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पहले इस अभिनेत्री के दोस्त और फिर आशिक़ बन बैठे थे देवानंद

By रेहान फ़ज़ल - बीबीसी संवाददाता
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देवानंद की ज़िंदगी में एक महिला ऐसी भी आई थी, जिससे वो मोहब्बत करते थे. उनका नाम था- सुरैया.

देवानंद की सुरैया से पहली मुलाकात फ़िल्म 'विद्या' के सेट पर हुई थी.

देवानंद ने अपना परिचय देते हुए कहा था, ''सब लोग मुझे देव कहते हैं. आप मुझे किस नाम से पुकारना पसंद करेंगी?''

सुरैया ने हँसते हुए जवाब दिया था - ''देव.''

इसके बाद उन्होंने सुरैया की आँखों में देखते हुए अपनी चार्मिंग मुस्कान बिखेरी थी.

सुरैया ने सवाल किया था, ''आप देख क्या रहे हैं?''

''आप के अंदर कुछ'', देव ने जवाब दिया था.

सुरैया की जिज्ञासा बढ़ निकली थी, ''मेरे अंदर क्या?''

देवानंद का जवाब था, ''यह मैं आपको बाद में बताउँगा.''

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इस बीच, निर्देशक ने कहा था,''सुरैया जी शॉट रेडी है. आपको गाते हुए देवानंद की कमर में अपनी बाहें डालनी हैं और उनके बालों में उँगलियाँ फेरनी हैं.''

देव ने सुरैया से कहा था, ''उँगलियाँ फेरते हुए मेरे बाल मत बिगाड़िएगा.''

''हाँ मुझे पता है. मैं आपकी ज़ुल्फ़ों को बिल्कुल नहीं छेड़ूँगी'', सुरैया ने कहा.

देवानंद अपनी आत्मकथा रोमांसिंग विद लाइफ़ में लिखते हैं, ''गाना चला, कैमरा रोल हुआ. सुरैया ने मुझको पीछे से आलिंगन में लिया. मैंने उनकी साँसों की गर्माहट महसूस की. मैंने उनके हाथों का चुंबन लेकर छोड़ दिया और फिर उनकी तरफ़ एक फ़्लाइंग किस उछाला.''

सुरैया ने उनके हाथ के पीछे का हिस्सा चूम कर उसका जवाब दिया. निर्देशक ने चिल्ला कर कहा, ''ग्रेट शॉट''.

वहाँ पर मौजूद फ़ोटोग्राफ़र चिल्लाए, ''एक बार फिर उन्हें चूमिए.''

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देवानंद ने सुरैया से पूछा. उन्होंने मुँह हिलाया. इस बार देवानंद ने उन्हें गालों पर चूमा. फ़ोटोग्राफ़र पागल हो गए. जब सुरैया को एकांत मिला जो उन्होंने कहा, ''तो आप कुछ कह रहे थे.... मेरे बारे में!''

देवानंद ने फ़्लर्ट किया, ''मैं आपके भाव नहीं बढ़ाना चाहता.''

''लेकिन मैं अपने भाव बढ़ाना चाह रही हूँ'', सुरैया को इस छेड़छाड़ में मज़ा आने लगा था.

''अगर मैं आपको बताऊँ कि मैं आपके बारे में क्या सोच रहा था तो क्या आप उस पर यकीन करेंगी ?''

सुरैया ने कहा, ''बिल्कुल.''

''आपकी आँखें एक रानी के चेहरे पर चमकते हुए हीरे की तरह हैं. लेकिन....'

''लेकिन क्या ?'', सुरैया ने ज़ोर दिया.

देवानंद ने कहा, ''आपकी नाक सुंदर तो है लेकिन थोड़ी लंबी है.''

सुरैया ने अपनी नाक छुई और कहा, ''आप सही कहते हैं.''

देवानंद ने बात आगे बढ़ाई, ''लेकिन यह आपके चेहरे पर सुंदर लगती है.''

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जैसे ही कैमरा घूमा, देवानंद ने एक फूल को तोड़ा और हवा मे उछाल दिया. जब वह नीचे गिरने लगा तो उन्होंने उसे अपने होठों से कैच कर लिया.

सुरैया ने उस फूल को देवानंद के होठों से निकाला और चूम लिया. कैमरे ने इस दृश्य को कैद किया और सेट पर मौजूद लोगों ने तालियाँ बजाईं. "

''मेरा जी चाह रहा है कि मैं आपका कोई नाम रखूँ'', देवानंद बोले.

''क्या ?'', सुरैया ने पूछा.

देवानंद ने कहा, ''मैं अपने साथ काम करने वाली हर लड़की का नाम रखता हूँ.''

''तुमने बहुत सी लड़कियों के साथ काम किया है ?'', सुरैया ने सवाल किया.

देवानंद ने कहा बहुत तो नहीं.... हाँ थोड़ी बहुत ज़रूर... लेकिन चुनिंदा.

सुरैया की ख़ूबसूरत आँखें मुस्कराईं, ''तो आप मेरा क्या नाम रखना चाह रहे थे?''

देवानंद ने शब्द को लंबा करते हुए जवाब दिया, ''नोओओ...ज़ीssss.'' सुरैया ने देवानंद की आँखों में देखते हुए उन्हीं के अंदाज़ में शब्द को लंबा करते हुए कहा, ''स्वीईई.....ट.''

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अगले दिन, एक आउटडोर शूटिंग के दौरान उन्होंने देवानंद से पूछा, ''आपको पता है आपकी शक्ल किससे मिलती है ?''

''किससे?''

सुरैया ने शरारत भरी मुस्कान के साथ कहा, ''किसी ने आपको बताया नहीं ?''

''मुझे पता नहीं.''

''ग्रेगरी पेक से'', सुरैया ने कहा और देवानंद के चेहरे पर आने वाले भावों को पढ़ने लगीं.

देवानंद ने कहा मुझे यह तुलना पसंद नहीं. बहुत दिनों से लोग ऐसा कह रहे हैं.

''लेकिन क्यों नहीं? देखने में वह इतना अच्छा लगता है'', सुरैया ने देवानंद की तारीफ़ की.

देवानंद ने मज़ाक किया, ''मैं उससे ज़्यादा देखने में अच्छा हूँ.'' सुरैया ने कहा मैं तुम्हारे आत्मविश्वास की दाद देती हूँ.

देवानंद को यह अहसास हो गया कि सुरैया उन्हें पसंद करने लगी है. उन्होंने बात आगे बढ़ाई, ''क्यों नहीं तुम मुझे ग्रेगरी पेक से बेहतर नाम देतीं?'' सुरैया सोचने लगीं.

तभी शॉट लेने का बुलावा आ गया. जैसे ही कैमरा घूमा, देवानंद ने एक फूल को तोड़ा और हवा में उछाल दिया.

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Hulton Archive/Getty Images
ग्रेगरी पेक

जब वह नीचे गिरने लगा तो उन्होंने उसे अपने होठों से कैच कर लिया. सुरैया ने उस फूल को देवानंद के होठों से निकाला और चूम लिया.

कैमरे ने इस दृश्य को कैद किया और सेट पर मौजूद लोगों ने तालियाँ बजाईं. सुरैया ने देवानंद को अपने पीछे आने का इशारा किया.

जब देवानंद उनके पास पहुँचे तो वह पलटीं और उनसे कहा, ''मैं तुम्हें स्टीव कह कर बुलाऊंगी.''

''स्टीव क्यों?''

''बस यूँ ही. क्योंकि मुझे यह नाम पसंद है.''

देवानंद ने कहा अगर तुम्हें पसंद है तो मुझे भी पसंद है. दोनों ने हाथ मिलाए... कुछ ज़्यादा ही देर तक... देवानंद ने उनके हाथ को दबाया.

सुरैया ने उनका हाथ दबा कर उसका जवाब दिया. अच्छे दोस्त से नज़दीकी दोस्त और फिर आशिक बनने की यह शुरुआत थी.

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English summary
Dev Anand birthday special Know interesting facts about superstar.

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