लघु फिल्म 'एहसास' कान महोत्सव में

लघु फिल्म 'एहसास' कान महोत्सव में

भारतीय फ़िल्ममेकर सुप्रीति मल्होत्रा की शॉर्ट फ़िल्म 'एहसास' इस साल कान फ़िल्म महोत्सव में दिखाई जा रही है.

सुप्रीति टेलीविज़न की जानी मानी हस्ती स्मृति मल्होत्रा ईरानी यानी 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' की तुलसी की छोटी बहन हैं.

'एहसास' का कान फिल्म महोत्सव के लघु फि़ल्म सेगमेंट में प्रदर्शन किया जा रहा है. खास बात ये है कि ये एक मूक यानि साइलेंट फ़िल्म है और इसकी अवधि केवल छह मिनट है.

सुप्रीति ने बीबीसी को बताया कि इस मूक लघु फ़िल्म का निर्माण करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण तो रहा लेकिन उन्हें इसके निर्माण के दौरान सीखने को भी काफ़ी कुछ मिला.

'एहसास' के कान महोत्सव में प्रदर्शन को लेकर वो काफ़ी उत्साहित हैं. वो कहती हैं, "इस फ़िल्म का निर्माण एक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के तहत किया गया था जो कि दुनिया भर के 75 शहरों में आयोजित की जाती है. इसमें 48 घंटे के अंदर एक लघु फ़िल्म का निर्माण करना था. इसमें हिस्सा लेने वाले लोगों को अलग अलग श्रेणियों में फ़िल्मों का निर्माण करना था और बाद में उन सभी में से सर्वश्रेष्ठ फिल्म को चुना जाना था. मुझे इस प्रतियोगिता में मूक फिल्म की श्रेणी में फ़िल्म बनानी थी तो इस तरह से हमने इतने कम समय में छह मिनट की ये फिल्म बनाई है. बाद में इसे सर्वश्रेष्ठ फिल्म चुना गया था."

वो कहती हैं, "शुरुआत में मुझे ये पता नहीं था कि ये एक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता है. लगा कि ये प्रतियोगिता केवल मुंबई तक ही सीमित है. लेकिन बाद में पता चला कि इस प्रतियोगिता में चुनी गई दस बेहतरीन फ़िल्मों का प्रदर्शन कान फिल्म महोत्सव में भी होना है. इस ख़बर के बाद तो मुझे बेहद खुशी मिली है क्योंकि ये मेरी पहली फ़िल्म है."

फिल्म की कहानी के बारे में सुप्रीति कहती हैं, "एहसास मूलरुप से दो लड़कियों की कहानी है, कैसे वो मिलती हैं और उनके संबंधों के बारे में फ़िल्म में ख़ासकर ये दिखाने की कोशिश की गई है कि आमतौर पर लोग जो बोलते हैं या उनके चेहरे के हाव भाव से प्यार का इज़हार होता है लेकिन ज्यादातर ये भी होता है कि हाथों से या बॉडी लैंग्वेज से भी इन बातों को प्रकट किया जाता है. ये कल्पना पर आधारित एक लघु फ़िल्म है."

सुप्रीति की बहन स्मृति मल्होत्रा इरानी एक जानी मानी कलाकार हैं. तो क्या सुप्रीति इसी वजह से डाइरेक्शन में आईं हैं. वो कहती हैं, "मैंने अलग अलग क्षेत्रों में काफ़ी काम किया है. जब मैं छोटी थी तो मुझे पत्रकारिता की पढ़ाई का शौक था और मैं चाहती थी कि मैं जामिया मिल्लिया से कोर्स करुँ लेकिन ये हो न सका. बाद में मैने सेंट ज़ेवियर्स से जर्नलिज़्म की पढ़ाई की. पढाई के दौरान ही मुझे पता चला कि मैं अच्छा लिख लेती हूं और मैने एक कहानी भी लिखी और ऐसा करते करते मेरा रुझान डाइरेक्शन की तरफ़ भी हो गया."

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