दिव्या भारती: मौत के बाद फिल्म स्क्रीनिंग के दौरान स्क्रीन गिरी

3 सुपरहिट फ़िल्मों के बाद 5 अप्रैल 1993 को दिव्या भारती की अचानक मौत हो गई।उनकी काफी अच्छी दोस्त रह चुकीं आयशा जुल्का ने उनके बारे में खास बातचीत की।

By सुमिरन प्रीत कौर - बीबीसी संवाददाता

दिव्या भारती बेहद कम उम्र में एक ऐसी अभिनेत्री बन गईं थीं जिसके साथ काम करने के लिए डायरेक्टरों की लाइन लगी थी.

1992 में तीन हिट फ़िल्मों के बाद 5 अप्रैल 1993 को 19 साल की दिव्या की अचानक मौत हो गई.

लगभग 11 बजे, रात को दिव्या मुंबई के वर्सोवा में अपने पांचवें मंजिल के अपार्टमेंट की बालकनी से गिर गईं. सुबह तक सारी इंडस्ट्री को पता चल गया कि दिव्या मर गई हैं.

मौत के बाद उनकी फ़िल्म जैसे 'रंग', 'शतरंज' और 'थोलि मुद्धू' रिलीज़ हुईं. 'रंग' में दिव्या भारती नज़र आईं आयशा जुल्का के साथ.

आयशा जुल्का ने बीबीसी को बताया, "दिव्या की मौत के बाद एक बड़ी अजीब बात हुई. कुछ महीनों बाद हम 'रंग' का ट्रायल देखने गये फ़िल्म सिटी. जैसे ही दिव्या स्क्रीन पर आईं तो स्क्रीन ही गिर गया. हमारे लिए वो अजीब था."

जिन फ़िल्म प्रॉजेक्ट्स का दिव्या हिस्सा थीं उसमें उनके जैसे दिखने वाली शख्स का इस्तेमाल हुआ या फिर किसी और अभिनेत्री ने उनका रोल निभाया.

1994 की फ़िल्म 'लाडला' में उनकी जगह ली श्रीदेवी ने. दिव्या फ़िल्म का एक बड़ा हिस्सा शूट कर चुकी थीं और उनकी फुटेज इंटरनेट पर भी उपलब्ध है.

क्या हुआ था उस दिन

एक साक्षात्कार में दिव्या के परिवार वालों ने बताया था कि दिव्या अपने दोस्तों के साथ थीं. रात 10 बजे फ़ोन आया कि किसी काम की वजह से फ़ैशन डिज़ाइनर घर पर हैं.

दिव्या को उनके भाई घर छोड़ कर गये. कुछ देर में फ़ोन आ गया कि वो बालकनी से गिर गईं.

आयशा जुल्का ने बताया, "बहुत समय तक तो विश्वास ही नहीं हुआ. एक और अजीब बात है कि शायद वो खुद कुछ जानती थीं. वो हमेशा कहती थीं कि जल्दी करो, जल्दी चलो, ज़िंदगी छोटी है. उन्होंने साफ़ साफ़ नहीं कहा लेकिन शायद इंसान को अंदर से एक 'इंपल्स' होता है. उन्हें हर काम जल्दी करना था. उनको सब कुछ ज़िंदगी में जल्दी मिल रहा था. वो खुद कहतीं कि उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा. ऐसा लगता है कि उन्हें पता था कि हमारे बीच ज़्यादा नहीं रहना."

एक साल तक कोई फ़िल्म नहीं मिली

महज़ 14 साल की उम्र में दिव्या भारती का फ़िल्मों से नाता जुड़ा. उनको एक के बाद एक फिल्में मिलीं और एक के बाद एक वो प्रोजेक्ट्स उनके हाथ से निकले.

उनका रोल किसी और हीरोइन को चला गया या फिर उनकी निर्देशक से अनबन हुई. एक साल तक यही हुआ. उन्होंने फिर एक ब्रेक लेने का फ़ैसला किया.

जब वो छुटिट्यों के लिए गईं थीं तो उन्हें जल्द मुंबई आने के लिए बोला गया. उन्हें तेलगु सिनेमा के निर्देशकों से मिलना था.

वो मिले और अगले दिन हैदराबाद में शूटिंग शुरू हुई. फ़िल्म थी 'बॉबिली राजा' जिसमें दिव्या भारती के साथ थे वेंकटेश.

ये बात है 1990 की. उसके बाद सब बहुत जल्दी जल्दी हुआ और ना ऑडियन्स को सोचने का मौका मिला ना खुद दिव्या को.

'बॉबिली राजा' हुई हिट और फिर इन्होंने तेलगु फ़िल्में करना शुरू किया. 1991 में तेलेगु सिनेमा के मशहूर अभिनेता चिरंजीवी और मोहन बाबू के साथ काम किया.

फ़िल्म थी 'राउडी अल्लुडू' और 'असेंब्ली राउडी'.

एक ही साल में तीन हिट फ़िल्में

एक ही साल में तेलगु सिनेमा में एक बड़ा नाम बनने के बाद उन्हें हिंदी फ़िल्में ऑफर हुईं. उन्होंने 1992 और 1993 के बीच 14 से अधिक हिंदी फिल्मों में अभिनय किया, जो हिंदी सिनेमा में एक रिकॉर्ड है.

जनवरी में आई उनकी पहली हिंदी फ़िल्म- 'विश्वात्मा'. फ़िल्म का गाना 'सात समंदर पार' हिट हुआ.

इसके अगले महीने आई गोविंदा और दिव्या की 'शोला और शबनम' और फ़िल्म हुई हिट. जुलाई में आई शाहरुख , दिव्या और ऋषि कपूर की 'दीवाना'.

ये शाहरुख की पहली रिलीज़ थी और दिव्या भारती की एक ही साल में तीसरी हिट फ़िल्म. अब किसी को भी कोई शक नहीं था कि वह अगली बड़ी स्टार होंगी.

'शोला और शबनम' की शूटिंग के दौरान इनकी साजिद नाडियाडवाला से मुलाकात हुई और जल्द शादी हुई .हालांकि शादी के बारे में ज़्यादा लोग नहीं जानते थे.

आप उनकी खिंचे चले जाते

आयशा जुल्का ने बताया, "वो बहुत हंसमुख लड़की थीं और आप खुद ही उनकी ओर खिंचे चले जाते. वो बहुत प्यारी थीं और सबका प्यार लेती थीं. मेरी दोस्त भी थीं. मेरे लिए उन्होंने शॉपिंग भी की."

1992 में तीन सुपरहिट फ़िल्मों के बाद, 1993 की पहली रिलीज़ 'क्षत्रिय' थी. इस फ़िल्म में थी दिव्या, रवीना, सन्नी और संजय दत्त.

ये फ़िल्म आई मार्च में और अप्रैल में दिव्या की मौत हो गई. 'क्षत्रिय' उनके जीवनकाल में उनकी आखिरी रिलीज़ थी.

रवीना टंडन कहती हैं, "वो जवान थीं, बहुत जज़्बाती थीं और किसी की सुनती नहीं थी. बस शायद वही बात कहीं कोई कारण बन गई."

दिव्या भारती के एक साल के काम ने उन्हें इतनी ऊँचाई पर पहुँचा दिया की आज 25 साल बाद भी लोग उन्हें भूल नहीं पाते.

उन पर फ़िल्माये गाने जैसे - 'सात समुंदर पार', 'दीवाना तेरा नाम रख दिया' लोग आज भी गुनगुनाते हैं.

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