"OTT प्लेटफ़ॉर्मों ने एक्टर्स को अलग-अलग अंदाज़ में खुद को एक्सप्रेस करने के लिए नए रास्ते खोल दिए हैं"
इस साल वर्सेटाइल एक्टर ताहिर राज भसीन की तीन फ़िल्में रिलीज़ होने वाली हैं! आने वाले दिनों में वह दो फ़िल्मों में दिखाई देंगे - 83 (रणवीर सिंह के साथ) और लूप लपेटा (जिसमें वह तापसी पन्नू के ऑपोजिट नज़र आएंगे), साथ ही एक बड़े OTT प्रोजेक्ट की घोषणा जल्द ही की जाएगी। अपनी कला से दर्शकों का लगातार मनोरंजन करने की ख़्वाहिश रखने वाले कलाकार के रूप में, ताहिर मानते हैं कि यह सभी एक्टर्स के लिए खुद को एक्सप्रेस करने का सबसे अच्छा दौर है क्योंकि आज के ज़माने में अलग-अलग तरह के कई माध्यम उपलब्ध हैं जिसके जरिए कोई भी हुनरमंद कलाकार स्पॉटलाइट प्राप्त कर सकता है।
ताहिर कहते हैं, "मैं 'लूप लपेटा' और '83' के साथ-साथ बेहद खास OTT प्रोजेक्ट की रिलीज़ को लेकर बेहद उत्साहित हूं, जिस पर अभी काम चल रहा है। एक्टिंग के लिहाज से देखा जाए तो यह दौर वाकई इन्क्रेडिबल है, क्योंकि आज फ़िल्म स्टार्स के पास काम करने के लिए कई तरह के माध्यम उपलब्ध हैं। इस साल डिजिटल और थिऐट्रिकल्स माध्यमों के जरिए स्टोरीटेलिंग के कन्वर्जंस की शुरुआत हुई है, साथ ही दर्शक OTT प्लेटफ़ॉर्मों पर उन सभी कलाकारों के काम को खूब पसंद कर रहे हैं जिन्हें वे अब तक सिर्फ बड़े पर्दे पर देखते थे। इससे एक्टर्स के लिए खुद को अलग-अलग अंदाज़ में एक्सप्रेस करने और दर्शकों तक पहुंचने के नए रास्ते खुल गए हैं।"

आज बॉलीवुड में OTT बनाम थिऐट्रिकल के विषय पर लगातार वाद-विवाद हो रहा है जो धीरे-धीरे बहस का एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। ताहिर कहते हैं कि इन दोनों माध्यमों का उद्देश्य बिल्कुल अलग हैं इसके बावजूद वे दर्शकों का भरपूर मनोरंजन कर सकते हैं। वह कहते हैं, "OTT एक ऐसा माध्यम है जिसके जरिए स्टोरी को चैप्टर-वाइज़ या एपिसोड-वाइज़ दिखाया जाता है, जबकि थिएटर्स में दर्शकों को 120 मिनट का सिनेमैटिक एक्सपीरियंस मिलता है। इन दोनों माध्यमों के मिलने से एक्टर्स और स्टोरीटेलर्स को अपने दर्शकों तक पहुंचने में मदद मिली है, और इसी वजह से पिछले साल चारदीवारी में कैद रहने की मजबूरी के बावजूद हम ऑडियंस तक पहुंचने में कामयाब रहे हैं।"
बेहद टैलेंटेड एक्टर ताहिर आगे कहते हैं, "धीरे-धीरे हमारे शहरों की परिस्थितियां सुरक्षित हो रही हैं और धीरे-धीरे दर्शक थिएटर की ओर वापस लौट रहे हैं, और ऐसे हालात में दोनों ही माध्यम साथ-साथ आगे बढ़ते रहेंगे और मुझे नहीं लगता कि थिएटर बनाम OTT का मुद्दा ज्यादा दिनों तक टिक पाएगा। आने वाले दिनों में डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म उन फ़िल्मों के आर्काइव्स के रूप में काम करेंगे, जिनका दर्शकों ने थिएटर में आनंद लिया है और इस तरह लोग अपनी पसंदीदा फ़िल्मों को कभी भी देखने का भरपूर लुत्फ़ उठा पाएंगे। एक एक्टर के तौर पर, इन प्लेटफ़ॉर्म पर फ़िल्में बनाना बेहद शानदार है जिन्हें फैन्स बार-बार देखते हैं और इसके साथ ही इस साल मैं OTT प्लेटफ़ॉर्मों पर धमाकेदार स्क्रिप्ट्स पर काम करने के लिए काफी उत्सुक हूं।


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