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    ऑस्कर विजेता कैथरीन बिग्लो - परिचय

    By Neha Nautiyal
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    ऑस्कर पुरस्कारों के 82 साल के इतिहास में एक नया इतिहास बनाया है - 58 वर्षीया कैथरीन बिग्लो ने. द हर्ट लॉकर के निर्देशन के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशन का पुरस्कार जीतकर वो ये सम्मान पानेवाली पहली महिला निर्देशक बन गई हैं.

    मगर फ़िल्मों से पहले कैथरीन बिग्लो की दुनिया कुछ और थी.

    कैथरीन बिग्लो का जन्म 1951 में कैलिफ़ोर्निया राज्य के सैन कार्लोस शहर में हुआ था. उनके पिता एक पेंटिंग फ़ैक्ट्री के मैनेजर थे, माँ लाइब्रेरियन थीं.

    बचपन में वे बेहद शर्मीली थीं और उनके साथी हुआ करते थे – कूचियाँ और रंग.

    अपने बचपन को याद करते हुए एक बार उन्होंने कहा था, “तब की मेरी स्मृतियों में सदा अपने को किसी सतह पर किसी तरह का रंग फेरते हुए पाती हूँ.“

    ऑस्कर पुरस्कारः2010

    रंगों से ये लगाव उनको सैन फ़्रांसिस्को आर्ट इंस्टीच्यूट ले आया मगर वहाँ आहिस्ता-आहिस्ता वे फ़िल्मों में रमती चली गईं, उन्होंने न्यूयॉर्क के कोलंबिया विश्वविद्यालय में फ़िल्म समीक्षा की पढ़ाई शुरू कर दी.

    इस बदलाव के बारे में उन्होंने आठ वर्ष पहले अख़बार लॉस एंजेल्स टाइम्स को बताया – पेंटिंग थोड़ा कुलीनों की कला है, जबकि फ़िल्में संस्कृति या वर्ग के भेद को नहीं मानतीं.

    लेकिन रंगों की उनकी समझ अकसर उनकी फ़िल्मों में शानदार पृष्ठभूमि में दिख जाया करती है.

    जेम्स कैमरोन का साथ

    इस वर्ष ऑस्कर पुरस्कारों में एक अलग तरह की सनसनी थी क्योंकि मुक़ाबला दो ऐसी फ़िल्मों का था जिसके निर्देशक एक समय एक-दूसरे के जीवनसाथी थे.

    ऑस्कर में आमने-सामने थे –द हर्ट लॉकर के साथ कैथरीन बिग्लो और अवतार के साथ जेम्स कैमरोन.

    कैमरोन और बिग्लो ने 1989 में शादी की थी. बिग्लो, कैमरोन की तीसरी पत्नी थीं.

    मगर दोनों का विवाह दो वर्ष तक ही टिक पाया. 1991 में वे अलग हो गए.

    लेकिन शादी टूटने के बावजूद दोनों में दोस्ती बनी रही, बल्कि कैमरोन ने बिग्लो के निर्देशन में बननेवाली दो फ़िल्मों – स्ट्रेंज डेज़ और प्वाइंट ब्रेक - का निर्माण भी किया.

    ये दिलचस्प है कि बिग्लो फ़िल्में पहले भी बनाती रही थीं, मगर इसके पहले उनकी कोई भी फ़िल्म पुरस्कारों के आस-पास भी नहीं फटक सकी.

    द हर्ट लॉकर

    कैथरीन बिग्लो की फ़िल्म द हर्ट लॉकर – जिसका नाम आज पूरी दुनिया में फैल चुका है - उस फ़िल्म में उन्होंने एक भी नामी कलाकार से काम नहीं लिया है.

    और ये उन्होंने बख़ूबी सोच-समझकर किया जिससे कि उनके शब्दों में – ‘दर्शक अभिनेताओं की हैसियत के हिसाब से ये अंदाज़ा ना लगा सकें कि फ़िल्म में तीन किरदारों में से किसकी मौत होनेवाली है

    और फ़िल्म पर उनकी पकड़ केवल किरदारों के चयन तक ही सीमित नहीं रही.

    फ़िल्म इराक़ में कार्यरत बम निरोधी दस्ते के लोगों पर आधारित है और अमरीका के एरिज़ोना प्रदेश में आसानी से इराक़ की तरह का सेट बनाया जा सकता था.

    लेकिन कैथरीन बिग्लो को ये मंज़ूर नहीं था, वे शूटिंग के लिए इराक़ के पड़ोसी जॉर्डन गईं और वहाँ तपते धूप और तपती रेत के बीच फ़िल्म की शूटिंग हुई.

    और बात यहीं ख़त्म नहीं होती – कैथरीन बिग्लो ने इस फ़िल्म में अपना ख़ुद का पैसा लगाया, जिससे कि वे हॉलीवुड के बड़े स्टूडियो की दख़लंदाज़ी से बचकर ख़ुद अपनी ज़िम्मेदारी से फ़िल्म बना सकें.

    फ़िल्म समीक्षकों ने द हर्ट लॉकर के ऐक्शन दृश्यों की ख़ूब सराहना की है मगर साथ ही कुछ लोगों ने ये कहकर फ़िल्म की आलोचना भी की है कि फ़िल्म इराक़ युद्ध पर किसी विचारधारा को सामने नहीं रखती.

    कैथरीन बिग्लो ने इस संबंध में अपना रूख़ स्पष्ट करते हुए कहा है कि उनकी फ़िल्म कोई वृत्तचित्र नहीं है और उनका इरादा एक लड़ाई के ऐसे सैनिकों की व्यथा को सामने लाना था जो मीडिया के माध्यम से नहीं हो पाता.

    उन्होंने साथ ही कहा कि उनकी फ़िल्म की पटकथा एक युद्ध संवाददाता क्रिस हेज के एक लेख से जन्मी जिसमें उन्होंने कहा था कि लड़ाईयाँ एक शक्तिशाली मादक पदार्थ की तरह सारे समाज को मोहित कर लेती हैं.

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