'धारावाहिक स्वास्थ्य मुद्दे भी उठाए'
दूरदर्शन पर 'क्योंकि.. जीना इसी का नाम है' धारावाहिक की शुरुआत कर चुकी संयुक्त राष्ट्र संस्था 'यूनिसेफ' का कहना है कि अब निर्माताओं को स्वच्छता, एड्स जागरूकता और टीकाकरण जैसे स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे भी उठाने चाहिए।
संस्था के मुताबिक यहां बन रहे धारावाहिकों में ज्यादातर घरेलू किस्म के हैं। जबकि कुछ में औरतों के मुद्दों जैसे बालविवाह को भी उठाया जा रहा है।
'यूनिसेफ इंडिया' की कार्यक्रम संचार विशेषज्ञ अलका मल्होत्रा ने कहा, "हम कल्पना नहीं कर सकते कि व्यावसायिक थीम आधारित टीवी कार्यक्रम बनाने वाले निर्माता एचआईवी एड्स और पोलियो जैसे मुद्दों पर अपना ज्यादा समय खर्च करेंगे, लेकिन मुझे भरोसा है कि समाज की मदद के लिए वह इन मुद्दों को थोड़ा-बहुत समय अवश्य देंगे।"
वह कहती हैं, "हाथों को अच्छी तरह धोने या सामान्य स्वच्छता जैसे आधारभूत मुद्दे को सूक्ष्म तरीके से उठाया जा सकता है। ज्यादा जटिल मुद्दों को पटकथा में शामिल किया जा सकता है या निर्माता अपने कार्यक्रमों में स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों के लिए अलग से खंड शुरु कर सकते हैं।"
धारावाहिक 'क्योंकि.. जीना इसी का नाम है' शिशु तथा मातृ मृत्युदर में कमी लाने के लिए समाज समर्थक नजरिए और व्यवहार को प्रोत्साहित करने का काम करता है।
'कहानी घर घर की' और 'कसौटी जिंदगी की' जैसे सफल व्यवसायिक धारावाहिकों में काम कर चुकी प्रसिद्ध टेलीविजन अभिनेत्री टीना पारेख भी 'क्योंकि.' में अभिनय कर रही हैं। टीना महसूस करती हैं कि मनोरंजन में सामाजिक संदेश देना भी आवश्यक है।


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