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    अस्पताल से लौटने के बाद अमिताभ बच्चन ने लिखी कविता, हुए इमोशनल

    By Shweta
    |
    Amitabh Bachchan DISCHARGED from Lilavati Hospital Mumbai | FilmiBeat

    अमिताभ बच्चन शुक्रवार को नियमित चेकअप के लिए अस्पताल गए जहां कंधे में दर्द की वजह से उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। डिस्चार्ज होने के बाद अमिताभ बच्चन वापस घर आ गए और हमेशा की तरह उन्होंने ब्लॉग लिखा और अपने फैन्स के लिए एक बहुत ही अच्छी कविता भी लिखी।

    अमिताभ बच्चन सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने के लिए जाने जाते हैं। वो प्रत्येक दिन नियमित रूप से सोशल मीडिया पर कुछ ना कुछ पोस्ट करते हैं। खासकर ट्विटर अमिताभ बच्चन का फेवरिट है और इसके अलावा वो अपने ब्लॉग पर भी काफी एक्टिव रहते हैं। जी हाँ जनाब मैं अस्पताल जाता हूँ

    amitabh-bachchan-pens-down-an-interesting-poem-post-his-visit-to-the-hospital

    अमिताभ बच्चन की ये दिल छू लेने वाली कविता आपको भी बेशक बेहद अच्छी लगेगी। आगे आप भी पढ़िए उन्होंने क्या लिखा है - 

    बचपन से ही इस प्रतिकिया को जीवित रखता हूँ ,

    वहीं तो हुई थी मेरी प्रथम पयदाइशि चीत कार

    वहीं तो हुआ था अविरल जीवन का मेरा स्वीकार

    इस पवित्र स्थल का अभिनंदन करता हूँ मैं

    जहाँ इस्वर बनाई प्रतिमा की जाँच होती है तय

    धन्य है वे ,

    धन्य हैं वे

    जिन्हें आत्मा को जीवित रखने का सौभाग्य मिला

    भाग्य शाली हैं वे जिन्हें , उन्हें सौभाग्य देने का सौभाग्य ना मिला

    बनी रहे ये प्रतिक्रिया अनंत जन जात को

    ना देखें ये कभी अस्वस्थता के चंडाल को

    पहुँच गया आज रात्रि को Lilavati के प्रांगण में

    देव समान दिव्यों के दर्शन करने के लिए मैं

    विस्तार से देवी देवों से परिचय हुआ

    उनकी वचन वाणी से आश्रय मिला

    निकला जब चौ पहियों के वाहन में बाहर ,

    'रास्ता रोको' का ऐलान किया पत्र मंडली ने जर्जर

    चका चौंद कर देने वाले हथियार बरसाते हैं ये

    मानो सीमा पार कर देने का दंड देना चाहते हैं वे

    समझ आता है मुझे इनका व्यवहार ;

    समझ आता है मुझे, इनका व्याहार

    प्रत्येक छवि वार है ये उनका व्यवसाय आधार ,

    बाधा ना डालूँगा उनकी नित्य क्रिया पर कभी

    प्रार्थना है बस इतनी उनसे मगर , सभी

    नेत्र हीन कर डालोगे तुम हमारी दिशा दृष्टि को

    यदि यूँ अकिंचन चलाते रहोगे अपने अवज़ार को

    हमारी रक्षा का है बस भैया, एक ही उपाय ,

    इस बुनी हुई प्रमस्तिष्‍क साया रूपी कवच के सिवाय

    अमिताभ बच्चन

    English summary
    Amitabh Bachchan pens down an interesting poem post his visit to the hospital.

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