ट्विटर पर गुरुदत्त को याद करते हैं भंडारकर

भंडारकर का कहना है उन्हें प्रसिद्ध निर्देशक और अभिनेता गुरुदत्त की फिल्में और उनके द्वारा इस्तेमाल किए तकनीक काफी पसंद हैं। हिंदी फिल्मों के इतिहास में गुरुदत्त का नाम बड़े आदर और सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने बॉलीवुड को 'प्यासा" और 'कागज के फूल" जैसी क्लासिक फिल्में दी है। ट्विटर पर गुरुदत्त के बारे में भंडारकर टिप्पणी करते हैं, "गुरुदत्त और उनके तकनीक के बारे में बात हुई। वह मेरे प्रिय फिल्मकार थे। उनके साथ काम कर चुके एक व्यक्ति से मुलाकात हुई। उसके बाद मैं काफी खुश हूं।"
ट्विटर पर भंडारकर दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित महान सिनेमैटोग्राफर वी.के.मूर्ति की चर्चा करते हैं। मूर्ति ने गुरुदत्त की फिल्म 'कागज के फूल","प्यासा" और "पाकीजा" में सिनेमैटोग्राफी की थी। भंडारकर कहते हैं, "मूर्ति के साथ लंबी बात हुई। उन्हें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।"
भंडारकर पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम से भी काफी प्रभावित हैं। उन्होंने अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा को ट्विटर पर टिप्पणी की है, "कलाम के सामने खड़े होकर मैं सोचता हूं कि क्या यह सपना तो नहीं है?" इसके अलावा वो प्रियंका को लिखते हैं, "मैं आपकी भावनाओं को समझ सकता हूं। मुझे अभी भी वह समय याद है जब मुझे फिल्म चांदनी बार के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था।"
ट्विटर के जरिए भंडारकर चटपटे व्यंजनों के बारे में भी बताते हैं। उन्होंने टिप्पणी की, "अंधेरी पश्चिम में स्थित अपने कार्यालय के नीचे बने रेस्तरां खगूली गया था। यहां पानीपूरी, पावभाजी से लेकर जलेबी तक मिलते हैं..।" फिल्म और भोजन के अलावा भंडारकर जीवन की सच्चाई के बारे में भी खुलकर टिप्पणी करते हैं। वह 17 मार्च को अपने एक मित्र को टिप्पणी करते हैं, "यदि आपने गरीबी, संघर्ष और अपमान को झेला है तो ही आप सफलता को समझ पाएंगे। मैंने अपनी जिंदगी में इन सभी को झेला है..।"


Click it and Unblock the Notifications











