..................... actress takes house help for hair cut saloon says no yo house help Sandhya Mridul lashes out in video - Hindi Filmibeat

20 साल की नौकरानी के बाल काटने से किया मना, सैलून पर बुरी तरह भड़कीं हीरोइन

Sandhya Mridul Video: बॉलीवुड अभिनेत्री संध्या मृदुल ने सोशल मीडिया पर अपनी वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में उन्होंने एक हैरान करने वाला वाकया बताया है। ये मामला सोशल स्टेटस और लोगो की सोच से जुड़ा है जो कई लोगों को काफी हैरान कर रहा है। संध्या के इस वीडियो को दिव्या दत्ता ने भी रीशेयर किया है।

Sandhya Mridul Video

संध्या ने बताया कि कैसे 20 साल की हाउस हेल्प के बाल काटने से सैलून वालों ने मना कर दिया। संध्या की मां अपनी हाऊस हेल्प को हेयरकट के लिए लेकर गई थीं जिसके लिए वो काफी एक्साइटेड थी। लेकिन जालिम सैलून वालों ने उस हाऊस हेल्प की खुशी और एक्साइटमेंट ज्यादा देर के लिए टिकने नहीं दी। सैलून संचालकों ने साफ मना कर दिया। कारण इतना बेतुका कि वह घर के काम करती है।

संध्या मृदुल सैलून चलाने वालों पर भड़क गईं। उन्होंने वीडियो में कहा कि यह घटना सिर्फ एक सैलून की नकारात्मक सोच नहीं है, बल्कि हमारी समाज की गहरी जड़ें वाली मानसिकता को उजागर करती है। उन्होंने वीडियो में कहा, यह घटना हमें कई सवाल पूछने पर मजबूर करती है। क्या हम इतने छोटे दिल वाले हो गए हैं कि किसी की पेशेवर स्थिति देखकर उसे इंसानियत से वंचित कर देते हैं? क्या हेयरकट, सम्मान या खुशी भी सिर्फ कुछ खास लोगों के लिए आरक्षित है? घरेलू स्टाफ हमारे जीवन को आसान बनाते हैं। वे सुबह जल्दी उठकर चाय बनाते हैं, बच्चों की देखभाल करते हैं, घर साफ रखते हैं-फिर भी हम उन्हें बराबरी का दर्जा देने से कतराते हैं।

संध्या मृदुल ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा,"हर इंसान सम्मान, इज्जत और दया का हकदार है। यह इस बात पर निर्भर नहीं करता कि वे हमारे लिए क्या करते हैं, बल्कि इसलिए क्योंकि वे भी इंसान हैं। हमारे घरेलू कर्मचारी अदृश्य नहीं हैं। वे हमारे घरों, हमारे परिवारों की देखभाल करते हैं और कई बार खुद भी परिवार का हिस्सा बन जाते हैं। एक यंग लड़की को सिर्फ उसकी पहचान की वजह से सैलून से बाहर कर दिया गया, यह देखकर मुझे बहुत दुख हुआ।"

संध्या मृदुल ने आगे लिखा, "वह बस अपनी 20 की उम्र की एक बच्ची है, जो बाल कटवाने को लेकर एक्साइटेड थी। और हमने उसका यह एक्सपीरिएंस खराब कर दिया। क्यों? रिजेक्शन किए जाने का दर्द सबको महसूस होता है और सम्मान कभी भी कुछ लोगों तक सीमित नहीं होना चाहिए। थोड़ी सी दया, इज्जत और इंसानियत में कुछ भी खर्च नहीं होता। हमें और बेहतर करना चाहिए।"

संध्या मृदुल ने आखिरी में लिखा, "मैं सैलून का नाम नहीं ले रही हूं क्योंकि वह मेरी मां के बिल्डिंग में एक प्राइवेट सैलून है और मैं उनकी प्राइवेसी बनाए रखना चाहती हूं। लेकिन मैं इस मुद्दे को जरूर उठा रही हूं। सैलून का नाम लेना इस पोस्ट का मकसद नहीं है। समस्या एक जगह की नहीं, सोच की है। यही सोच हमें बदलनी है।"

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