियाँ मरती होंगी. इन सबसे कैसे निपटते हैं?

मेरे घर पर तीन खूबसूरत लड़कियाँ हैं. मेरी बीवी और दो बेटियाँ. बतौर अभिनेता हम चाहते हैं कि हमें लोगों का प्यार मिले और मैं लोगों का शुक्रगुजार हूँ कि मुझे उनका प्यार मिला. लेकिन हो सकता है कि वो जिस अर्जुन को प्यार करते हैं, वो उनके दिमाग़ में कोई और होगा. मेरा मानना है कि वास्तविकता की सीमा से आगे बढ़ना ग़लत है.

लेकिन इतना लंबा कौन सोचता है?

जीवन में संतुलन कायम रखना बहुत ज़रूरी है. बहक तो कोई भी सकता है. जैसे कोई कहता है कि आप अपने दोस्तों को उंगलियों पर गिन सकते हैं. लेकिन मुझे ईश्वर का आशीर्वाद है कि मेरे बहुत सारे दोस्त हैं.जब आप लोगों के बीच जाते हैं तो आपको महसूस होता है कि आप कलाकार हैं और आपको इसी छवि में रहना होता है. फिर आप घर जाते हैं तो आपकी भूमिका बदल जाती है. तब आप आम इंसान होते हैं.

और आपकी पत्नी के साथ क्या प्यार पहली नज़र का था?

हाँ, बिल्कुल.

आपकी पत्नी सुपर मॉडल थी. कभी ईर्ष्या होती है?

देखिए, मेरा मानना है कि अगर आप जलन के बारे में सोचते हैं तो आप दूसरों की ज़िदगी जीना चाहते हैं. क्योंकि मैं खुद की ज़िंदगी जीता हूँ, इसलिए ईर्ष्या का सवाल ही पैदा नहीं होता.

द लास्ट लीयर में अर्जुन रामपाल ने अमिताभ बच्चन के साथ काम किया

आपने प्रीति ज़िंटा, दीपिका, रानी मुखर्जी, प्रियंका के साथ काम किया है. आपकी पसंदीदा अभिनेत्री?

मुझे ऐश्वर्या, प्रियंका, प्रीति के साथ काम करने में बहुत मजा आया. लेकिन अगर मुझसे पूछा जाए कि आपकी पसंदीदा अभिनेत्री कौन सी है तो मेरे पास कोई जवाब नहीं होगा. वैसे ही अगर कोई मुझसे पूछे कि मेरी पसंदीदा फ़िल्म कौन सी है तो भी मेरे पास जवाब नहीं होगा.

और सबसे खूबसूरत अभिनेत्री?

ऐश्वर्या राय, दीपिका पादुकोण, कैटरीना कैफ़ बहुत खूबसूरत हैं. सबसे खूबसूरत कौन है ये बताना बहुत मुश्किल है.

अगर अर्जुन रामपाल मॉडल एक्टर नहीं बनते तो क्या होते?

मैं ज़िदगी से बहुत नाखुश होता.

आपकी कोई हॉबीज़ हैं?

मेरी बहुत सारी हॉबीज़ हैं. क्योंकि ये आपको और आपके दिमाग को तरोताज़ा बनाए रखती हैं. मुझे टेनिस खेलना, घुड़सवारी करना, किताबें पढ़ना, अपनी बेटियों के साथ पतंग उड़ाना बहुत पसंद है. मुझे नई-नई टेक्नोलॉजी बहुत पसंद है. मुझे म्यूजियम जाना पसंद है.

सलमान ख़ान, अक्षय कुमार और शाहरुख़ के सिक्स पैक एब्स के बारे में इतनी बातें होती हैं. जब आप फ़िल्मों में आए तो कहा गया कि अच्छी फिजीक वाला एक्टर है. इसके लिए क्या करते हैं?

इसका रहस्य ये है कि मैं फिटनेस के लिए व्यायाम या कसरत को जीवन का हिस्सा मानता हूँ. मैं इसका आनंद उठाता हूँ. मैं घर से बाहर रहता हूँ, इसलिए मेरा फिट रहना ज़रूरी है. जैसा कि मैंने आपको बताया भी कि मुझे खेल बहुत पसंद है.

आप इतने खूबसूरत हैंडसम हैं. ईमानदारी से बताएँ कि क्या अच्छा दिखने का आपको कुछ घमंड है?

मैं समझता हूँ कि आलोचकों ने ये कहकर कि मैं बहुत अच्छा दिखता हूँ, मेरी ऐसी-तैसी कर दी है. मैं खुद को शीशे में नहीं देखता हूँ. या मेकअप कर घर से बाहर नहीं निकलता. तो सच कहूँ तो न तो मैं और न मेरी बीवी को ही शीशा देखने की बहुत आदत है. हमारे घर में भी शायद एक ही बड़ा शीशा है. मैं खूबसूरत और अच्छे दिखने वाले लोगों की खूब कद्र और प्रशंसा करता हूँ. लेकिन अपनी खूबसूरती पर आत्ममुग्ध होना मुझे पसंद नहीं है.

आप खुद को दो वाक्यों में कैसे बताएँगे?

मैं बहुत साधारण, सरल व्यक्ति हूँ, लेकिन मुझे ज़िंदगी की अच्छी चीज़ें बहुत पसंद हैं और इनके लिए मैं बहुत काम करता हूँ.

और आपको लोगों से क्या उम्मीदें करनी चाहिए?

मैं अपना सर्वश्रेष्ठ करने की कोशिश करता हूँ और आगे भी करता रहूँगा.

आपकी पसंद के कुछ गाने?

रॉक ऑन का टाइटल सॉन्ग मुझे बहुत पसंद है. इसके अलावा मेरा लिखा गाना ‘तुम हो तो भी अच्छा लगता है. ‘ओम शांति ओम, ‘कभी-कभी भी पसंद है.

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