'एक जैसी भूमिकाएं पसंद नहीं'
पीएम तिवारी
बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए कोलकाता से
बिपाशा बसु चाहती हैं कि हर फ़िल्म में उनका किरदार अलग हो. वे एक जैसी भूमिकाएँ नहीं करना चाहतीं.वे कहती हैं कि किसी भी अभिनेता-अभिनेत्री के लिए एक जैसी भूमिकाएँ निभाना काफ़ी बोरिंग काम है.
फ़िलहाल अपनी पहली बांग्ला फ़िल्म ‘सब चरित्र काल्पनिक’ में अपने अभिनय की वजह से वे चर्चा में हैं.
इस फ़िल्म में अपनी डबिंग ख़ुद नहीं कर पाने की वजह से वे कुछ असंतुष्ट थीं. लेकिन फ़िल्म को मिली वाहवाही ने उनकी नाराज़गी दूर कर दी है.
वे फ़िल्म पंख में अपनी भूमिका की प्रशंसा करते नहीं अघातीं. बिपाशा को कोलकाता की पूजा की कमी सबसे ज़्यादा अखरती है.
अपनी फ़िल्म ‘ऑल द बेस्ट’ के प्रमोशन और एक टीवी चैनल की ओर से आयोजित एक रियालिटी शो में हिस्सा लेने आई बिपाशा ने अपनी पसंद, दुर्गापूजा और आने वाली फ़िल्मों के बारे में बातचीत की. पेश हैं उसके प्रमुख अंश.
इस बार दुर्गापूजा में यहीं रहना है?
हाँ, पूजा में आना तो चाहती थी. लेकिन मेरी बहन पढ़ाई के लिए लंदन जा रही है. मां भी साथ जाएंगी. इसलिए आना संभव नहीं होगा.
वैसे, मैंने पूजा की ख़रीददारी यहीं से कर ली है. पूजा तो मुंबई में भी होती है. लेकिन कोलकाता की पूजा की बात ही कुछ और है.
मैं कोलकाता की पूजा को काफ़ी मिस करती हूँ. एक किशोरी के तौर पर मैंने पंडालों में घूम कर जितना आनंद उठाया है, अब वैसा करना मुश्किल है.
कई साल पहले मैं और जॉन अब्राहम पूजा घूमने यहाँ आए थे. लेकिन प्रशंसकों की भीड़ के मारे घर से निकलना ही मुश्किल हो गया था.
‘सब चरित्र काल्पनिक’ में आपके अभिनय ने प्रशंसा बटोरी है. आपको कैसी लगी यह फ़िल्म?
मुझे यह फ़िल्म बेहद पसंद है. इसकी कहानी काफ़ी अच्छी है कविता पर आधारित ये फ़िल्म साहित्य, प्यार और रोमांस की समझ के इर्द-गिर्द बुनी गई है.
इसमें अपनी पोशाक और अभिनय के लिए मुझे दर्शकों और फ़िल्म उद्योग से जुड़े लोगों की काफ़ी बधाइयाँ मिली हैं.
कुछ ग़लतफ़हमी की वजह से मैं डबिंग नहीं कर सकी. लेकिन फ़िल्म देखने के बाद वह बात अखरती नहीं है.
क्या आगे भी बांग्ला फ़िल्मों में काम करना चाहती हैं?
यह मेरा सौभाग्य था कि मैंने पहली बांग्ला फ़िल्म रितुपर्णो दा (घोष) के साथ की. हमारी पसंद और समझ में काफ़ी समानता है.
आगे भी कोई बेहतर ऑफ़र आया तो ज़रूर विचार करूंगी.
आपको कैसी भूमिकाएं पसंद हैं?
मैंने अब तक अपने करियर में एक जैसी दो भूमिकाएँ नहीं की हैं. एक जैसी भूमिकाओं से लोग जल्दी ही बोर हो जाते हैं. मैंने हमेशा कुछ अलग करने का प्रयास किया है.
‘ऑल द बेस्ट’ में आपकी भूमिका कैसी है?
इसमें मैंने लंबे अरसे बाद कॉमेडी की है. इस फ़िल्म की शूटिंग गोवा में हुई है जो छुट्टियां बिताने के लिए मेरी पसंदीदा जगह है.
इस फ़िल्म में संजय दत्त के साथ काम करने का अनुभव काफ़ी अच्छा रहा.
‘पंख’ में भी आपकी भूमिका लीक से हट कर है?
हाँ, ‘पंख’ मेरी बजाय माराडोना रेबेलो की फ़िल्म ज़्यादा है. मैं इसमें काम कर के ख़ुश हूं. इस भूमिका में मैंने काफ़ी मेहनत की है और इससे संतुष्ट हूं.
इसमें मैं 17 साल के एक किशोर की काल्पनिक प्रेमिका के किरदार में हूं. मैंने यह फ़िल्म दो वजहों से साइन की थी.
पहला यह कि इसके निर्देशक सुदीप्त चटर्जी कोलकाता में मेरे पड़ोसी हैं. दूसरी अहम बात यह है कि मुझे यह भूमिका काफ़ी चुनौतीपूर्ण और लीक से हट कर लगी थी.
उम्मीद है लोगों को मेरा किरदार पसंद आएगा. रेबेलो ने भी इस फ़िल्म में काफ़ी मेहनत की है.
आपकी दूसरी फिल्में?
‘ऑल द बेस्ट’ और ‘पंख’ के अलावा राहुल ढ़ोलकिया की ‘लम्हा’ है. आतंकवाद की पृष्ठभूमि पर बनी इस फ़िल्म की शूटिंग कश्मीर में की गई है.


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