गुज़ारिश: साहस की ख़ूबसूरत कहानी

By Staff
गुज़ारिश: साहस की ख़ूबसूरत कहानी

भावना सोमाया, वरिष्ठ फ़िल्म समीक्षक

बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

इस हफ़्ते तीन हिंदी फ़िल्में रिलीज़ हुई हैं- दीवानगी ने हद कर दी, शाहरुख़ बोला ख़ूबसूरत है तू और गुज़ारिश. एक अंग्रेज़ी फ़िल्म हैरी पॉटर एंड द डेथली हॉलॉज़ पार्ट-1 भी रिलीज़ हुई है.गुज़ारिश निर्देशक संजय लीला भंसाली की फ़िल्म है. उनकी हर फ़िल्म में कोई एक रंग छाया रहता है और एक ख़ास किस्म का मूड होता है.

हम दिल दे चुके सनम में अगर जश्न था तो देवदास भव्य थी. सावंरिया में हरा-ब्लू रंग छाया हुआ था तो गुज़ारिश में भूरा और बरगंडी रंग है और मूड विचारशील है.गुज़ारिश एक जादूगर की कहानी है जो अपनी अनोखी कला से लोगों की ज़िदंगी में रंग भर देता है. लेकिन फिर एक दुर्घटना के बाद वो अपनी ज़िंदगी बिस्तर और व्हीलचेयर के दायरे में जीता है.

दुनिया के लिए वो एक बहादुर रेडियो जॉकी है मगर सच ये है कि 14 साल लगातार दर्द में जीने के बाद इथन यानी ऋतिक इच्छा मृत्यु चाहता है जिससे कोर्ट इनकार कर देता हैगुज़ारिश इथन के साहस, ज़िंदादिली और रिश्तों की कहानी है. भंसाली की बाकी की फ़िल्मों की तरह ये भी बेहद ख़ूबसूरत फ़िल्म है बल्कि सिनेमेटोग्राफ़र सुदीप चैटर्जी के कुछ दृश्य आँखों से ओझल नहीं होते.

एश्वर्या राय का ढलती रात में नाव में घर जाना या वो दृश्य जहाँ ऋतिक कार ड्राइव के दौरान पेड़, पौधे, फूल, पंछी, आसमान में बदलते रंगों को देखता है, वो ख़ूबसूरत हैं.आम तौर पर फ़िल्म में फ़्लैशबैक कहानी के प्रवाह को तोड़ता है मगर जिस ख़ूबसूरती से इस फ़िल्म में फ़्लैशबैक को मुख्य कहानी के साथ जोड़ा गया है वो तारीफ़ के काबिल है.

सच तो ये है कि छिछोरी कहानियाँ, द्विअर्थी डॉयलॉग और आइटम नंबर ने हमें इतना असंवेदनशील कर दिया है कि विचारशील फि़ल्म को अपनाने में वक़्त लगता है.गुज़ारिश हमारे दिल को टटोलती है, एक अहम सामाजिक मुद्दा उठाती है. लंबे अरसे के बाद निस्वार्थ रिश्ते और सच्चे लोग पर्दे पर देखने को मिले हैं.

हमेशा की तरह निर्देशक संजय लीला भंसाली कला और प्रोडक्शन डिज़ाइन में अलग तरह ही स्वच्छंदता का इस्तेमाल करते हैं. इथन की हवेली और गोवा के दृश्य एक सुंदर पेंटिंग की तरह लगते हैंमगर एक दिलचस्प कहानी और लाजवाब अदाकारी करवाने के लिए उनकी ये ख़ामियाँ माफ़ हैं.गुज़ारिश देखनी चाहिए एश्वर्या राय के अनोखे किरदार के लिए, ऋतिक रोशन के बेहतरीन अभिनय के लिए और भंसाली के सामाजिक संदेश के लिए.

बहुत पहले संजय ने अपने करियर की शुरुआत बतौर कोरियोग्राफ़र की थी फ़िल्म 1941 ए लव स्टोरी के ज़रिए. कुछ साल बाद उसी मनीषा कोइराला को लेकर उन्होंने अपनी पहली फ़िल्म बनाई थी ख़ामोशी द म्यूज़िकल. अब गुज़ारिश में उन्होंने पहली बार बतौर संगीत निर्देशक काम किया है. फ़िल्म समीक्षकों की राय यही है कि वे अलग हैं.

शाहरुख़ बोला....

'शाहरुख़ बोला ख़ूबसरूत है तू" एक फूल बेचने वाली लड़की की कहानी है जिसे शाहरुख़ खान एक दिन खूबसूरत बोल देता है और उसकी दुनिया बदल जाती है.निर्देशक मकरंद देशपांडे ने इसके पहले थिएटर में बहुत सारे प्रयोगात्मक नाटक किए हैं जो अकसर दर्शकों को समझ में नहीं आते. इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है.

जितेन पुरोहित की 'दीवानगी ने हद कर दी" हमारी सहनशक्ति की हदों को टेस्ट करती है. हमारे उभरते निर्देशक पता नहीं कब समझेंगे कि हमें छोटी फि़ल्मों या कलाकारों से ऐतराज़ नहीं है, हमें आपत्ति है बुरी फ़िल्मों और बुरे अभिनय से. उम्मीद करती हूँ कि दूसरे निर्देशक हमें मायूस नहीं करेंगे.अंग्रेज़ी फ़िल्म डेथली हॉलॉस पार्ट-1 जेके राउलिंग की किताब पर आधारित है और हमारा दिल जीत लेती है. मस्ती, जादू... सब कुछ है इस फ़िल्म में और किसी भी हिसाब से ये फ़िल्म मिस नहीं करनी चाहिए.

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+
X