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    अजय देवगन ने रिजेक्ट की भंसाली की बैजू बावरा रीमेक, कहा तानसेन नहीं, ये रोल दमदार

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    संजय लीला भंसाली ने हाल ही में बैजू बावरा रीमेक का एलान कर सबको चौंका दिया है। संजय ने इस फिल्म के राइट्स काफी पहले खरीदे थे लेकिन फिल्म पर काम इतनी जल्दी शुरू हो जाएगा इसका किसी को अंदाज़ा नहीं था।

    फिल्म में भंसाली ने अजय देवगन को तानसेन के रोल के लिए अप्रोच किया था। अब खबर है कि अजय देवगन ने ये रोल रिजेक्ट कर दिया है क्योंकि तानसेन के मुकाबले बैजू का रोल दमदार है।

    गौरतलब है कि संजय लीला भंसाली, अपनी ईद 2020 फिल्म इंशाल्लाह पर काम कर रहे थे। फिल्म में सलमान खान और आलिया भट्ट मुख्य भूमिकाओं में थे। लेकिन फिर सलमान को फिल्म खटक गई और उन्होंने फिल्म छोड़ दी।

    इसके बाद कुछ समय तक संजय लीला भंसाली को समझ नहीं आया कि किया क्या जाए लेकिन फिर उन्होंने खुद को काम पर लगाया और एक साथ दो प्रोजेक्ट अनाउंस किए - गंगूबाई काठियावाड़ी और बैजू बावरा रीमेक।

    यहां जानिए बैजू बावरा की कहानी -

    एक गुमनाम गायक

    एक गुमनाम गायक

    तानसेन को देश का बेस्ट गायक कहा जाता है। वो अकबर में दरबार में गाते थे और अकबर के नवरत्नों में से एक थे। तानसेन जैसे कोई नहीं गा सकता था और जो गाता था उसे मार दिया जाता था। बैजू बावरा एक ऐसे गुमनाम गायक की कहानी है जो तानसेन को हराकर अपने पिता की मौत का बदला लेना चाहता है।

    एक बदला

    एक बदला

    बैजू के बचपन में, तानसेन के आदमी उसके पिता को गाने से रोकने की पूरी कोशिश करते हैं जिसमें उसके पिता की मौत हो जाती है। मरते हुए वो बैजू से वादा लेता है कि तानसेन से बदला ज़रूर लेगा। और यहीं से बैजू बावरा और उसके संगीत की कहानी शुरू होती है।

    भूले हुए वादे

    भूले हुए वादे

    बैजू को गांव के पंडित के घर शरण मिलती है और उसे एक नािवक की बेटी गौरी से प्यार हो जाता है। बैजू अपने संगीत को जारी रखता है लेकिन गौरी के प्यार में अपने पिता को किया गया वादा भूल जाता है।

    कहानी में ट्विवस्ट

    कहानी में ट्विवस्ट

    कुछ समय बाद गांव में डाकू आते हैं लेकिन डाकू की सरदारनी को बैजू से प्यार हो जाता है। वो गांव को इस शर्त पर छोड़ती है कि बैजू, डाकुओं के गिरोह के साथ उनकी हवेली पर जाकर रहेगा। वहां, डाकुओं की सरदारनी बताती है कि वो एक राजकुमारी है और अपने पिता का बदला ले रही है।

    तानसेन से मुलाकात

    तानसेन से मुलाकात

    बदला से बैजू को पुरानी यादें ताज़ा होती हैं और वो मुग़ल महल में घुसता है जहां तानसेन गा रहे होते हैं। उन्हें गाता सुन, बैजू खो जाता है। जिस तलवार से वो तानसेन का गला काटना चाहता था वो तानपूरे पर गिरती है और तानपूरा का तार टूट जाता है। इससे तानसेन दुखी होता है और कहता है कि केवल संगीत ही उसे मार सकता था।

    बैजू बना बावरा

    बैजू बना बावरा

    बैजू असली संगीत खोजने निकल पड़ता है और धीरे धीरे उसके संगीत में भी वो दर्द और प्यार छलकता है जो किसी का भी दिल जीत ले। इसके बाद सड़कों पर गाने लगता है और लोग उसे बावरा कहते हैं।

    संगीत का घमासान

    संगीत का घमासान

    बैजू और तानसेन के बीच अकबर के दरबार में एक कंपिटीशन होता है और अकबर उन्हें चैलेंज देता है कि जो एक संगमरमर को पिघला देगा वो जीत जाएगा। बैजू जीत जाता है। लेकिन अकबर से तानसेन की ज़िंदगी बख्शने की गुज़ारिश करता है।

    धमाकेदार अंत

    धमाकेदार अंत

    इसके बाद बैजू दरबार से चला जाता है लेकिन अकबर दुखी हो जाते हैं और तानसेन को उसे रोकने के लिए बाढ़ लाने का आदेश देते हैं। तानसेन राग मेघ गाते हैं जिससे भयंकर बारिश होती है। हालांकि इस सीन को फिल्म से काट दिया गया था।

    English summary
    Ajay Devgn has rejected Tansen’s role offered to him by Bhansali in his upcoming film Baiju Bawra remake.
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