आयशा या आलिया : पब्लिसिटी के लिए पारदर्शिता!
अहमदाबाद। इन दिनों आलिया भट्ट बहुत चर्चा में हैं। उनकी पहली फिल्म स्टुडंट ऑफ द ईयर के साथ बॉलीवुड में आगमन करने वालीं आलिया भट्ट की चर्चा उनकी किसी नई फिल्म के कारण नहीं, परंतु उनकी अधिकाधिक बोल्ड होती जा रही ईमेज के कारण है। इसमें भी आलिया ने हाल ही में एक फंक्शन में ऐसी पोशाक पहन कर पदार्पण किया कि तमाम उपस्थित लोगों का ध्यान उनकी ओर खिंचे बिना नहीं रह सकता था।
अब मीडिया की भाषा में तो आलिया भट्ट की ऐसी तसवीरों के साथ हैडिंग कुछ ऐसा होगा कि आलिया भट्ट ट्रांसपरेंट यानी पारदर्शी पोशाक के साथ कैमरे में कैद। अरे भैया... वे कैद की गई हैं या स्वयं चल कर कैद हुई हैं, यह तो समझदार के लिए इशारा ही काफी है।
वास्तव में आलिया भट्ट हो या उनसे पहले इसी तरह कैमरे में कैद हुई अन्य अभिनेत्रियाँ आयेशा टाकिया, कैटरीना कैफ, करीना कपूर या विद्या बालन हों। वॉर्डरोब मालफंक्शन के मामले में जिस प्रकार अभिनेत्रियाँ शिकार नहीं होतीं, बल्कि शिकार बनने को आतुर होती हैं, यह स्पष्ट दिखता है, उसी प्रकार इस पारदर्शिता के पीछे की मंशा भी सीधे-सीधे प्रसिद्धि के लिए ही हो सकती है।
जाने-माने निर्माता-निर्देशक और अपने बेबाकीपन के लिए विख्यात महेश भट्ट की बेटी हों और आलिया भट्ट ऐसा काम न करें, तो शायद यह महेश भट्ट को भी शोभा न देता। हालाँकि आलिया ने कोई नया पराक्रम नहीं किया है। उनसे पहले भी अभिनेत्रियाँ सार्वजनिक रूप से ऐसे पारदर्शी कपड़ों के साथ लोगों के बीच आती रही हैं, जिनके लिए कैमरे में कैद हो जाने जैसे शीर्षक यूज किए जाते हैं, लेकिन वास्तव में ऐसी पारदर्शिता दिखाने के पीछे एकमात्र उद्देश्य प्रसिद्धि ही हो सकता है। फिल्मों में अभिनेत्रियाँ दृश्य की मांग कह कर
पारदर्शी कपड़ें पहनें या फिर पूरे के पूरे कपड़े उतार दें, यह देखने का विषय निर्माता-निर्देशकों और अंततः सेंसर बोर्ड का है, परंतु सार्वजनिक कार्यक्रमों को ऐसी अभिनेत्रियों को अपनी प्रसिद्धि का मंच नहीं बनाना चाहिए।


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