बॉलीवुड एक्टर ने 300 फिल्मों में किया काम, आखिरी दिनों में हाल पूछने वाला कोई नहीं, कई दिनों तक सड़ती रही लाश
Mahesh Anand tragic life story: बॉलीवुड की दुनिया बाहर से जितनी चमकदार दिखती है, अंदर से उतने ही खोट नजर आते हैं। यहां कुछ कलाकार दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज करते हैं, तो कई सितारे वक्त के साथ भुला दिए जाते हैं। आज हम ऐसे ही एक एक्टर की कहानी बताने जा रहे हैं।

हम जिस एक्टर के बारे में बताने जा रहे हैं, उसने 10-12 नहीं बल्कि सैकड़ों फिल्मों में काम किया, लेकिन जिंदगी के आखिरी सालों में उसे शोहरत नहीं, बल्कि अकेलापन और तंगी मिली। यह कहानी है 90 के दशक के मशहूर खलनायक महेश आनंद की।
मेहनत से बनाई पहचान
महेश आनंद 80 और 90 के दशक में बॉलीवुड के सबसे पहचाने जाने वाले विलेन में गिने जाते थे। लंबा कद, दमदार बॉडी और जबरदस्त एक्शन उनकी पहचान थी। वह ना सिर्फ अच्छे एक्टर थे, बल्कि मार्शल आर्ट्स में ब्लैक बेल्ट भी हासिल कर चुके थे। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने छोटे-छोटे रोल्स से की और धीरे-धीरे इंडस्ट्री में जगह बनाई।
'शहंशाह' से मिली असली पहचान
शुरुआती दौर में 'भवानी जंक्शन' और 'करिश्मा' जैसी फिल्मों में काम करने के बाद उन्हें कुछ बड़े रोल्स तो मिले, लेकिन खास पहचान नहीं बन पाई। साल 1988 में अमिताभ बच्चन की सुपरहिट फिल्म 'शहंशाह' ने उनकी किस्मत बदल दी। इस फिल्म के बाद महेश आनंद को एक मजबूत विलेन के रूप में देखा जाने लगा और उनके पास फिल्मों की लाइन लग गई।
सैकड़ों फिल्मों का सफर
शहंशाह के बाद महेश आनंद ने 'कुली नंबर 1', 'गुमराह', 'थानेदार', 'विश्वात्मा', 'स्वर्ग', 'अकेला' और 'विजेता' जैसी कई चर्चित फिल्मों में काम किया। अपने करियर में उन्होंने करीब 300 से ज्यादा फिल्मों में अलग-अलग तरह के निगेटिव रोल निभाए और दर्शकों को खूब एंटरटेन किया।
हादसा और करियर का पतन
इतनी सफलता के बावजूद उनकी जिंदगी ने अचानक करवट ली। एक सीरियस एक्सीडेंट के बाद उन्हें कई महीनों तक घर पर रहना पड़ा। इस ब्रेक के दौरान फिल्मी दुनिया उनसे दूर होती चली गई। जब वह दोबारा काम पर लौटना चाहते थे, तब तक नए चेहरे और नए विलेन इंडस्ट्री में जगह बना चुके थे। धीरे-धीरे काम पूरी तरह बंद हो गया और आर्थिक हालात बेहद खराब हो गए।
काम न मिलने की वजह से महेश आनंद को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा। कहा जाता है कि हालात इतने खराब हो गए थे कि रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया। इसी बीच उनका बेटा त्रिशूल अपनी पत्नी के साथ विदेश चला गया, जिससे महेश आनंद बिल्कुल अकेले रह गए।
दर्दनाक अंत
साल 2019 में महेश आनंद ने लंबे समय बाद गोविंदा की फिल्म 'राजा रंगीला' के जरिए वापसी करने की कोशिश की, लेकिन यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह नाकाम रही। फिल्म के कुछ ही हफ्तों बाद महेश आनंद का शव उनके घर में मिला। बताया जाता है कि उनकी मौत का पता दो दिन बाद चला।
आज तक यह साफ नहीं हो पाया है कि उनकी मौत आत्महत्या थी या किसी और वजह से हुई। लेकिन उनकी जिंदगी की कहानी यह जरूर दिखाती है कि फिल्म इंडस्ट्री में शोहरत हमेशा साथ नहीं रहती और एक समय का मशहूर चेहरा भी गुमनामी और अकेलेपन में खो सकता है।


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