ड्रग्स केस में आर्यन खान को कोर्ट ने दी ज़मानत, 21 दिन बाद जेल से आएंगे बाहर
शाहरूख खान के बेटे आर्यन खान पिछले 21 दिन से जेल में एक ऐसे जुर्म की सज़ा काट रहे थे जो उन्होंने किया या नहीं किया, इसका सुबूत किसी के पास नहीं था। और आखिरकार, इसी बात को मद्देनज़र रखते हुए मुंबई हाईकोर्ट ने आर्यन खान को ड्रग्स केस में ज़मानत की मंज़ूरी दे दी है। हालांकि, NCB ने आर्यन की ज़मानत का काफी विरोध किया लेकिन कोर्ट ने इस बार NCB की दलीलों पर ध्यान नहीं दिया।
हालांकि, आर्यन को किन आधारों पर ज़मानत दी जा रही है इस पर डीटेल फैसला कोर्ट कल सुनाएगी। आर्यन खान के साथ ही उनके साथ इस केस में गिरफ्तार हुए पहले दो लोग - आर्यन के दोस्त अरबाज़ मर्चेंट और मॉडल मुनमुन धमीचा को भी कोर्ट ने ज़मानत दे दी है। आर्यन खान 21 दिन बाद जेल से बाहर आएंगे। उन्हें 7 अक्टूबर को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।

आर्यन खान की तरफ से इस केस की अगुआई कर रहे थे मुकुल रोहतगी। मुकुल रोहतगी ने अपनी दलील में कहा कि आर्यन खान को 2 अक्टूबर को पोर्ट से ही NCB के अधिकारियों ने गिरफ्तार कर लिया। आर्यन तो उस पार्टी तक पहुंचे भी नहीं थे जहां पर ड्रग्स के सेवन की बात कही जा रही है। आर्यन की तरफ से बहस करते हुए वकील ने कहा - मुझ पर किसी और के जूते में ड्रग्स मिलने की ज़िम्मेदारी कैसे हुई और केवल इस आधार पर मुझे गिरफ्तार क्यों किया गया है? दावा बस इतना है कि बाकियों के पास भी ड्रग्स था तो ये सामूहिक रूप से प्लान किया गया। मुझे केवल प्लान के संदेह के दम पर गिरफ्तार किया गया है। वो भी प्लान, मुख्य आरोपी के साथ नहीं बाकी आरोपियों के साथ मिलकर बनाया गया प्लान, जिसका कोई सुबूत नही हैं।

मुकुल रोहतगी की दलीलों के आगे सब चुप
इस बार आर्यन खान के केस को लीड किया है भारत के पूर्व अटर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने। मुकुल रोहतगी ने कोर्ट के सामने आर्यन का पक्ष रखते हुए पहला सीधा सवाल यही पूछा कि उनका क्लाईंट 20 दिन से किस जुर्म के आरोप में जेल में बंद है?मुकुल रोहतगी की सबसे पहली दलील यही थी कि जब आर्यन के पास से ना ही कोई ड्रग्स बरामद हुआ और ना ही उन्होंने ड्रग्स का सेवन किया तो उन्हें किस आधार पर 8 अक्टूबर से अब तक जेल में रखा गया है?

कौन हैं मुकुल रोहतगी
मुकुल रोहतगी का कहना है कि इस पूरे केस में आर्यन के खिलाफ कुछ नहीं मिला है। ना ड्रग्स का सेवन और ना ही ड्रग्स की खरीद तो फिर वो जेल में क्यों बंद हैं। ज़्यादा से ज़्यादा उनका कनेक्शन बस इतना है कि वो बाकी दो आरोपियों - अरबाज़ मर्चेंट और अचित कुमार को जानते हैं। मुकुल रोहतगी, भारत के पूर्व अटर्नी जनरल हैं जो गुजरात दंगों में भी सरकार का बचाव किया था। रिपोर्ट्स की मानें तो किसी भी केस की एक सुनवाई के लिए वो 10 लाख रूपये फीस लेेते हैं। हालांकि, महाराष्ट्र सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में एक केस की पैरवी के लिए उन्हें 1.28 करोड़ रूपये की फीस दी गई थी।

दोस्त अरबाज़ मर्चेंट को भी मिली ज़मानत
गौरतलब है कि इस केस में सबसे पहले गिरफ्तार होने वाले तीन लोग थे आर्यन खान, अरबाज़ मर्चेट और मॉडल मुनमुन धमीचा। आर्यन के पास से जहां कोई ड्रग्स नहीं बरामद हुई वहीं एनसीबी की मानें तो अरबाज़ मर्चेंट ने अपने जूतों में चरस छिपा रखी थी जिसक सेवन वो और आर्यन शिप पर जाकर करने वाले थे।
एनसीबी पर आरोप लगाते हुए अरबाज़ ने कहा कि अगर सीसीटीवी फुटेज देखी जाएगी तो साफ समझ आ जाएगा कि उनके पास कोई कॉन्ट्राबैंड नहीं था। अरबाज़ का कहना है कि उनके पास तो बोर्डिंग पास तक नहीं था। वो उस शिप पर चढ़े ही नहीं थे जिस पर पार्टी की बात कही जा रही थी। NCB ने उन्हें पोर्ट पर ही गिरफ्तार कर लिया था।

आर्यन को लिए बिना बाहर नहीं जाते अरबाज़
अरबाज़ ने अपने पिता असलम मर्चेंट से वादा किया था कि वो आर्यन को लिए बिना जेल से बाहर नहीं जाएंगे। मुकुल रोहतगी का दावा है कि आर्यन खान और उनके दोस्त को प्रतीक गाबा नाम के इंसान ने इस पार्टी में इन्वाईट किया। दोनों पार्टी तक पहुंचे ही नहीं थे, उन्हें टर्मिनल पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। कारण - अरबाज़ के पास से मिली 6 ग्राम चरस जिसे अरबाज़ लगातार साज़िश बता रहा है और दावा कर रहा है कि उसके पास कोई चरस नहीं थी।

सुधरने का मौका दे कोर्ट
आर्यन के वकील की दलील थी ये सब नौजवान लड़के हैं और आगे चलकर देश का भविष्य बनाने वाले हैं। सरकार लगातार नौजवानों के सुधार की बात कर रही है। तो इन लड़कों को सुधरने का मौका देने की बजाय क्यों जेल में कैद रखा जा रहा है? अगर दोस्तों का एक झुंड साथ मिलकर स्मोक करने का प्लान बनाता है तो वहां भी कई तरह की सोच मिलती हैं। लेकिन यहां तो प्लान पूरा हुआ भी नहीं था और गिरफ्तारी कर ली गई। प्लान था या नहीं था ये केवल संदेह पर टिका है।

किसी से कोई भी लेना देना नहीं है
सुनवाई के शुरू होने से पहले ही, आर्यन खान की ओर से एक एफिडेविट दाखिल किया गया है। इसके मुताबिक आर्यन खान ने साफ किया है कि हाल ही में सोशल मीडिया पर समीर वानखेड़े पर लगाए गए आरोप और इस केस के गवाह प्रभाकर सैल द्वारा की गई बातों से उनका कोई लेना देना नहीं है।आर्यन का कहना है कि ना ही वो प्रभाकर सैल को जानते हैं और ना ही उन्होंने अपनी रिहाई के लिए किसी को रिश्वत देने की कोशिश की है। आर्यन खान ने ये भी कहा है कि उनका किसी भी तरह के इंटरनेशनल ड्रग सिंडिकेट से भी कोई लेना देना नहीं है।

समीर वानखेड़े पर लग चुके हैं गंभीर आरोप
आर्यन की ओर से इस केस में ये भी कहा गया कि उनकी ज़मानत याचिका पर फैसला, समीर वानखेड़े पर लगे आरोपों से हटकर किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि इस केस के गवाह प्रभाकर सैल ने आरोप लगाया था कि उन्होंने इस केस में 26 करोड़ की डील होने की बात सुनी थी। ये डील 18 करोड़ पर तय हुई थी और इसमें से 8 करोड़, इस केस के ऑफिसर समीर वानखेड़े को दिए जाने थे।


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