Critics Review: अंतरात्मा की आवाज है 'सत्याग्रह'
साल 2013 की मोस्ट अवेटड फिल्मों से एक प्रकाश झा की 'सत्याग्रह' आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गयी है। लटकों-झटकों से दूर देश की समस्याओं को सबके सामने वाली झा की 'सत्याग्रह' के पहले दिन की ओपनिंग कैसे रही है इस बारे में रिपोर्ट तो शाम तक आयेगी लेकिन फिल्म समीक्षकों की कसौटी पर खरी उतरी है।
फिल्म के बारे में कहा गया कि फिल्म 2 जी घोटाले पर है तो किसी ने कहा कि यह फिल्म समाजवादी अन्ना हजारे के आंदोलन पर आधारित है। जिसका सिरे से इंकार प्रकाश झा ने किया था लेकिन फिल्म देखने के बाद आपको देश के सबसे बड़े घोटाले 2G और अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाया आंदोलन जरूर याद आता है।
एक ईमानदार इंसान के रूप में अमिताभ बच्चन ने एक बार फिर से साबित कर दिया कि वह बेमिसाल है। अभिनय उनके खून में है जो उनकी आंखों से पर्दे पर बोलता है उन्हें देखकर लोग दिल्ली के रामलीला मैदान वाले अन्ना हजारे जरूर याद आते हैं। तो वहीं हमेशा की तरह अजय देवगन और मनोज बाजेपेई ने जता दिया कि उनके जैसा कोई नहीं है।
अजय का एंग्री लुक तो मनोज बाजपेई का कॉमेडी की चाशनी में लिपटा खलनायकी चरित्र जरूर लोगों के दिल को छू जायेगा। अर्जुन रामपाल और अमृता रॉव दोनों ने अपने रोल के साथ पूरा न्याय किया है।
अर्जुन की आग पर्दे पर असर छोड़ती है तो वहीं लंबे अरसे बाद अमृता ने अच्छा काम किया है। फिल्म में अगर किसी ने निराश किया है तो वह अभिनेत्री करीना कपूर, उनकी संवाद अदायगी और अभिनय में सजीवता कम बल्कि नाटकीपन ज्यादा दिखायी दे रहा है। संगीत ठीक-ठाक है। कुल मिलाकर प्रकाश झा के 'सत्याग्रह' ने क्रिटीक्स का दिल जीत लिया है, समीक्षकों का कहना है कि अंतरात्मा की आवाज है 'सत्याग्रह'।
आईये जानते हैं समीक्षकों ने सत्याग्रह को कितने नंबर दिये हैं...


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