बॉलीवुड के ही-मैन को सलाम! धर्मेंद्र के फैंस के लिए गर्व का पल, मरणोपरांत मिलेगा पद्म विभूषण
Dharmendra Padma Vibhushan: बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर धर्मेंद्र के फैंस के लिए रिपब्लिक डे पर एक इमोशनल कर देने वाली खबर सामने आई है। देश की सरकार ने उन्हें मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया है। यह भारत के सबसे बड़े नागरिक सम्मानों में से एक है। धर्मेंद्र भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका योगदान और उनकी यादें आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं।

धर्मेंद्र का पूरा नाम धर्मेंद्र केवल कृष्ण देओल था। उन्होंने साल 1960 में फिल्म 'दिल भी तेरा हम भी तेरे' से अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की थी। उस वक्त उनकी उम्र सिर्फ 24 साल थी। शुरुआत में उन्होंने कुछ फिल्मों में छोटे और सहायक किरदार निभाए, जिनमें 'बंदिनी', 'आई मिलन की बेला' और 'काजल' शामिल हैं।
'हकीकत' से मिली पहचान
साल 1965 में आई देशभक्ति फिल्म 'हकीकत' ने धर्मेंद्र को बड़ी पहचान दिलाई। इस फिल्म के बाद वह हर घर में पहचाने जाने लगे और बॉलीवुड के बड़े सितारों में उनकी गिनती होने लगी। इसके बाद धर्मेंद्र ने कई यादगार और सुपरहिट फिल्में दीं। 'मेरा गांव मेरा देश', 'सीता और गीता', 'शोले', 'यादों की बारात', 'धरम वीर', 'लोफर' और 'आदमी और इंसान' जैसी फिल्मों ने उन्हें दर्शकों का चहेता बना दिया। 1960 से लेकर 1980 के दशक तक धर्मेंद्र ने बॉक्स ऑफिस पर लगातार सफलता हासिल की। 'आंखें', 'शिकार', 'आया सावन झूम के', 'जीवन मृत्यु' और 'राजा जानी' जैसी फिल्में उस दौर की बड़ी हिट रहीं।
आखिरी वक्त तक फिल्मों से जुड़ाव
धर्मेंद्र का फिल्मों के लिए प्यार आखिरी समय तक बना रहा। उनकी आखिरी फिल्म 'इक्कीस' थी, जो हाल ही में रिलीज हुई। इससे साफ है कि वह आखिरी सांस तक सिनेमा से जुड़े रहे। पद्म विभूषण से सम्मानित होकर धर्मेंद्र ने यह साबित कर दिया कि वह सिर्फ एक एक्टर नहीं थे, बल्कि भारतीय सिनेमा की एक अमूल्य धरोहर थे।


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