काफ़ी अक्लमंद हैं जॉनः बिपाशा

प्रतीक्षा घिल्डियाल
बीबीसी संवाददाता
बिपाशा बासु के लिए बाहरी रूप के बजाय इंसान के अंदरूनी गुण ज़्यादा मायने रखते हैं
हिंदी फ़िल्मों की ग्लैमरस अभिनेत्री बिपाशा बासु कहती हैं कि सिर्फ़ बाहरी शक्ल-सूरत किसी रिश्ते का आधार नहीं हो सकती. इंसान में कुछ तो ऐसा होना चाहिए जो आकर्षण में बांधे रखे और जॉन अब्राहम की वो ख़ासियत है उनकी बुद्धिमत्ता.
बीबीसी से एक विशेष बातचीत में बिपाशा ने कहा, "जॉन और मैं एक दूसरे को पसंद ही इस वजह से करते हैं कि हम दोनों अक्लमंद हैं. मेरी नज़र में बाहरी ख़ूबसूरती के कोई मायने नहीं अगर इन्सान में समझदारी ना हो. बाहरी आकर्षण की उम्र बहुत कम होती है".
बिपाशा कहती हैं, "मेरा और जॉन का रिश्ता अगर नौ सालों से बरक़रार है तो इसीलिए कि हमें एक दूसरे की समझदारी आकर्षित करती है. अगर आप एक शख़्स को पसंद करते हैं, उससे प्यार करते हैं तो फिर कोई चीज़ पुरानी नहीं पड़ती".
बिपाशा और जॉन अब्राहम का साथ काफ़ी पुराना है
शख़्सियत
बिपाशा बासु की छवि एक ऐसी आधुनिक लड़की की है जो बेबाक और आत्मविश्वास भरी हुई है. इसका श्रेय वो अपने पारिवारिक माहौल को देती हैं.
बिपाशा कहती हैं कि घर का माहौल जैसा हो आपके विचार और शख़्सियत वैसी ही होती है. मेरी मां की भूमिका बहुत अहम है. वो ख़ुद तो हिंदी माध्यम से पढ़ीं लेकिन हमेशा चाहती थी कि मेरी बेटियां अंग्रेज़ी बोलें और अपने पैरों पर खड़ी हों.
बिपाशा कहती हैं, "महिलाओं का निडर होना बहुत ज़रूरी है. उनमें ज़रूरत पड़ने पर ना कहने की हिम्मत होनी चाहिए. ताकि वो अपनी ज़िंदगी अपनी पसंद से जी सकें और चुन सकें".
बिपाशा की नई फ़िल्म आक्रोश भी कहीं ना कहीं व्यक्तिगत आज़ादी के सवाल से ही जुड़ी है. यह फ़िल्म इज़्ज़त के नाम पर ह्त्या की घटनाओं पर आधारित है.
फलसफा
बिपाशा बासु की ज़िंदगी का एक ही फलसफा है- करो ख़ुद से प्यार. यही सलाह वो दूसरों को भी देती हैं.
बिपाशा कहती हैं, "आपा-धापी से भरी ज़िंदगी में हम अपने आप को भूल जाते हैं. लेकिन बहुत ज़रूरी है अपने लिए वक्त निकालना. हर रोज़ अगर हम सिर्फ़ आधे घंटे के लिए बाहरी दुनिया को भूल कर ख़ुद पर ध्यान दें. व्यायाम करें, सेहत पर ध्यान दें तो ये हमें मानसिक और शारिरिक तौर पर दुरूस्त रख सकता है".


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