महिला दिवस विशेष: बॉलीवुड में नए चलन को बढ़ावा दे रहीं महिलाएं
नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा की शुरुआत से ही महिलाएं इसका अभिन्न हिस्सा रही हैं। कुछ अपवादों को छोड़कर अभिनय और गायन में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। आठ मार्च यानी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आईएएनएस ने ऐसी ही महिलाओं को सूचीबद्ध किया है, जिन्होंने बॉलीवुड में पुरुषों के वर्चस्व वाले क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और नए चलन को बढ़ावा दिया।
नम्रता राव (एडिटर) : सूचना प्रौद्योगिकी की छात्रा नम्रता ने 2008 में फिल्म 'ओए लकी ओए' से एडिटर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद इन्होंने 'इश्किया', 'लव, सेक्स और धोखा', 'बैंड बाजा बारात' , 'शंघाई', 'जब तक हैं जान', 'लेडिज वर्सेस रिकी बहल', में अपनी एडिटिंग का हुनर दिखाया। उन्हें दो फिल्मफेयर अवार्ड मिल चुके हैं।

आरती बजाज (एडीटर) : 'ब्लैक फ्राइडे' से करियर की शुरुआत करने वाली आरती ने 'हनीमून ट्रेवल्स प्राइवेट लिमिटेड', 'जब वी मेट', 'लव आज कल', 'पान सिंह तोमर', 'रॉकस्टार' और 'इशकजादे' में एडीटिंग का हुनर दिखाया है।
सविता सिंह (सिनेमैटोग्राफर) : भारतीय सिनेमा उद्योग में बेहद कम महिला सिनेमैटोग्राफर हैं और 'फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्युट ऑफ इंडिया' की छात्रा सविता इनमें से एक हैं। इन्होंने 'जलपरी : द डेजर्ट मेरमेड', 'किस्मत लव पैसा दिल्ली' और 'फूंक' जैसी फिल्मों की सिनेमैटोग्राफी की है।
स्नेहा खानवाल्कर (संगीतकार) : संगीत निर्देशन ऐसा क्षेत्र है जहां महिलाओं की उपस्थिति स्नेहा से पहले नदारद रही है। लेकिन फिल्म 'गैंग्स आफ वासेपुर', 'ओए लकी लकी ओए' और 'लव सेक्स और धोखा' फिल्म में संगीत देकर स्नेहा ने इस सूखे को खत्म कर दिया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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