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    SHOCK: अक्षय ने कभी एयरलिफ्ट किया ही नहीं....इतना हंगामा क्यों!

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    [बॉलीवुड समाचार] अक्षय कुमार की एयरलिफ्ट आजकल बहुत ही ज़्यादा विवादों से घिर गई है और इसका कारण है अक्षय कुमार का एक झूठ, सरकारी अधिकारियों की माना जाए तो।

    लेकिन ये किसी ने ध्यान नहीं दिया कि अक्षय कुमार ने ये झूठ कभी बोला ही नहीं तो फिर इतना हंगामा किस बात पर! दरअसल, मुद्दा ये है कि अक्षय की फिल्म में एक झूठ चरित्र रंजीत कात्याल को एक सच्ची कहानी में दिखाया गया।

    और इस बात पर विदेश मंत्रालय ने काफी उठापटक मचा रही है। सबने इस बात पर ज़ोर दिया है कि अक्षय कुमार की फिल्म एयरलिफ्ट भले ही अच्छी हो लेकिन है यह झूठी और मंत्रालय को गलत तरह से दिखाती है।

    वहीं अभी तक इस पर अक्षय कुमार और फिल्म के डायरेक्टर राजा मेनन ने कोई टिप्पणी नहीं की है लेकिन हम एयरलिफ्ट के समर्थन में कुछ बातें रखना चाहेंगे जो फिल्म को सीधा और सच्चा करार देने के लिए काफी हैं -

    सच्ची घटना पर आधारित

    सच्ची घटना पर आधारित

    हमेशा से फिल्म ने यही दावा किया है कि फिल्म सच्ची घटना पर आधारित है। 1990 में जो हुआ वो आज तक किसी को नहीं पता था और अक्षय कुमार की एयरलिफ्ट ने कम से कम एक घटना को खंगाला तो सही।

    मंत्रालय को गलत दिखाया?

    मंत्रालय को गलत दिखाया?

    विदेश मंत्रालय का दावा है कि फिल्म में उन्हें गलत दृष्टि से दिखाया गया। वहीं हमने जब फिल्म देखी तो हमें लगा कि वाकई मंत्रालय ने असहाय होने के बावजूद उन भारतीयों की कितनी मदद की!

    छोड़कर भागे

    छोड़कर भागे

    मंत्रालय का कहना है कि फिल्म में दिखाया गया कि एम्बैसी से सब भाग गए। जबकि फिल्म में साफ साफ कहा जाता है कि सद्दाम हुसैन के मुताबिक जब इराक - कुवैत एक हैं तो दो एम्बैसी क्यों...इसलिए रातोंरात सारी एम्बैसी को बगदाद शिफ्ट कर दिया जाता है।

    एक हीरो रंजीत

    एक हीरो रंजीत

    फिल्म ने कभी नहीं कहा कि रंजीत कात्याल एक सच्चा आदमी है, फिल्म ने हमेशा ये बात बताई कि रंजीत कई हीरो को मिलाकर बनाया गया एक आदमी था क्योंकि हर हीरो की कहानी कहना संभव नहीं था। फिल्म के अंत में मिशन से जुड़े हर हीरो का नाम दिखाया गया।

    हिंदुस्तान का मिशन

    हिंदुस्तान का मिशन

    कई लोगों ने आरोप लगाया कि फिल्म में अक्षय कुमार को हीरो बनाया गया है जबकि फिल्म देखकर किसी को ऐसा नहीं लगा कि फिल्म के हीरो अक्षय हैं, फिल्म का हीरो था भारत....और इस एक पॉइंट को कभी नहीं छोड़ा गया!

    1990 का डिप्रेशन

    1990 का डिप्रेशन

    1990 वो दौर था जब भारत बहुत ही बड़ी आर्थिक तंगी से जूझ रहा था लेकिन फिर भी वो 1 लाख 70 हज़ार हिंदुस्तानियों को एयरलिफ्ट करता है। ये भारत के जज़्बे की कहानी थी

    एक ही अफसर

    एक ही अफसर

    मंत्रालय का दावा है कि फिल्म में एक ही आदमी को इस काम के पीछे भागते दिखाया गया है जबकि ऐसा नहीं है। इस मिशन पर ना जाने कितने लोग लगे थे। लेकिन किसी ने ये ध्यान नहीं दिया कि यही कारण है कि उस एक आदमी को भी रियल नहीं दिखाया गया। वो पूरी मिनिस्ट्री के प्रतिनिधि थे।

    हर जगह था इंडिया

    हर जगह था इंडिया

    फिल्म में हर जगह केवल भारत की मज़बूती को दिखाया गया था जिसकी मदद से 1 लाख 70 हज़ार लोग वापस आए। और उन 1 लाख 70 हज़ार लोगों का मुखिया दिखाया गया रंजीत कात्याल को!

    होती है निराशा

    होती है निराशा

    ये काफी चौंकाने वाली बात थी कि एक फिल्म इतने करीने से इतने बड़े मिशन को 2 घंटे के लिए वापस ज़िंदा रखने का हौसला रखती है और लोगों को बताती है कि उनका देश हीरो है, पर देश के लोग ही अपने देश को हीरो मानने को तैयार नहीं शायद!

    बजरंगी VS रंजीत

    बजरंगी VS रंजीत

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    SCORE CARD: एयरलिफ्ट में अक्षय कुमार Vs बजंरगी भाईजान में सलमान खान

    English summary
    Akshay Kumar's airlift strikes some major controversies but did the actor ever claim it?
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