एक साल बाद फिल्में शुरू करेंगे दिवाकर

वह कहते हैं, "मैं ऐसा नहीं करूंगा तो वह मुझे अपनी जिंदगी में एक बेगाने व्यक्ति के अलावा और किसी रूप में स्वीकार नहीं करेगी। इस समय वह सात महीने की है। मैं उसके साथ कुछ महीने गुजारना चाहता हूं और उसकी जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बनना चाहता हूं।"
दिबाकर कहते हैं कि फिल्में इंतजार कर सकती हैं। उन्होंने कहा, "मैं अगले वर्ष तक अपनी नई फिल्म शुरू नहीं करूंगा। मैं घर पर रहना चाहता हूं ताकि मेरी बेटी घर में मेरी उपस्थिति की आदी हो जाए।"
दिबाकर की फिल्म 'लव सेक्स और धोखा" का पहला हिस्सा अभय कुमार की लघु फिल्म 'उड़ान" से मिलता-जुलता है। इस पर दिबाकर कहते हैं, "यकीनन, दोनों फिल्मों में समानता है। मेरी फिल्म और उनकी फिल्म सदियों पुरानी 'लैला-मजनू" की पारंपरिक कहानी पर आधारित है, जहां लड़के और लड़कियां मिलते हैं, उन्हें प्यार हो जाता है, वे भाग जाते हैं और उनके नाराज माता-पिता उन्हें मार डालते हैं। यदि मुझसे किसी को खफा होना हो तो 'लैला-मजनू" का लेखक ही ऐसा कर सकता है।"
वह कहते हैं कि कई हिंदी फिल्मों की कहानियों में भी यही समरूपता है। उन्होंने कहा कि राजकपूर की 'बॉबी", मंसूर खान की 'कयामत से कयामत तक" और यहां तक कि फारुक शेख, दीप्ति नवल अभिनीत 'एक बार चले आओ" भी इसी तरह की फिल्में हैं। दिबाकर ने कहा कि उन्होंने अभय की फिल्म देखी है और वह जानते हैं कि दोनों फिल्मों में कुछ समानता है।


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