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    कश्मीरी पंडितों पर बोले अनुपम खेर- 'वक़्त के साथ कुछ ज़ख़्म न भरते हैं न छिपते हैं', शेयर किया VIDEO

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    आज कश्मीरी पंडितों के साथ हुई हिंसा को 31 साल हो चुके हैं। 19 जनवरी 1989 में अपने घरों से बेघर हुए कश्मीरी पंडित आज भी अपनी जमीन से दूर हैं। हर साल की तरह अभिनेता अनुपम खेर ने इस मौके पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने उस दिन की घटना को याद किया है और कहा, वक़्त के साथ कुछ ज़ख़्म न भरते हैं न छिपते हैं।

    अनुपम खेर ने हाल ही में विवेक अग्निहोत्री वेब सीरीज 'द कश्मीर फाइल' की शूटिंग पूरी की है। अब उन्होंने एक वीडियो शेयर किया है, जिसके कैप्शन में उन्होंने लिखा- वक़्त के साथ कुछ ज़ख़्म न भरते हैं न छिपते हैं।आज कश्मीरी हिन्दुओं को कश्मीर से ज़बरदस्ती निकाले 31 सालों हो गये। एक बार फिर से मैं आप लोगों को याद दिला दूं कि 19 जनवरी,1990 की रात को हुआ क्या था? अपने ही देश में रिफ्यूजी बने रहने का मतलब क्या होता है?

    वीडियो में अभिनेता ने कहा, "दोस्तों हर हाल की तरह 19 जनवरी आ गई। स्वंतत्र भारत की सबसे बड़ी ट्रेजडी को हुए अब 31 साल हो गए हैं। एक बार फिर हम सोशल मीडिया पर ट्रेंड करेंगे और फिर वापस अपनी- अपनी जिंदगी में वापस बिजी हो जाएंगे। लेकिन उससे पहले हर साल की तरह मैं आपको एक बार फिर से याद दिला दूं.. कि 19 जनवरी 1990 को कश्मीर में हुआ क्या था..!

    हजारों लोग सड़कों पर आए

    हजारों लोग सड़कों पर आए

    उन्होंने आगे कहा, "कत्ल, बलात्कार, दिन-दहाडे़ कश्मीरी पंड़ितों को गोली मार देने उन्हें अपने ही घरों से भागा देने पर विवश कर देना.. ये 80 के दशक में चल रहा था। लेकिन 19 जनवरी 1990 को हजारों की तादाद में लोग सड़कों पर आए और कश्मीरी पंडितों के घर पर दस्तक देकर उन्हें अपने घरों से भाग जाने के लिए कहा गया। इसके पीछे एक खतरनाक धमकी की थी। लाउडस्पीकर से आवाजें गूंज रही थी.. कि या तो मिल जाओ या तो भाग जाओ।"

    4 लाख कश्मीरी पंडित बने रिफ्यूजी

    4 लाख कश्मीरी पंडित बने रिफ्यूजी

    "उसी रात एक साथ लगभग 4 लाख कश्मीरी पंडितों का काफिला जैसे तैसे जो भी हाथ लगा उसे एक संदूक में या बैग में भरकर अपना ही घर छोड़कर अपने ही देश में रिफ्यूजी बनने के लिए निकल पड़े।"

    आर्टिकल 370 का हटना एक मरहम है

    आर्टिकल 370 का हटना एक मरहम है

    अनुपम खेर ने आगे कहा, "लेकिन हमने हथियार नहीं उठाए, हमनें आजादी के नारे नहीं लगाए। हम काम करने में विश्वास रखते हैं। हम काम करते चले गए। तो हर साल हम 19 जनवरी को अपना जख्म कुरदते कर उसे हम खुद ताजा करेंगे, और उसमें से निकलते हुए एक-एक खून बूंद दुनिया को दिखाएगें। और याद दिलाते रहेंगे की कश्मीरी पंडितों के साथ उस रात हुआ क्या था। आर्टिकल 370 का हटना एक महरम तो है, लेकिन यह जख्म कब भरेगा ये तो वक्त ही बताएगा।"

    हम होंगे कामयाब

    हम होंगे कामयाब

    "मेरी मां की पीढ़ी शायद कश्मीर में जाकर नहीं बस सकेगी, लेकिन मुझे आने वाली पीढ़ियों से बहुत उम्मीदें हैं। मैं कहना चाहता हूं कि बच्चों हमारे इस जद्दोजहद को याद रखना क्योंकि आप ही हमारी उम्मीद हो। आप ही हमारी ताकत हो। मेरी भावपूर्ण श्रद्धांजलि उन सभी के प्रति, जिन्होंने इस ट्रेजडी में अपनी जान खोई। रिफ्यूजी कैंप में रह रहे लोगों को आश्वासन.. कि उनका त्याग खाली नहीं जाएगा। हम होंगे कामयाब.."

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    English summary
    Actor Anupam Kher shared a video on Kashmiri Pandits Exodus, shared the horrifying incident of 19 January 1990.
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