अपनी अलग पहचान बनाना चाहती हूँ

By Staff
अपनी अलग पहचान बनाना चाहती हूँ

कभी तब्बू तो कभी माधुरी दीक्षित से उनकी तुलना होती है- अभिनेत्री अमृता राव के प्रशंसकों की कोई कमी नहीं है.

पिछले साल उन्होंने गाँव की लड़की बनकर वेलकम टू सज्जनपुर में लोगों को लुभाया तो इस साल वे ग्लैमरस अंदाज़ में नज़र आ रही हैं.

बीबीसी संवाददाता वंदना ने अमृता से बातचीत की.

कुछ दिन पहले अनिल कपूर ने कहा था कि उन्होंने अपनी फ़िल्म शॉर्टकट में आपको इसलिए लिया क्योंकि आप में उन्होंने माधुरी को देखा...कैसा लगता है ये सब बातें सुनकर.

वैसे तो मैं मानती हूँ कि हर एक्टर की ख़ुद की एक पहचान होनी चाहिए. लेकिन इंडस्ट्री में अकसर हर नए एक्टर की तुलना किसी सिनीयर से की जाती है. अनिल जी ने मेरी तुलना माधुरी से की है. वे हिंदी सिनेमा की बेहतरीन अभिनेत्रियों में से एक हैं. मैं इसे बहुत बड़ा कॉम्पलिमेंट मानती हूँ.

अरशद वारसी से हमारी बात हो रही थी, वो आजकल आपको अमृत राव नहीं अमृता वाओ कहकर बुला रहे हैं.

दरअसल शॉर्टकट में मैने उनके साथ काम किया है, इस फ़िल्म में मुझे बहुत सारे कॉस्ट्यूम, हेयरस्टाइल और मेकअप में आने का मौका मिला. अरशद जब भी मुझे देखते तो अमृता वाओ कहते थे. इसके बाद तो पूरी यूनिट मुझे यही कहने लगी थी.

हर फ़िल्म की माँग अलग-अलग होती है. कुछ फ़िल्मों में आप ग्लैमरस दिखती हैं तो वेलकम टू सज्जनपुर जैसी फ़िल्म भी करती हैं. रोल के लिए कैसे ढालती हैं ख़ुद को?

कोई भी एक्टर पर्दे पर उसी तरह से नज़र आता है जिस तरह से पहले उसे निर्देशक या फ़िल्म का लेखक देखता है. तब जाकर दर्शक हमें देख पाते हैं. मैं ख़ुशकिस्मत हूँ कि मुझे करियर के शुरु में ही अलग-अलग किस्म के रोल मिले-चाहे वेल्कम टू सज्जनपुर हो या विवाह हो. कई किरदारों को निभाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है, ख़ासकर ऐसे सीन करना जो आपने कभी अनुभव न किए हों. लेकिन इसका अलग मज़ा भी होता है.

शॉर्ककट के एक गाने में आपके साथ खलनायक संजय दत्त और नायक अनिल कपूर हैं. दोनों कम ही पर्दे पर एक साथ नज़र आते हैं आजकल. कैसा अनुभव रहा.

फ़िल्म का गाना था मरीज़े-मोहब्बत जिसमें दोनों के साथ मुझे काम करने का मौका मिला. मैं स्कूल में थी जब खलनायक रिलीज़ हुई थी. मैं उन्हें हमेशा उसी रोल से याद करती आई हूँ. वहीं मेरे हिसाब से फ़िल्म नायक अनिल कपूर की बेहतरीन फ़िल्म थी. मैं ख़ुशकिस्मत हूँ कि मुझे दोनों के साथ काम करने का मौका मिला.

हिंदी फ़िल्मों में आपको भी सात-आठ साल तो हो ही चुके हैं. शॉर्टकट का रास्ता कितना कारगर रहता है आगे बढ़ने में?

मुझे लगता है कि अगर आपकी मंशा सही है तो ज़िंदगी में शॉर्टकट लेना कोई ग़लत बात नहीं है. अगर रास्ता बंद बड़ा है ट्रैफ़िक के कारण और आपको कोई पतली गली मालूम है जो शॉर्टकट है, तो आप पतली गली से निकल सकते हो लेकिन इरादा सही होना चाहिए. इससे आपका सफ़र सफल रहेगा- चाहे शॉर्टकट से पूरा करो या लॉंगकट से.

बहुत से लोग कहेंगे कि अमृता मेरी पंसदीदा एक्टर हैं लेकिन अमृता को कौन पसंद है.

मेरे पंसदीदा एक्टर हैं ऋतिक रोशन- मैं सही मायने में उन्हें संपूर्ण एक्टर मानती हूँ-प्रोफ़ेशनलिज़म है, लग्न है, अच्छे दिखते हैं, हुनर है. अपने आप में संपूर्ण हैं वो.

कभी कोई फ़िल्म देखकर लगा हो कि काश मैं ये रोल कर पाती?

ऐसा कभी लगता नहीं हैं. मैं जब भी किसी अभिनेत्री को फ़िल्म में देखती हूँ तो मुझे लगता है कि उनसे बेहतर उस रोल को कोई कर नहीं सकता था और इसी वजह से निर्देशक ने उस अभिनेत्री को चुना.

अगली फ़िल्म में कब देख पाएँगे लोग...

शायद आप बहुत जल्दी मुझे नई फ़िल्म में देख पाएँगे लेकिन अभी ज़्यादा कुछ बोल नहीं सकती क्योंकि अभी शुरुआती बात हुई है और इंडस्ट्री थोड़ी सुपरस्टीशस है. बस इंतज़ार कीजिए.

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