अलेक्ज़ेंडर सोलज़ेनित्सिन का निधन

By Staff

अलेक्ज़ेंडर सोल-ज़ेनित्सिन की गिनती दुनिया के महान लेखकों में होती है
नोबेल पुरस्कार विजेता और रूसी लेखक अलेक्ज़ेंडर सोलज़ेनित्सिन का निधन हो गया है. दुनिया भर के लोग उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दे रहे हैं.

89 वर्ष के अलेक्ज़ेंडर सोलज़ेनित्सिन ने ना सिर्फ़ 20वीं सदी के उस समय के बारे में लिखा जो रूस के लिए सबसे मुश्किल दौर कहा जाता है बल्कि उन्होंने उन मुश्किलों को ख़ुद भुगता भी.

रूस के प्रधानमंत्री व्लादिमीर पुतिन ने अलेक्ज़ेंडर सोलज़ेनित्सिन के निधन को रूस के लिए एक क्षति क़रार दिया है.

पूर्व सोवियत यूनियन के नेता मिख़ाइल गोर्बाच्योफ़ ने अलेक्ज़ेंडर सोलज़ेनित्सिन को उन लोगों में से एक बताया है जिन्होंने स्तालिन शासन की कथित अमानवीय गतिविधियों और उन अमानवीय गतिविधियों का शिकार हुए लोगों के लिए आवाज़ उठाई और हौसला नहीं टूटने दिया.

अलेक्ज़ेंडर सोलज़ेनित्सिन के काम को अगर देखा जाए तो बहुत कम ही लोग ऐसे हैं जिनकी तुलना उनके साथ की जा सकती है. उन्होंने तमाम मुश्किलें पार कीं. वह उन गिने-चुने लोगों में से थे जिन्होंने स्टालिन की व्यवस्था के ख़िलाफ़ और उस व्यवस्था का शिकार हुए लोगों की रक्षा के लिए आवाज़ उࢠाई
मिख़ाइल गोर्बाच्योफ़ ने कहा, "अलेक्ज़ेंडर सोलज़ेनित्सिन के काम को अगर देखा जाए तो बहुत कम ही लोग ऐसे हैं जिनकी तुलना उनके साथ की जा सकती है. उन्होंने तमाम मुश्किलें पार कीं. वह उन गिने-चुने लोगों में से थे जिन्होंने स्टालिन की व्यवस्था के ख़िलाफ़ और उस व्यवस्था का शिकार हुए लोगों की रक्षा के लिए आवाज़ उठाई."

अलेक्ज़ेंडर सोलज़ेनित्सिन के देशवासी उन्हें श्रद्धांजलि देते समय यह भी स्वीकार कर रहे हैं कि रूस के राष्ट्रीय इतिहास को किताबों में दर्ज कराने में सोलज़ेनित्सिन का अहम भूमिका रही है.

1974 में बीबीसी के साथ एक बातचीत में अलेक्ज़ेंडर सोलज़ेनित्सिन ने कहा भी था," मैं कहना चाहता कि मैंने अपनी किताबें सिर्फ़ इसलिए नहीं लिखी हैं कि पूर्व में हो रही घटनाओं के बारे में पश्चिमी देशों को जानकारी देने का मेरा कोई इरादा है. बल्कि मैंने ये किताबें अपने ही देश के लोगों यानी रूसियों को कुछ फ़ायदा पहुँचाने के लिए भी लिखी हैं. क्योंकि हम ख़ुद ही अपना इतिहास भूल गए हैं. सिर्फ़ ऐसी बात नहीं है कि पश्चिमी देशों को हमारे इतिहास की जानकारी नहीं बल्कि, हमने भी अपना इतिहास गुम कर दिया है. बहुत से ऐतिहासिक दस्तावेज़ जला दिए गए हैं, गवाहों को ख़त्म कर दिया गया है. इसलिए मैंने अपने देश के बारे में सच को फिर से सामने लाने के लिए अपनी कोशिश की है."

जानकारों का कहना है कि अलेक्ज़ेंडर सोलज़ेनित्सिन की पुस्तक -- वन डे इन द लाइफ़ ऑफ़ डेनिसोविच और गुलाग आर्कीपिलागो से लोगों को यह जानने में मदद मिली कि स्टालिन का शासन किस तरह का था.

पश्चिमी देशों में निर्वासन में रहने के बाद 1994 में रूस वापसी के अवसर पर अलेक्ज़ेंडर सोलज़ेनित्सिन ने हवाई अड्डे पर एकत्र भारी भीड़ के सामने कहा था कि उनका लक्ष्य रूसी लोगों को साम्यवाद से बाहर आने में मदद करना रहा है.

अलेक्ज़ेंडर सोलज़ेनित्सिन का कहना था कि उन्हें इस बारे में कोई संदेह नहीं रहा है कि साम्यवाद जल्दी ही ढहने वाला है लेकिन उनकी मुख्य चिंता रही है कि रूसी लोग साम्यवाद के दायरे से बाहर किस तरह आएंगे और उन्हें इसके लिए क्या क़ीमत चुकानी पड़ेगी.

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+
X