अक्षय कुमार ने बेल बॉटम की कमाई से खत्म किया बॉक्स ऑफिस का सूखा, कहा - इन्हें बताया असली अक्षय कुमार

अक्षय कुमार की बेल बॉटम ने बॉक्स ऑफिस पर भले ही धीमी शुरूआत की हो लेकिन अक्षय कुमार इसे फिल्म की विफलता नहीं मान रहे हैं। मीडिया के साथ एक बातचीच में अक्षय कुमार ने कहा कि वो नहीं मानते कि बेल बॉटम एक डूबती हुई नाव है। बल्कि उनका कहना है कि ये फिल्म ही डूबते को तिनके का सहारा है।

अक्षय कुमार ने इस इंटरव्यू में कहा कि अभी तक तो बॉक्स ऑफिस के इंजन पर ही ज़ंग लगा हुआ था। कम से कम अक्षय कुमार ने थिएटर की सफाई कर वहां दर्शकों का स्वागत तो किया है। अक्षय कुमार अपने प्रोड्यूसर वाशु भगनानी और उनकी टीम को इसके लिए धन्यवाद देते हैं।

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अक्षय कुमार ने इस इंटरव्यू में कहा कि असल के अक्षय कुमार यानि कि असली हीरो तो वाशु भगनानी हैं जिन्होंने बिना डरे इस फिल्म को थिएटर में रिलीज़ करने का फैसला किया। एक तरह से उन्होंने बॉक्स ऑफिस की बंद गाड़ी को तेल देकर उसे वापस चलाने की कोशिश की है। इससे पहले भी एक इंटरव्यू में अक्षय का मानना था कि अगर बेल बॉटम 30 करोड़ की भी कमाई कर लेती है तो फिल्म सफल है और ये मान लेना चाहिए कि इसने 100 करोड़ कमा लिए।

सभी ने की तारीफ

सभी ने की तारीफ

गौरतलब है कि बेल बॉटम के साथ बॉक्स ऑफिस पर वापसी करने का फैसला लेने के लिए सभी ने अक्षय कुमार की हिम्मत की तारीफ की। जहां अभी भी लोग घाटे के डर से फिल्में डिजिटल रिलीज़ करने की सोच रहे हैं वहीं अक्षय कुमार ने बेल बॉटम के साथ सिनेमाघरों में दर्शकों का स्वागत करने की तैयारी की और दर्शकों ने उन्हें निराश नहीं किया है।

कोरोना में अच्छी ओपनिंग

कोरोना में अच्छी ओपनिंग

कोरोना काल के बाद और तीसरी लहर के डर के बीच अक्षय कुमार की फिल्म ने लगभग 2.75 करोड़ की ओपनिंग दी है जिसे अच्छा माना जा रहा है। वो भी तब जब देश में कई जगह सिनेमाघर अलग अलग नियम से खुले हैं तो महाराष्ट्र में सिनेमाघर अभी भी बंद है। फिर भी अक्षय कुमार ने अपनी फिल्म के साथ बॉक्स ऑफिस को सूखे से मुक्त किया है।

बॉक्स ऑफिस पर अक्षय को फायदा ही फायदा

बॉक्स ऑफिस पर अक्षय को फायदा ही फायदा

गौरतलब है कि सिनेमाघर भले ही केवल 50 प्रतिशत ऑक्यूपेंसी पर ही खुल रहे हैं लेकिन बेलबॉटम को इस बात का फायदा होगा।इस समय मार्केट में मुकाबला है ही नहीं। ज़्यादातर फिल्में अभी तक अधूरी हैं और रिलीज़ के लिए तैयार ही नहीं हैं। ऐसे में दर्शकों के पास थिएटर कंटेंट की कमी है और इसलिए जो भी फिल्म रिलीज़ होगी उसे इसका फायदा मिलेगा।

भरे पड़े हैं बेल बॉटम के शो

भरे पड़े हैं बेल बॉटम के शो

देश में इतने ज़्यादा मल्टीप्लेक्स और सिंगल स्क्रीन थिएटर हैं कि इस 50 प्रतिशत ऑक्यूपेंसी की भरपाई आराम से की जा सकती है। वैसे भी जब कम फिल्में रिलीज़ होंगी तो ऐसे में हर फिल्म के पास कम से कम 22 - 25 शो रोज़ाना होंगे। इन Shows की संख्या, जब फिल्में ज़्यादा होती है तो घटकर 15 - 18 होती है। ज़्यादा शो मतलब कमाने के ज़्यादा अवसर।

नहीं पड़ेगा कमाई पर ज़्यादा फर्क

नहीं पड़ेगा कमाई पर ज़्यादा फर्क

अगर हाउसफुल और ऑक्यूपेंसी का गणित समझा जाए तो वैसे भी कोई भी फिल्म हफ्तों तक हाउसफुल नहीं रहती हैं। आजकल फिल्मों की ऑक्यूपेंसी वैसे भी 20 - 30 प्रतिशत ही रहती है। केवल शुरू के 2 - 3 दिन ही हाउसफुल की संभावना बनती है। तो थिएटर की 50 प्रतिशत ऑक्यूपेंसी से वैसे भी किसी को ज़्यादा फर्क नहीं पड़ना चाहिए। यानि कि फिल्म उससे ज़्यादा ही कमाई करेगी जितना कोरोना काल में कमा रही होती।

बॉक्स ऑफिस के मसीहा

बॉक्स ऑफिस के मसीहा

अब जब अक्षय कुमार ने खुद शुरूआत कर दी है तो देखते हैं कि बाकी अटकी हुई फिल्में कब बॉक्स ऑफिस का इंतज़ार खत्म करती हैं और टिकट खिड़की पर दस्तक देती हैं। बेल बॉटम के बाद अब दशहरा, दीवाली, क्रिसमस और न्यू ईयर चार मुख्य फेस्टिवल़डेट्स पर फिल्मों के एलान का इंतज़ार है।

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