'40-50 सालों से हमारा शोषण हो रहा है'

भारतीय फ़िल्म उद्योग में इस वक़्त एक लड़ाई सी चल रही है. जिसमें एक तरफ़ हैं फ़िल्म निर्माता और दूसरी तरफ़ हैं तमाम गीतकार और संगीतकार.
मुद्दा है गीत संगीत के कॉपीराइट का. लंबे समय से संगीत बिरादरी मांग करती आ रही है कि फ़िल्म के संगीत अधिकार से निर्माता को जो पैसा मिलता है उसमें उनका भी हिस्सा होना चाहिए.
गीतकार समीर के मुताबिक़ लंबे समय से गीतकारों और संगीतकारों का शोषण हो रहा है.
बीबीसी से बात करते हुए गीतकार समीर कहते हैं, "40-50 सालों से हमारा शोषण हो रहा है. पूरी दुनिया में गीत और संगीत पर गीतकारों, संगीतकारों का अधिकार होता है और यहां हमारे साथ अन्याय हो रहा है. हमें भी गानों की रॉयल्टी का हिस्सा मिलना चाहिए."
वैसे समीर ने सरकार के कॉपीराइट संशोधन बिल 2010 का स्वागत किया है, जिसमें प्रावधान है कि फ़िल्म के संगीत अधिकार के 50 फ़ीसदी हिस्से पर गीतकारों और संगीतकारों का भी हिस्सा होना चाहिए.
दूसरी तरफ़ फ़िल्म निर्माता इस बिल का विरोध कर रहे हैं. संगीत बिरादरी की तरफ़ से उनके कथित अधिकार के लिए आवाज़ उठाने वालों में जावेद अख़्तर का नाम सबसे प्रमुख है.
फ़िल्म निर्माता अशोक पंडित उनकी इस मांग का विरोध करते हुए कहते हैं, "अगर जावेद साहब में हिम्मत है तो वो हमें जो नुकसान होता है उसको भी शेयर करें. सिर्फ़ अधिकारों की मांग करना ग़लत है. उन्हें हमारे नुकसान में भी हिस्सेदार होना पड़ेगा."
कॉपीराइट संशोधन बिल 2010 के विरोध में फ़िल्म फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया ने 6 जनवरी को बंद का ऐलान किया था. हालांकि इसके प्रतिनिधियों की सरकार से मुलाक़ात के बाद इस बंद को स्थगित कर दिया गया है.
फ़िल्म फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया वो संस्था है जिसमें फ़िल्म निर्माता, वितरक और सिनेमा हॉल मालिक आते हैं. इस संस्था के वरिष्ठ सदस्य रमेश सिप्पी कहते हैं, "हमारी किसी से लड़ाई नहीं है. संगीत से जुड़े लोग भी हमारे ही लोग हैं. हम चाहते हैं कि इस समस्या का ऐसा समाधान मिकले, जो उनके लिए भी फ़ायदेमंद हो और हमारे लिए भी."
रमेश सिप्पी और मुकेश भट्ट सरीखे फ़िल्मकारों ने दावा किया कि सरकार ने उनकी बातों को गौर से सुना और उन्हें भरोसा दिलाया कि इस मुद्दे पर दोनों पक्षों का ध्यान रखा जाएगा.


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