क्या बर्फी एक आर्ट फिल्म है?
फिल्म में रणबीर कपूर और प्रियंका चोपड़ा ने बिना कुछ बोले सिर्फ आंखों से ही बात की है और अपने एहसासों को परदे पर उतारा है। कई लोगों का मानना है कि बर्फी कमर्शियल फिल्म नहीं बल्कि एक आर्ट फिल्म है। लेकिन फिल्म को देखकर कहीं से भी ऐसा नहीं लगता कि ये फिल्म व्यवसायिक नहीं है। ये कहा जा सकता है कि बर्फी आर्ट और कमर्शियल दोनों फिल्मों का मिला जुला रुप है। लेकिन पूरी तरह से इसे आर्ट फिल्म कहना गलत होगा। अभी तक जब भी कभी किसी थीम पर फिल्म बनी है तो उसे आर्ट फिल्म की कैटेगरी में डाल दिया गया लेकिन बर्फी के साथ ऐसा नहीं है। ये एक बेहतरीन थीम पर बनी कमर्शियल फिल्म है जिसे आर्ट फिल्म का टच दिया गया है।
अनुराग बासु की ये पहली फिल्म ऑस्कर्स के लिए नॉमिनेट हुई है साथ ही रणबीर कपूर और प्रियंका चोपड़ा के लिए भी ये पहली बार है जब उनकी किसी फिल्म को इतना सराहा जा रहा है। ज्ञात हो कि फिल्म के रिलीज होने से पहले ही बॉलीवुड सितारों ने प्रियंका और रणबीर की एक्टिंग की काफी तारीफ की थी। उस वक्त शायद खुद रणबीर और प्रियंका ने भी नहीं सोचा होगा कि उनकी फिल्म ऑस्कर में जाएगी।
पिछले दस सालों से ऑस्कर के लिए सिर्फ आमिर खान या फिर शाहरुख की फिल्में ही ऑस्कर में गई हैं और रणबीर की फिल्म का इस लिस्ट में शामिल होना वाकई काफी बड़ी उपलब्धि है। फिल्म में 70 के दशक का संगीत दिया गया है। साथ ही रणबीर और प्रियंका के कैरेक्टर को इस खूबसूरत से बुना गया है कि आप पूरी फिल्म के दौरान खुद को इसके किरदारों से जुड़ा हुआ महसूस करेंगे। इस फिल्म में बताया है कि किस तरह बिना कुछ कहे भी हम एक खूबसूरत रिश्ते को निभा सकते हैं। हर बार लफ्जो का सहारा लेना जरुरी नहीं होता।
फिल्हाल सभी को उम्मीद है कि इस बार के ऑस्कर्स में बर्फी की खामोशी बढ़ चढ़कर बोले और भारत को एक बर्फी के रुप में अपनी पहली अवॉर्ड विनिंग फिल्म मिले।


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