तीन थे भाई में मस्त अंदाज में दिखेंगे पप्पी

इस बारे में दीपक बताते हैं कि उन्होंने यहां तक का सफर बहुत मुश्किल से तय किया है.दीपक डोबरियाल के रूप में निस्संदेह बॉलीवुड ने एक बेहतरीन अभिनेता पाया है, लेकिन पप्पी को बॉलीवुड के प्यार तक पहुंचने का लंबा सफर तय करना पड़ा है। वे इसके साथ ही यह नहीं भूलते कि उन्हें यहां तक पहुंचने में कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ा. वे उत्तराचंल के गढ़वाल के रहनेवाले हैं।
दिल्ली में पढ़ाई के दौरान ही उन्हें सुप्रसिध्द थियेटर आर्टिस्ट अरिवंद कुमार गौड़ के साथ अस्मिता में जुड़ने का मौका मिला। जहां उन्होंने कई नाटकों में अभिनय करने का मौका मिला। उन्होंने अंधा युग, फाइनल सॉल्यूशन, डिजाइयर, रक्त कल्याण, तालेंडा व कई मशहूर नाटकों में काम किया। फिर दोस्तों पे कहने पर मुंबई आ गये। सोचा, बकौल दीपक कहीं भी पहुंचते तो काम मिलना तो दूर लोग बात भी नहीं करते।
इसी दौरान विशाल भारद्वाज मकबूल बना रहे थे। फिल्म में बेहतरीन कलाकार थे। उनके दोस्त ने बताया कि फिल्म में छोटा सा रोल है। कर लो, लेकिन संवाद नहीं है। मैंने सोचा कि बैठा हूं। इससे अच्छा कुछ सीख लूं। दीपक ओम पुरी, नसीरुद्दीन शाह जैसे कलाकारों को अपनी प्रेरणा मानते हैं। फिल्म दाएं या बाएं का किरदार रमेश उनके वास्तविक जीवन से भी बेहद करीब है।


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