उम्मीदों पर खरा नहीं उतरे आयुष्मान खुराना
मुंबई। अगर आप प्रोमोज देखकर यह सोंच रहे हैं कि 'नौटंकीसाला' कॉमेडी फिल्म है तो यह बिल्कुल गलत है। विकी डोनर से एक उम्मीद जगाने वाले आयुष्मान ने फिल्म में एक राम नाम के शख्स की भूमिका निभाई है जो कि एक थियेटर एक्टर और डॉयरेक्टर है। एक दिन वह खुदकुशी करने जा रहे आदमी को बचाता है और उसकी जिंदगी में खुशियां लौटाने के प्रयास में वह खुद ही फंस जाता है।
हालांकि कहानी की सराहना की जा रही है पर मजबूत स्क्रिप्ट की कमी के कारण फिल्म बोझिल हो जाती है। फिल्म के निर्देशक रोहन सिप्पी अपनी बात को प्रभावशाली ढंग से दर्शकों को नहीं समझा पाये हैं। वैसे कहानी को आसान बनाने के लिए उन्होने रामायण से प्रेरणा ली है पर इसे ठीक से कार्यान्वित नहीं कर पाये हैं।

कुल मिलाकर यह फिल्म दर्शकों को ज्यादा प्रभावित करने में नाकाम ही रही है। विकी डोनर की सफलता के बाद दर्शक आयुष्मान से उम्मीद लगाये हुए थे। फिल्म के साथ ही वह भी ज्यादा प्रभावशाली नही रहे हैं। प्रोमोज के द्वारा कामेडी दर्शाये जाने के बावजूद फिल्म अलग तरह की है। इसके अलावा कास्ट्यूम और लाइट्स इसे खूबसूरत बनाते हैं।


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