86 साल के रतन टाटा का सबसे अच्छा दोस्त था उनसे 55 साल छोटा! निधन की खबर सुन शोक में डूबे शांतनु नायडू

Ratan tata

Ratan Tata's best friend 31 year old Shantanu Naidu Shares Goodbye post: भारतीय उद्योग जगत के पितामह कहे जाने वाले रतन टाटा अब इस दुनिया में नहीं हैं। 86 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके निधन की खबर सुनते ही पूरे दिन में शोक की लहर आ गई है। रतन टाटा का निधन बुधवार की रात को हुआ था। गुरूवार की सुबह आंख खुलते ही लोगें के लिए यह किसी बड़े झटके से कम नहीं था।

पीएम मोदी समेत इन राजनेताओं ने जताया शोक
बता दें कि रतन टाटा अपने शानदार काम और दयालुता के लिए जाने जाते थे। उनके निधन की खबर सुन नामी उद्योगपति मुकेश अंबानी और गौतम अदाणी ने शोक जताया साथ ही पीएम मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राहुल गांधी और सीएम एकनाथ शिंदे ने भी दुख जाहिर किया।

रतन टाटा के दोस्त थे शांतनु
आपको बाता दें कि रतन टाटा के जाने का दुख किसी को सबसे ज्यादा है तो वो हैं शांतनु नायडू। जी हां, शांतनु नायडू रतन टाटा से उम्र में 55 साल छोटे हैं और वह उनके करीबी मित्र में से एक हैं। शांतनु नायडू सोशल एक्टिविस्ट, पशु प्रेमी, लेखक और युवा उद्यमी हैं। उन्होंने समाज के लिए कई सकारात्मक काम किए हैं।

रतन टाटा के साथ बिताया करते थे अधिक समय
शांतनु नायडू रतन टाटा के साथ अधिक समय बिताया करते थे। उनके जन्मदिन मनाने से लेकर उनका ख्याल रखने तक शांतनु नायडू का नाम आता है। वहीं रतन टाटा के निधन की खबर सुन शांतनु का दिल टूट गया है।

रतन टाटा के निधन की खबर सुन टूट गए शांतनु नायडू
शांतनु ने अपने लिंक्डइन पोस्ट पर रतन टाटा के साथ एक तस्वीर शेयर कर लिखा- 'मेरे दोस्त ने मेरे अंदर अब खालीपन पैदा कर दिया है। मैं इस दुख को भरने की कोशिश में पुरी जिंदगी बिता दूंगा। अलविदा मेरे प्यारे लाइटहाउस'।

बिजनेस के साथ ही समाज के लिए करते हैं काम
आपको बता दें कि शांतनु का जन्म 1993 में पूणे में हुआ था। तेलुगू परिवार में जन्मे नायडू हमेशा से सबसे अलग हटके चले। उन्होंने कई समाज को सुधारने के काम किए हैं। उन्होंने मोटोपॉट नाम की एक संस्था भी बनाई है। जो सड़क पर घूमने वाले कुत्तों की मदद करती है।

शांतनु कैसे बने रतन टाटा के दोस्त
दरअसल शांतनु की संस्था मोटोपॉज ने सड़क पर घूमने वाले कुत्तों के लिए विशेष डेनिम कॉलर बनाए। जिन पर रिफ्लेक्टर लगे हुए थे। जिससे तेज गाड़ियों को भी कुत्तों के होने का संकेत मिल जाता था। इससे बड़ी संख्या में कुत्तों की जान बच सकती है। शांतनु के इस काम ने रतन टाटा का ध्यान खींचा रतन टाटा ने शांतनु को मुंबई बुलाया जिसके बाद से दोनो के बीच एक गहरी दोस्ती हो गई। जिसके बाद से दोनों समाज के कई मुद्दों पर विचार करने लगे और दोस्तों का रिश्ता और भी मजबूत हो गया।

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