कॉमेडी फिल्में, स्टार वैल्यू, बॉक्स ऑफिस और स्क्रिप्ट के चुनाव पर अक्षय कुमार- 'किस्मत से फिल्में चल जाती हैं'
फिल्म 'बच्चन पांडे' के साथ अक्षय कुमार एक बार फिर थियेटर्स में धमाका करने को तैयार हैं। अक्षय, कृति सैनन, जैकलीन फर्नाडीज़ और अरशद वारसी स्टारर ये फिल्म 18 मार्च को रिलीज होने वाली है। कोई शक नहीं कि दर्शकों के साथ साथ ट्रेड को भी इस फिल्म से काफी उम्मीदें हैं।
हाल ही में अक्षय कुमार ने मीडिया से मुलाकात की, जहां उन्होने अपने स्क्रिप्ट के चुनाव, कॉमेडी फिल्मों के योगदान, स्टार वैल्यू और बॉक्स ऑफिस को लेकर काफी बातें कीं। अपने स्टारडम पर बात करते हुए अभिनेता ने कहा, मैं 'स्टार' जैसे शब्द पर विश्वास नहीं रखता। मैं कहूंगा कि किस्मत अच्छी है कि फिल्में चल जाती है।

बता दें, अक्षय कुमार की पिछली फिल्म सूर्यवंशी ने महामारी के दौरान 195 करोड़ का बिजनेस किया था। इस फिल्म के साथ एक तरह बॉलीवुड ने लॉकडाउन के बाद वापसी की थी। जिसके बाद अक्षय को ना सिर्फ सुपरस्टार, बल्कि सबसे बैंकेबल स्टार होने का भी टैग दिया जाने लगा।
जब एक्टर से इस बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा, "स्टार की क्या वैल्यू होती है! आज है, दो फ्राइ़डे अगर फिल्में नहीं चली तो फिर नीचे उतार दिये जाओगे। स्टारडम को कभी गंभीरता से नहीं लेना चाहिए।"

किस्मत से चलती हैं फिल्में
अक्षय कुमार ने कहा, "मैं 'स्टार' जैसे शब्द पर विश्वास नहीं रखता। मैं कहूंगा कि किस्मत अच्छी है कि फिल्में चल जाती है। हमेशा यही कहते आया हूं कि इस इंडस्ट्री में 70 प्रतिशत किस्मत चलती है और 30 प्रतिशत मेहनत। मैं खुद अपनी कई फिल्में देखकर सोचता हूं कि ये चल ही नहीं सकती है.. और वो फिल्म बहुत चलती है। कोई फिल्में होती हैं, जिसके लिए सब मेरी तारीफ करते हैं लेकिन बॉक्स ऑफिस पर वो फिल्म पानी नहीं मांगती है। तो यहां बैठकर मैं जज नहीं कर सकता कि ये फिल्म चलेगी या नहीं चलेगी।"

मैं नहीं हूं बैंकेबल स्टार
एक्टर ने आगे कहा, "मैंने खुद अपनी आंखों से देखा है स्टार को नीचे गिरते हुए। बहुत बड़ी फिल्मों को शुक्रवार को औंधे मुंह गिरते देखा है। मेरे खुद के लिए मीडिया के सवालों को बदलते हुए देखा है। इसीलिए मैं खुद को बैंकेबल स्टार मानता ही नहीं हूं। मैं इन पर विश्वास ही नहीं करता।"

एक लाइन सुनकर फिल्में करता हूं
वहीं, फिल्म इंडस्ट्री में 30 दशक गुजार लेने के बाद भी स्क्रिप्ट की क्या बात उन्हें आकर्षित करती है.. इस बारें में बात करते हुए अभिनेता कहते हैं-"फिल्म की स्क्रिप्ट मैं कभी पूरी नहीं सुनता हूं। मैं पहले एक लाइन सुनता हूं। यदि वो एक लाइन मुझे पसंद आती है, आकर्षित करती है.. उसके बाद ही मैं पूरी स्क्रिप्ट की डिमांड करता हूं। मेरे हिसाब से एक लाइन में मुझे फिल्म समझ आ जाती है। फिर मैं ये नहीं देखता ही नया डायरेक्टर है या नई हीरोइन है। यदि मुझे फिल्म समझ आ गई तो मैं कर लेता हूं।"

करण जौहर लेकर आए थे ढ़ाई घंटे की स्क्रिप्ट
एक दिलचस्प किस्सा शेयर करते हुए अक्षय ने कहा, "मैं बताऊं, एक बार करण जौहर मेरे पास आए थे एक ढ़ाई घंटे की स्क्रिप्ट लेकर। उन्होंने मुझे पूरा सुनाया। मुझे ठीक भी लगी वो स्क्रिप्ट। लेकिन फिर मैंने ऐसे ही पूछा कि और क्या बना रहे हो.. तो उन्होंने कहा एक छोटी सी फिल्म है गुड न्यूज करके। उसने दो मिनट में उसकी कहानी सुनाई। तो मैंने उन्हें कहा कि ये ढ़ाई घंटे की स्क्रिप्ट को साइड में करते हैं, पहले मैं ये करता हूं। तो ऐसे मुझे गुड न्यूज मिली थी।"

कॉमेडी फिल्मों को नहीं मिलती है इज्जत
वहीं, अपने करियर में की गई कॉमेडी फिल्मों पर बात करते हुए अक्षय कुमार ने कहा, "पहले कॉमेडी फिल्मों को उसका हक नहीं मिलता था। मेरे हिसाब से हेरा फेरी, गोलमाल के साथ कुछ बदलाव आया है। लेकिन आज भी कॉमेडी फिल्मों को वो इज्जत नहीं मिलती है, जिसकी वो हकदार है। अवार्ड्स नाइट्स में कभी उसकी चर्चा नहीं होती है। बेस्ट एक्टर के लिए उन फिल्मों को कभी शामिल नहीं किया जाता है। उसमें हमेशा रोमांटिक और एक्शन फिल्में ही आती हैं। जबकि कॉमेडी भी तो एक्टिंग होती है।"


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