धूम-धाम से मनेगा दादा मु्नि का जन्मदिन

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अशोक कुमार की बेटी भारती जाफरी कहती हैं, "भविष्य की पीढ़ियों के लिए मेरे पिता के काम का दस्तावेजीकरण जरूरी है।" भारती ने अपने पिता की याद में 'अशोक कुमार फाउंडेशन' की स्थापना की है। वह कहती हैं कि एक नाटक और एक फिल्म का विचार बहुत अच्छा है क्योंकि अशोक कुमार का जीवन बहुत नाटकीय रहा है। उन्होंने कहा, "यकीनन पटकथा बहुत महत्वपूर्ण है क्योकि मेरे पिता संवादों के आधिक्य के खिलाफ थे।"
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समारोहों के तहत शिकागो में कार्यरत पत्रकार अशोक ईस्वरन द्वारा लिखी गई अशोक कुमार की नई जीवनी पेश की जाएगी। फिल्म 'जीवन नैया' (1936) से अभिनय की शुरुआत करने वाले 'दादामुनी' मतलब बड़े भाई के नाम से मशहूर अशोक कुमार एक बेहतरीन चित्रकार, शतरंज खिलाड़ी, एक होम्योपैथ व कई भाषाओं के ज्ञाता भी थे। कुमुदलाल कुंजीलाल गांगुली के घर जन्मे अशोक कुमार ने 300 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया था।


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