कभी दिन-रात काम करते थे ये सितारे, फेम मिलते ही बदले तेवर, लेकिन सेट के लोगों का आज भी है बुरा हाल

Deepika Padukone 8 Hour Shift Controversy: बॉलीवुड में इस वक्त आठ घंटे की शिफ्ट को लेकर बहस छिड़ी हुई है। एक्टर्स से सवाल पूछे जा रहे हैं कि क्या नई माओं का आठ घंटे की शिफ्ट की डिमांड करना गलत है? जिसके बाद कई एक्टर्स ने इस पर अपने-अपने रिएक्शन दिए हैं।
क्या है मामला
आपको बता दें, दीपिका को प्रभास के अपोजिट 'Spirit' में काम करना था। लेकिन बाद में उन्हें अचानक फिल्म से बाहर कर दिया गया। दावा किया गया कि एक्ट्रेस ने शूटिंग के लिए 8 घंटे की शिफ्ट, हाई फीस और 10% प्रॉफिट शेयर की मांग की थी। इन डिमांड्स को लेकर डायरेक्टर संदीप रेड्डी वांगा बिफर गए और उन्होंने दीपिका को फिल्म से निकालकर तृप्ति डिमरी को लीड एक्ट्रेस बना लिया।
अजय, काजोल और मणिरत्नम ने किया सपोर्ट
काजोल की फिल्म 'मां' के प्रमोशन के दौरान जब उनसे बॉलीवुड में आठ घंटे की शिफ्ट के बारे में पूछा गया तो काजोल और उनके पति अजय देवगन ने दीपिका पादुकोण के फैसले को सपोर्ट किया। यही नहीं, दिग्गज फिल्ममेकर मणिरत्नम ने भी दीपिका के इस फैसले पर अपनी हामी भरी है। उन्होंने कहा कि 'अगर वो एक नई-नई मां हैं और उन्हें अपने बच्चे की देखभाल करनी है और अगर उन्हें ऐसा कुछ चुनती हैं जिससे उन्हें उनकी रिस्पॉन्सिबिलिटीज निभाने में रुकावट ना हो, तो यह बिल्कुल ठीक फैसला किया है।' रत्नम ने दीपिका के इस पक्के फैसले की तारीफ भी की और कहा- 'मुझे लगता है कि जब महिलाएं वो मांगती हैं जो वो चाहती हैं और उसे हासिल करती हैं, तो यह एक बहुत ही पॉजिटिव साइन होता है।'
देर तक काम करने पर सैफ का दुख
यही नहीं ज्यादा देर तक काम करने के दुख को तो सैफ अली खान भी जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने अरब मीडिया समिट में अपने लेट वर्किंग ऑवर को लेकर अपना दर्द जाहिर किया था। उन्होंने कहा कि मुझे देरी से घर पहुंचना पसंद नहीं है। जब आप घर पहुंचो और आपके बच्चे सो रहे हों... तो वो कामयाबी नहीं है। कामयाबी वो है, जब आप ये कह पाओ कि नहीं, मुझे घर जाना है अपने परिवार के साथ समय बिताना है।
अक्षय के लिए पर्सनल लाइफ भी जरूरी
पर्सनल लाइफ को बैलेंस करने के लिए आठ घंटे की शिफ्ट करना कितना जरूरी है, ये बात समय-समय पर अक्षय कुमार भी बताते आए हैं। एक पुराने इंटरव्यू में Galatta Plus से बात करते हुए अक्षय ने बताया, "देखिए, मैं दिन में आठ घंटे काम करता हूं। मुझे लगता है कि जब आप कैमरे के सामने होते हैं, तो कैमरा आपकी हर एक छोटी-छोटी चीज को पकड़ता है। आठ घंटे के बाद शरीर थक जाता है। दिन में सिर्फ 24 घंटे होते हैं, आपको आठ घंटे की नींद चाहिए। मैं बहुत डिसिप्लिन्ड लाइफ जीता हूं। आपके शरीर को आठ घंटे की नींद चाहिए, दो घंटे खाने के लिए चाहिए, दो घंटे वर्कआउट के लिए चाहिए और कुछ समय अपने परिवार के साथ बिताने के लिए भी चाहिए।
यही नहीं, बड़े मियां-छोटे मियां के प्रमोशन के दौरान भी कर्ली टेल्स के संग बातचीत के दौरान उन्होंने बताया था कि वो पहले पूरा-पूरा दिन शूट करते रहते थे लेकिन पिछले 15-16 सालों से उन्होंने अपनी वर्किंग शिफ्ट को आठ घंटे तक लिमिट कर दिया है।
पंकज त्रिपाठी भी करते हैं 8 घंटे की शिफ्ट
पंकज त्रिपाठी ने भी 8 घंटे की शिफ्ट के बारे में खुलकर बात की। हाल ही में हॉलीवुड रिपोर्टर के साथ एक इंटरव्यू में दीपिका पादुकोण से जुड़ी इस कॉन्ट्रोवर्सी को लेकर उन्होंने कहा- 'पहले मुझे 'ना' कहना बहुत मुश्किल लगता था, लेकिन अब मैं इस कला को सीख रहा हूं।'
उन्होंने आगे कहा, 'हर इंसान को अपनी लिमिट पता होनी चाहिए और जब वह सीमा पार हो जाए, तो उसे शांति से मना कर देना चाहिए। पहले मेरी शूटिंग के घंटे धीरे-धीरे बढ़कर 16 से 18 घंटे हो जाते थे। मैं मजाक में कहता था कि एक्टर तो चला गया, अब मजदूर ही बचा है। लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा। अब मैंने तय कर लिया है कि मैं अपनी लिमिट पार नहीं करूंगा।'
पंकज त्रिपाठी ने आगे कहा कि अब वो सीधे डायरेक्टर से कह देते हैं कि जो काम बचा है, वह अगली सुबह पूरा किया जाएगा।
लेकिन यहां सोचने वाली बात यह है कि पंकज त्रिपाठी, अक्षय कुमार जैसे एक्टर्स आज ऐसी जाना-माना चेहरा हैं। लेकिन उन्होंने भी माना कि कैसे शुरुआत में उन्हें स्ट्रगल का सामना करना पड़ा और अपने एक प्रोजेक्ट के लिए कैसे उन्हें अपने दिन-रात झोंकने पड़ते थे।
तमन्ना भाटिया की कड़ी मेहनत
लेकिन ये तो चलिए बड़े-बड़े एक्टर्स की बात हो गई आज भी कई एक्ट्रेसेस को लंबे समय तक सेट पर मौजूद रहना पड़ता है। जिसका हाल ही में एक उदाहरण तमन्ना भाटिया के रील में देखने को मिला। उन्होंने अजय देवगन की फिल्म 'रेड 2' में एक आइटम सॉन्ग 'नशा' किया था। इस गाने में तो वैसे वो बला की खूबसूरत लग रही थीं। लेकिन जब एक्ट्रेस ने दिखाया कि उन्हें इस गाने को शूट करने के लिए कितने घंटे देने पड़े तो उनके फैंस भी परेशान हो गए।
तीन मिनट के गाने के लिए 15 घंटे की मेहनत
तमन्ना ने जो BTS वीडियो शेयर किया था, उसमें उन्होंने दिखाया कि 9.30 बजे सेट पर पहुंच गई थीं और 10.30 तक तैयार होकर शूटिंग के लिए रेडी थीं और रात को 12.15 बजे जाकर उनका काम खत्म हुआ। जिसका मतलब है कि 3 मिनट के गाने के लिए उन्हें लगभग 15 घंटे की मेहनत करनी पड़ी।
सेट पर मौजूद क्रू का भी खस्ताहाल
एक्टर्स के अलावा सेट पर मौजूद क्रू को कितनी सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसे लेकर इसी साल जनवरी में प्रधानमंत्री मोदी को लेकर एक पत्र भी लिखा गया था। अखिल भारतीय सिने वर्कर्स एसोसिएशन (AICWA), जो फिल्म इंडस्ट्री के वर्कर्स की एक बड़ी यूनियन है, ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने बॉलीवुड के तकनीशियनों, जूनियर आर्टिस्ट्स और बाकी मजदूरों की परेशानियों को उठाया है और पीएम से मुलाकात की अपील की है।
AICWA के अध्यक्ष सुरेश श्यामलाल गुप्ता ने 11 जनवरी को भेजे इस पत्र में कई अहम मुद्दों को गिनाया है, जैसे- कम सैलरी, बहुत लंबे वर्किंग ऑवर्स (16 से 20 घंटे तक) और शूटिंग सेट पर सुरक्षा की भारी कमी।
यूनियन का कहना है कि ये वर्कर्स फिल्म इंडस्ट्री की रीढ़ हैं और देश की आर्थिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाने में इनका अहम योगदान है। इसके बावजूद, उन्हें बहुत खराब हालात में काम करना पड़ता है और कोई सुरक्षा भी नहीं मिलती। लेटर में बताया गया है कि कई वर्कर्स बिना छुट्टी के लगातार 16 से 20 घंटे तक काम करते हैं। इसका असर उनके शारीरिक और मानसिक सेहत पर भी पड़ता है। सेट्स पर अक्सर न तो फायर सेफ्टी होती है और ना ही दूसरी जरूरी सुरक्षा सुविधाएं। खाने की क्वालिटी भी बहुत खराब होती है।
महिला कर्मचारियों के लिए भी नहीं है ढंग की व्यवस्था
महिला वर्कर्स को प्राइवेट चेंजिंग रूम तक नहीं मिलते। उन्हें कभी-कभी अपनी वैन या खुले इलाकों में कपड़े बदलने पड़ते हैं, जिससे उनकी सुरक्षा और गरिमा दोनों खतरे में पड़ती है।
ज्यादातर वर्कर्स को बिना किसी कॉन्ट्रैक्ट के काम पर रखा जाता है। इससे उनका कानूनी अधिकार बहुत सीमित हो जाता है और उन्हें मनमानी तरीके से हटाया जा सकता है। सैलरी भी समय पर नहीं मिलती। कई बार महीनों या सालों तक पैसे अटक जाते हैं। कुछ को तो अपनी पूरी जिंदगी बीत जाने तक पेमेंट नहीं मिल पाता। पिछले 20 सालों में सेट पर काम करने वाले लोगों की सैलरी में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई और कोरोना के बाद से तो मजदूरी आधी कर दी गई है।
काम भी पर्मानेंट नहीं है, ज्यादातर मजदूरों को महीने में सिर्फ 2 से 10 दिन ही काम मिलता है। ऐसे में घर चलाना, बच्चों की पढ़ाई और मेडिकल जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो जाता है। वहीं, सेट पर किसी हादसे में जान चली जाए तो कोई मुआवजा भी नहीं मिलता।


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