देखिएः बॉलीवुड में होली के रंग

शोले
जिन्होंने फिल्म शोले देखी है वे शायद ही इस फिल्म के होली सीन को भूल पाएंगे... जो गब्बर सिंह के संवाद होली कब है? कब है होली? से शुरू होता है. दर्शकों को एक मस्ती भरे माहौल में ले जाता है और उसके तुरंत बाद भय भरे माहौल तब्दील हो जाता है. गब्बर होली का दिन गांव पर अपने हमले के लिए चुनता है, जब गांव वाले पूरी तरह से मस्ती में डूबे होते हैं.
डर
राहुल के किरदार में शाहरुख खान की याद है आपको? भला डर का वह होली सीन कैसे भूल सकता है... जब रंग में डूबा शाहरुख अपनी पहचान छुपाकर जुही चावला को रंग लगाने उसके घर तक पहुंच जाता है. यह फिल्म राहुल के आब्सेसिस लव पर आधारित है. यश चोपड़ा ने होली के इस दृश्य में रंगों के मनोवैज्ञानिक अर्थ पर बहुत ध्यान दिया है.
दामिनी
यहां होली का सीन फिल्म के नैरेटिव में एक अहम भूमिका निभाता है. जब सारा घर होली की मस्ती में डूबा होता है तो उस बड़े घर की बहू यानी दामिनी के किरदान में मीनाक्षी शेषाद्रि अपने यहां हुए एक बलात्कार की गवाह बन जाती है. बलात्कारी भाग खड़े होते हैं और यहीं से दामिनी की इंसाफ के लिए लड़ाई शुरू होती है. होली यहां खुशियां लेकर नहीं आती है बल्कि यह फिल्म की पटकथा में निहित ड्रामे की एक शुरुआत बन जाती है.
सिलसिला
कभी एक-दूसरे पर जान छिड़कने वाले अमित मल्होत्रा यानी अमिताभ बच्चन और चांदनी यानी रेखा एक नहीं हो पाते हैं. परिस्थितिवश अमिताभ का विवाह जया बच्चन और रेखा का संजीव कुमार से हो जाता है. इस फिल्म में होली का एक यादगार दृश्य है. होली की मस्ती में डूबे अमिताभ और रेखा के बीच अनजाने ही वह दबा हुआ प्रेम इस गीत में उभरने लगता है. इस होली गीत में चारो अभिनेताओं का अभिनय देखने लायक है.
फागुन
राजेंद्र सिंह बेदी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में होली का दृश्य एक गहरा मनोवैज्ञानिक अर्थ है. फिल्म में एक अमीर परिवार की लड़की वहीदा रहमान अपने माता-पिता क मर्जी के खिलाफ धर्मेंद्र से शादी कर लेती है. फिल्म के होली दृश्य में धर्मेंद्र अपनी पत्नी पर रंग छोड़ देते हैं जिसकी वजह से वहीदा रहमान की कीमती सिल्क की साड़ी खराब हो जाती है. वह उसी वक्त भला-बुरा कह देती है. अपमानित धर्मेंद्र वहां से निकल जाता है...
जख्मी
यह एक प्रतिशोध पर आधारित फिल्म है. सुनील दत्त का सुखी परिवार उजड़ जाता है. उसके बाद शुरू होती है सुनील दत्त के प्रतिशोध की कहानी.. इस फिल्म के होली दृश्य में प्रतिशोध के रंग छिपे हुए हैं. फिल्म के होली गीत के बोल, 'दिल में होली जल रही है..' मानो सुनील दत्त के प्रतिशोध को ही अभिव्यक्त करती है.
कुछ और रंग...
राजेश खन्ना की फिल्मों में भी होली के कई दिलचस्प रंग देखने को मिलते हैं. बाद की फिल्मों मे बाबू, आखिर क्यों जैसी फिल्मों मे भी होली के दृश्य कहानी का अहम हिस्सा बनकर आते हैं. शक्ति सामंत, यश चोपड़ा, राज खोसला और विजय आनंद जैसे निर्देशकों ने होली के दृश्यों का बहुत खूबसूरत फिल्मांकन किया है.


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