ईमानदार फिल्मकार हैं गोवारिकर: चटर्जी

चटर्जी कहती हैं कि यदि फिल्मकार लेखकों को विश्वास में लेकर फिल्में बनाएं तो साहित्य पर आधारित फिल्मों का चलन बढ़ सकता है। 'खेलें हम जी जान से' शुक्रवार को प्रदर्शित होने जा रही है।
चटर्जी ने कहा, "मुझे लगता है कि ज्यादातर फिल्म निर्देशकों के साथ यह परेशानी है और ऐसा सिर्फ बॉलीवुड में नहीं है। जब फिल्मकार किताबों या विदेशी फिल्मों से अपनी फिल्म की कहानी लेते हैं तो वह उन किताबों, फिल्मों को पर्याप्त श्रेय नहीं देते हैं।"
गोवारिकर ने कई अवसरों पर स्वीकार किया है कि वह 30 के दशक के चटगांव विद्रोह के बारे में तब तक कुछ नहीं जानते थे जब तक कि उन्होंने चटर्जी की किताब 'डू एंड डाई - द चटगांव अपराईजिंग 1930-34' नहीं पढ़ी थी।
गोवारिकर ने फिल्म निर्माण के दौरान किसी भी गलती से बचने के लिए कई बार चटर्जी की सलाह ली थी। चटर्जी की सास कल्पना दत्ता इस विद्रोह से सक्रिय रूप से जुड़ी रही थीं। वर्तमान में चटर्जी कोलकाता में 'द टेलीग्राफ' समाचार पत्र के लिए काम कर रही हैं।
चटर्जी कहती हैं कि इससे पहले अनुराग कश्यप ने एस. हुसैन जैदी की किताब पर 'ब्लैक फ्राइडे' फिल्म बनाई थी। कश्यप ने भी गोवारिकर की तरह जैदी का नाम फिल्म से जुड़े लोगों की सूची में प्रकाशित किया था। वह कहती हैं कि यदि अन्य फिल्मकार भी ईमानदार होते तो और भी कई फिल्मों के निर्माण दल के सदस्यों की सूची में अन्य लेखकों के नाम होते।


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